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जम्मू-कश्मीर: अमित शाह ने कहा- हिरासत में रखे गये नेताओं को बहुत जल्द रिहा किया जायेगा

भाषा
Updated: March 16, 2020, 12:02 AM IST
जम्मू-कश्मीर: अमित शाह ने कहा- हिरासत में रखे गये नेताओं को बहुत जल्द रिहा किया जायेगा
शाह ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि जम्मू कश्मीर के राज्य का दर्जा जल्द बहाल किया जायेगा

पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) राज्य का विशेष दर्जा पिछले साल पांच अगस्त को समाप्त कर दिया गया था जिसके बाद सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) और महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया था.

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नई दिल्ली. नवगठित जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी (Jammu Kashmir Apni Party) के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी (Altaf Bukhari) ने रविवार को यहां कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने आश्वासन दिया है कि जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) में शेष राजनीतिक बंदियों को ‘‘बहुत जल्द’’ ही रिहा किया जायेगा.

शाह ने प्रतिनिधिमंडल को यह भी आश्वासन दिया कि जम्मू कश्मीर के राज्य का दर्जा जल्द बहाल किया जायेगा और क्षेत्र के जनसांख्यिकी में बदलाव नहीं किया जायेगा. बुखारी के नेतृत्व वाली अपनी पार्टी के 24 सदस्यीय एक प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी में शाह से विस्तृत चर्चा की. प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की थी.

लगभग दो घंटे तक चली बैठक के बाद बुखारी ने पत्रकारों से कहा कि शेष राजनीतिक बंदियों की रिहाई समेत कई मुद्दों पर गृह मंत्री से चर्चा हुई. बुखारी ने कहा, ‘‘हां, हमने शेष राजनीतिक नेताओं और अन्य की हिरासत के बारे में चर्चा की और गृह मंत्री ने कहा कि यह एक प्रक्रिया है और हम उन्हें बहुत जल्द रिहा करेंगे.’’

5 अगस्त 2019 से हिरासत में हैं नेता



पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा पिछले साल पांच अगस्त को समाप्त कर दिया गया था जिसके बाद सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया था. नेशनल कांफ्रेंस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को 221 दिनों तक हिरासत में रखे जाने के बाद 13 मार्च को रिहा किया गया है.

दबाव में नहीं लिए गए पाबंदी में छूट देने के फैसले
गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, पाबंदियों पर प्रतिनिधिमंडल की आशंकाएं दूर करते हुए शाह ने कहा कि पाबंदियों में छूट के संबंध में सभी फैसले जमीनी वास्तविकताओं पर आधारित हैं, न कि किसी दबाव में लिये गए हैं.

हिरासत से लोगों की रिहाई, इंटरनेट बहाल किये जाने, कर्फ्यू में छूट जैसे कदमों का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा, ‘‘यहां तक कि आने वाले समय में राजनीतिक कैदियों को भी रिहा कर दिया जाएगा क्योंकि सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हो, चाहे वह आम कश्मीरी हो या सुरक्षाकर्मी.’’

जल्द ही बहाल होगा राज्य का दर्जा
शाह ने प्रतिनिधिमंडल को यह भी आश्वासन दिया कि जम्मू कश्मीर के राज्य का दर्जा जल्द बहाल किया जायेगा और क्षेत्र के जनसांख्यिकी में बदलाव नहीं किया जायेगा.

गृह मंत्री ने विश्वास जताया कि, ‘‘अगले कुछ महीनों में जमीनी स्तर पर बदलाव दिखाई देंगे.’’ उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को यह आश्वासन भी दिया, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राजग सरकार जम्मू कश्मीर के समग्र विकास के लिए सभी कदम उठायेगी.’’

केन्द्र द्वारा पिछले साल पांच अगस्त को राज्य का विशेष दर्जा समाप्त किये जाने के बाद पहली बार राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी. प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाये गये लगभग 40 मुद्दों पर गृह मंत्री ने कहा कि सरकार का इस केंद्र शासित क्षेत्र में जनसांख्यिकी बदलाव का कोई इरादा नहीं है और ‘‘ इस तरह की बातों का कोई आधार नहीं है.’’

प्रधानमंत्री ने भी प्रतिनिधिमंडल को इसी तरह का आश्वासन दिया था. एक आधिकारिक बयान के अनुसार शाह ने कहा कि सरकार जल्द ही जम्मू कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने की उम्मीदों को पूरा करने के लिए समाज के सभी तबकों के साथ मिलकर काम करेगी.

बयान के अनुसार गृह मंत्री ने कहा कि भारत के हित में भी यह अच्छा है, क्योंकि यह क्षेत्र सीमावर्ती इलाके में है.

जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए सुझाव मांग रही सरकार
शाह ने कहा कि उनकी सरकार जम्मू कश्मीर के समग्र विकास के लिए सभी राजनीतिक दलों और लोगों से सुझाव और प्रतिक्रिया मांग रही है.

केन्द्र द्वारा राज्य का विशेष दर्जा वापस लिये जाने और राज्य को जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख के रूप में दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बांटने के पिछले साल पांच अगस्त की घोषणा के बाद कई राजनीतिक नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था. उन्होंने जोर दिया कि जम्मू कश्मीर में केंद्रीय कानूनों के कार्यान्वयन में कोई भेदभाव नहीं है और सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार शीघ्र आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए एक औद्योगिक नीति लेकर आएगी.

शाह ने उम्मीद जताई कि अगले चार वर्षों में जम्मू कश्मीर में पिछले 70 वर्षों में मिले 13,000 करोड़ रुपये से तीन गुना अधिक निवेश आयेगा.

दो घंटे चली बैठक
पार्टी प्रमुख अल्ताफ बुखारी के नेतृत्व में शिष्टमंडल और गृह मंत्री के बीच लगभग दो घंटे तक बैठक चली. इसके बाद बुखारी ने कहा बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें जम्मू-कश्मीर की जनसांख्यिकी में संभावित बदलाव को लेकर लोगों के बीच डर, राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने और हिरासत में रखे गए नेताओं की रिहाई का मुद्दा शामिल है.

बुखारी ने कहा, 'गृहमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जनसांख्यिकी में बदलाव का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता.'

उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने यह भी दोहराया कि सरकार जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा लौटाने के लिए प्रतिबद्ध है. साथ ही परिसीमन की प्रक्रिया जल्द से जल्द वैज्ञानिक तरीके से पूरी की जाएगी.

जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी के प्रमुख ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में शामिल होने वाले केन्द्र शासित प्रदेश से युवाओं के लिए उम्र में छूट, बागवानी और कृषि में राहत समेत विभिन्न मुद्दों को भी उठाया.

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First published: March 15, 2020, 9:33 PM IST
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अपडेटेड: April 09 (05:00 PM)
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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