Exclusive: राजनाथ सिंह बोले- मसूद अजहर पर चीन को मना लेंगे, राफेल सौदे की फाइलें नहीं हुईं चोरी

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि UPA सरकार ने 2008 में केवल एक बार किसानों के ऋणों को माफ किया था. हालांकि, गृह मंत्री का कहना है कि बीजेपी ने कई बार किसानों के कर्ज माफ किए.

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Updated: March 17, 2019, 9:04 AM IST
Exclusive: राजनाथ सिंह बोले- मसूद अजहर पर चीन को मना लेंगे, राफेल सौदे की फाइलें नहीं हुईं चोरी
गृह मंत्री राजनाथ सिंह की फाइल फोटो
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Updated: March 17, 2019, 9:04 AM IST
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने सभी अनुमानों को धता बताते हुए 282 सीटों पर जीत दर्ज की. हालांकि साल 2014 के लोकसभा चुनाव सरीखी परिस्थितियां इस बार नहीं हैं. उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के गठबंधन के साथ-साथ कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी वाड्रा की एंट्री ने बीजेपी के सामने कड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रसिद्धि के बावजूद इस बार का चुनाव बीजेपी के लिए कठिन है. खासतौर से मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी बीजेपी के लिए पर परिस्थितियां बदल रहे हैं. इसके साथ ही बीजेपी के समक्ष नौकरी, राष्ट्रीय सुरक्षा और किसानों का संकट सरीखे मुद्दे भी हैं. इन्हीं सब से जुड़े सवालों के जवाब बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने Network18 Group के एडिटर इन चीफ राहुल जोशी को साक्षात्कार में दिए.

साक्षात्कार के दौरान राजनाथ सिंह ने विश्वास जताया कि देश एक बार फिर से मोदी की सत्ता में वापसी चाहता है.



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यहां पढ़ें साक्षात्कार के संपादित अंश

पुलवामा के गुनाहगार मसूद अजहर को आतंकी करार देने में चीन ने चौथी बार अपने वीटो का इस्तेमाल किया है. इसकी क्या वजह है? इस बार हम लोगों को उम्मीद थी कि शायद उन लोगों का रुख बदलेगा पर ऐसा हुआ नहीं. क्या आप इसे कूटनीतिक असफलता भी मानते हैं?

इसको कूटनीतिक असफलता मान लेना गलत है. बीते पांच साल में हमें कई कूटनीतिक सफलताएं मिली हैं. हमें ये समझने की जरूरत है कि चीन ने आखिर ऐसा क्यों किया? मसूद अजहर के लिए चीन ने चौथी बार वीटो पावर का इस्तेमाल किया है. भारत को चीन की मौजूदा स्थिति समझने की जरूरत है. जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के लिए चीन को समझाने की कोशिश जारी है. मसूद को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया जाना चाहिए. लेकिन, चीन ने ऐसा क्यों नहीं किया और क्यों नहीं करना चाहता है, इसके पीछे निश्चित तौर पर कोई कारण हैं. भारत को पहले ये समझने की जरूरत है.
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तो भारत के सामने अब विकल्प क्या है? हम इसे हासिल कैसे करेंगे?

हमने चीन से बात की है. चीन भी हमारा पड़ोसी मुल्क है. मैं आश्वस्त हूं कि आज नहीं तो कल कामयाबी मिलेगी.

और क्या हम उन्हें बताएंगे कि हम स्थिति से निराश हैं?

भारत कभी निराश नहीं होता.अब, उनके पास इसके लिए कुछ कारण होगा, हमें यह समझना होगा कि ऐसा करने के पीछे उनके कारण क्या हैं लेकिन हम चीन को समझाने की कोशिश भी करेंगे. मसूद अजहर के विषय में, यह तथ्य कि हमें सहयोग नहीं मिल रहा है ... ऐसा नहीं है कि हम बहुत परेशान हैं, ऐसा नहीं है लेकिन हमें विश्वास है कि कि आज नहीं तो कल कामयाबी मिलेगी.

इस वजह से देश में एक निश्चित वातावरण बनाया जा रहा है ...

