मंत्रियों को भी नहीं थी पीएम मोदी-अमित शाह की रणनीति की खबर, यूं खत्‍म किया आर्टिकल 370-35A

कैबिनेट बैठक से पहले गृह मंत्री अमित शाह ने NDA के अपने सहयोगी दलों के नेताओं से भी संपर्क साधा था.

विक्रांत यादव | News18Hindi
Updated: August 5, 2019, 8:19 PM IST
मंत्रियों को भी नहीं थी पीएम मोदी-अमित शाह की रणनीति की खबर, यूं खत्‍म किया आर्टिकल 370-35A
भाजपा ने खत्‍म किया कश्‍मीर का स्‍पेशल स्‍टेटस. (फाइल फोटो)
विक्रांत यादव
विक्रांत यादव | News18Hindi
Updated: August 5, 2019, 8:19 PM IST
देश के इतिहास में 5 अगस्त की तारीख बेहद महत्वपूर्ण फैसले के लिए याद रखी जाएगी. जम्मू-कश्मीर को लेकर सरकार ने इतना बड़ा फैसला किया, लेकिन किसी को कानों-कान खबर नहीं लगी. इस मिशन को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने इस कदर गोपनीयता बरती कि उनके मंत्रिमंडल के साथियों को भी इसकी हवा नहीं थी.

सूत्रों के मुताबिक अधिकांश मंत्रियों को इसके बारे में जानकारी कैबिनेट की बैठक में ही लगी. इस कैबिनेट बैठक का कोई एजेंडा भी मंत्रियों के पास नहीं भेजा गया था और सभी को ये अनुमान था कि कोई बेहद महत्वपूर्ण मामला है, जिसके बारे में कैबिनेट बैठक के दौरान ही एजेंडा टेबल किया जाएगा. कैबिनेट बैठक के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने मंत्रियों को जम्मू-कश्मीर के बारे में लिए जाने वाले इन फैसलों की जानकारी दी.

अमित शाह ने ऐसे बनाई रणनीति
वैसे कैबिनेट बैठक से पहले गृह मंत्री अमित शाह ने NDA के अपने सहयोगी दलों के नेताओं से भी संपर्क साधा था. सूत्रों के मुताबिक उन नेताओं को सिर्फ इतना बताया गया था कि सरकार महत्वपूर्ण बिल लेकर आ रही है और उसमें उन सभी का सहयोग चाहिए. हालांकि बिल के बारे में और उसमें क्या है इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई थी. तीन मंत्रियों प्रह्लाद जोशी, धर्मेंद्र प्रधान और पीयूष गोयल को राज्यसभा सांसदों से संपर्क कर समर्थन जुटाने का काम सौंपा गया. इन मंत्रियों को भी कैबिनेट बैठक से पहले बिल के बारे में जानकारी नहीं दी गई थी. साफ है कि सरकार ने इस मामले में बेहद गोपनीयता बरती और सिर्फ उन्हीं चंद लोगों को इसकी जानकारी थी, जिनकी इन मामलों में कोई ना कोई भूमिका थी.

इस मिशन को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने इस कदर गोपनीयता बरती कि उनके मंत्रिमंडल के साथियों को भी इसकी हवा नहीं थी.


सरकार ने ऐसे पेश किया बिल और...
सरकार को पता था कि जैसे ही वो सदन में बिल पेश करेंगे, वैसे ही विपक्ष खासतौर से कांग्रेस इसका विरोध कर सकती है और यही हुआ भी. विपक्ष की दलील थी कि सरकार अचानक बिल ले आई और उसी दिन उसे पास भी करवाना चाहती है. ऐसी स्थिति में उन्हें बिल को ठीक से पढ़ने का मौका भी नहीं मिला. इस पर सरकार की दलील है कि पहले भी कम से कम 23 बार ऐसा हुआ है, जब सरकार अचानक बिल लेकर आई और उसी दिन उसे पास भी करवाया. ये सभी वाकये कांग्रेस शासन के दौरान ही थे.
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साल 1975 में इंदिरा गांधी को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अयोग्य ठहराया. उस समय अचानक संसद में संविधान संशोधन बिल आया और उसी दिन पास भी हुआ था. जाहिर है कि सरकार का दावा है कि पूर्व में भी ऐसे बिल आए हैं.

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First published: August 5, 2019, 6:06 PM IST
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