गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक के पारित होने पर खुशी जताई

गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार के कदम की तारीफ की (File Photo)
गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार के कदम की तारीफ की (File Photo)

गृह मंत्री (Home Minister) ने कहा कि अब कश्मीरी (Kashmiri), डोगरी (Dogri), उर्दू (Urdu), हिंदी और अंग्रेजी जम्मू और कश्मीर (Kashmir) की आधिकारिक भाषा होंगी. उन्होंने कहा, ‘‘इस विधेयक के तहत, 'गोजरी', 'पहाड़ी' और 'पंजाबी' जैसी प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं (Regional Languages) के विकास (development) की दिशा में विशेष प्रयास किए जाएंगे.’’

  • भाषा
  • Last Updated: September 23, 2020, 12:02 AM IST
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नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) ने मंगलवार को लोकसभा (Lok Sabha) द्वारा जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा (संशोधन) विधेयक-2020 (Jammu and Kashmir Official Language Amendment Bill-2020) पारित होने को जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के लोगों के लिए महत्वपूर्ण बताया. शाह ने ट्वीट (Tweet) कर कहा कि इस विधेयक के तहत 'गोजरी', 'पहाड़ी' और 'पंजाबी' (Punjabi) जैसी क्षेत्रीय भाषाओं के विकास के लिए विशेष प्रयास (special efforts) किए जाएंगे. उन्होंने ट्वीट किया, “जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए आज एक महत्वपूर्ण दिन है जब लोकसभा में जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा (संशोधन) विधेयक पारित किया गया है. इस एतिहासिक विधेयक (historic bill) के साथ ही... जम्मू-कश्मीर के लोगों का बहुप्रतीक्षित सपना सच हो गया.”

गृह मंत्री (Home Minister) ने कहा कि अब कश्मीरी (Kashmiri), डोगरी (Dogri), उर्दू (Urdu), हिंदी और अंग्रेजी जम्मू और कश्मीर (Kashmir) की आधिकारिक भाषा होंगी. उन्होंने कहा, ‘‘इस विधेयक के तहत, 'गोजरी', 'पहाड़ी' और 'पंजाबी' जैसी प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं (Regional Languages) के विकास (development) की दिशा में विशेष प्रयास किए जाएंगे.’’

"जम्मू-कश्मीर की संस्कृति को संरक्षित करने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद देता हूं"
अमित शाह ने विधेयक के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद करते हुए ट्वीट किया ‘‘मैं इस विधेयक के माध्यम से जम्मू-कश्मीर की संस्कृति को संरक्षित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद देता हूं. मैं जम्मू-कश्मीर की अपनी बहनों और भाइयों को यह आश्वासन भी देना चाहता हूं कि मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर के गौरव को वापस लाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी.’
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पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया गया था. इसके साथ ही उसे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था. तबसे लगातार जम्मू-कश्मीर में कई बदलाव आ चुके हैं.
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