मैं राजनयिक सफलता के बारे में एक बात कहना चाहता हूं. यह पहली बार है कि इस्लामिक सहयोग संगठन ने एक भारतीय मंत्री को सम्मानित अतिथि के रूप में बुलाया. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है. तो किसी ने भी इसके बारे में नहीं सोचा होगा. कौन सा दूसरा काम इससे ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है?

यह सब देखकर, यह और भी चौंकाने वाला लगता है कि चीन पाकिस्तान की ओर झुक रहा है ...

इसके कुछ कारण होंगे. हर देश का अपना कारण होता है ... कुछ होगा. इसमें जाने की कोई जरूरत नहीं है. लेकिन मुझे लगता है कि चीन से नाता तोड़ना नासमझी होगी.

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ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि चीन के रुख के कारण भारत में सभी चीनी उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए. देश में आने वाले चीनी निवेश पर सवाल उठ रहे हैं. क्या आपको लगता है कि कुछ ऐसा है जो हमें करना चाहिए?

देखिए, विकास का सवाल इसमें भी आता है. क्या आप यह नहीं कहेंगे कि किसी भी चीज़ को किसी छोटे से तोड़ना अनायास ही है? कभी-कभी मजबूरियां होती हैं जिनकी वजह से हमारी उम्मीदें पूरी नहीं होती हैं, कोई न कोई कारण तो होगा लेकिन तर्कसंगत और बुद्धिमान लोग, वे सभी निर्णय लेने के लिए समय लेते हैं. वे एक, दो या तीन मुद्दों पर रिश्ते नहीं तोड़ते. हम उन रिश्तों को निभाने की कोशिश करेंगे जो हमने बनाए हैं.

आप जो कह रहे हैं, उससे ऐसा लगता है कि आपको चीन पर बहुत विश्वास है ...

मुझे आशा है. इसमें समय लग सकता है, लेकिन चीन सही रास्ते पर आएगा.

और यह जल्दी से होगा? इस मुद्दे को छह महीने के लिए टाल दिया गया है ...

छह महीने के बाद, 2-3 महीने की टेक्निकल होल्ड हो सकती है. मुझे यकीन है कि हम सफल होंगे.

आपने भारत द्वारा पाकिस्तान में किए गए दो हमलों के बारे में बात की है. क्या आप तीसरे स्ट्राइक पर कोई जानकारी दे सकते हैं?

मैंने यह नहीं कहा कि भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ तीन सर्जिकल स्ट्राइक की. मैंने यह नहीं कहा कि यह पाकिस्तान पर हुआ. मैंने कहा था कि बीते पांच साल में हमने तीन स्ट्राइक्स की. हर कोई दो स्ट्राइक्स के बारे में जानता है.

तो तीसरी स्ट्राइक कहां की गई थी?

मैं कुछ भी नहीं कह सकता जो गलत हो लेकिन मैं इसकी विस्तृत जानकारी नहीं दे सकता. मैं जानकारी को सार्वजनिक नहीं करना चाहता. बहुत से लोग इसके बारे में जानते हैं.

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पाकिस्तान में दो हमले किए गए, लेकिन तीसरा पाकिस्तान में नहीं हुआ. आप क्या कहना चाह रहे हैं?

मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि दो हमले पाकिस्तान में हुए लेकिन केवल दो ही हमले पाकिस्तान में हुए.

तीसरा पाकिस्तान में नहीं हुआ, यह कहीं और हुआ ...

हां, यही सच है.

एक बात जो बार-बार सामने आ रही है कि बालाकोट हवाई हमले का रिजल्ट क्या रहा. इसके बारे में अलग-अलग बातें कही जा रही हैं. अमित शाह कहते हैं कि 250 लोग मारे गए अन्य लोग कहते हैं कि 300, 350 आदि. इस बारे में भी बात होती है कि कैसे राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन ने कहा कि हवाई हमले के समय, लगभग 300 मोबाइल फोन कनेक्शन वहां सक्रिय थे. इसलिए हर कोई एक नंबर दे रहा है जो कि लगभग 300 है. सरकार खुले तौर पर इस बारे में कुछ क्यों नहीं कह रही है?

मैं संख्याओं में नहीं जाना चाहता हूँ और वैसे भी इसके विस्तार में जाने का कोई मतलब नहीं है. और सच कहें तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोई भी इस पर सवाल उठा रहा है. 'क्या एयरस्ट्राइक हुई थी, एयरस्ट्राइक में कितने लोग मारे गए थे' यह भी नहीं पूछा जाना चाहिए. यदि भारतीय लोग भारतीय सेना के बारे में सवाल पूछ रहे हैं, तो इसका मतलब है कि वे बलों की वीरता पर सवाल उठा रहे हैं. जाहिर है कि हवाई हमले हुए इसमें कोई दो राय नहीं है. यह भी सच है कि पाकिस्तान को झटका लगा है, लेकिन मुझे आश्चर्य है कि इस तथ्य को जानने के बावजूद लोग ‘कितने लोग मारे गए’ जैसे सवाल उठा रहे हैं।.क्यों कुछ भारतीय लोग और राजनीतिक दल हैरान हैं? हमले को लेकर पाकिस्तान को झटका तो समझ में आता है, लेकिन भारतीय राजनेताओं के हैरान होने या हड़बड़ाने के पीछे क्या कारण है?

राहुल गांधी ने कहा कि यूपीए सरकारों के दौरान भी कई हमले हुए, लेकिन कांग्रेस ने उनका इस तरह 'मार्केटिंग' नहीं किया ...

रहा होगा. हमारी सरकार 'मार्केटिंग' नहीं है' हमने अपने वायु सेना कर्मियों की वीरता की सराहना की; क्या यह नहीं किया जाना चाहिए? हमें गर्व की अनुभूति होती है.'

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान का कहना है कि वह बातचीत के लिए तैयार हैं. क्या आपको लगता है कि बातचीत का समय आ गया है? आप भारत-पाकिस्तान संबंधों को कैसे आगे बढ़ता देख रहे हैं?

पाकिस्तान सरकार की ओर से अपनी जमीन पर सभी आतंकी शिविरों को नष्ट करने की पहल होनी चाहिए. उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पाकिस्तानी सरजमीं पर आतंक को कोई संरक्षण न दिया जाए. अगर वे ऐसा करते हैं हम बात कर सकते हैं, लेकिन आतंकवाद और बातचीत एक हाथ से नहीं हो सकते. कुछ ऐसी ईमानदारी दिखाई जानी चाहिए कि पाकिस्तान आतंकवाद का मुकाबला करना चाहती है.

पाकिस्तान को क्या करना चाहिए जिसके बाद हम उनसे बातचीत कर सकते हैं?

उन्हें आतंकवादी शिविरों का सफाया करना चाहिए और यह स्पष्ट रूप से कहना चाहिए कि वे अपनी मिट्टी का इस्तेमाल आतंकवादियों को नहीं करने देंगे. उनके खिलाफ कार्रवाई करें… फिर हम पाकिस्तान के साथ बातचीत कर सकते हैं. हम पड़ोसी देश के साथ भी अच्छे संबंध रखना चाहते हैं, लेकिन आतंकवाद और बातचीत एक हाथ से नहीं हो सकते.

एक विचार है कि हमें पाकिस्तान के साथ क्रिकेट नहीं खेलना चाहिए, ताकि उनके अभिनेता भारत में काम न करें.क्या आप इस दृष्टिकोण से सहमत हैं?

स्थितियां ऐसी बनीं कि किसी भी देशभक्त का ऐसा करने का मन नहीं करेगा, लेकिन वक्त के साथ चीजें बदल जाती हैं.

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क्या भारत को विश्व कप में पाकिस्तान से खेलना चाहिए?

यह अधिकारी और बीसीसीआई तय करेंगे. मैं इस पर कोई सुझाव नहीं देना चाहूंगा. अगर वे इसके लिए कहेंगे तो मैं सुझाव दूंगा.

कुछ बड़े क्रिकेटरों ने कहा है कि हमने हमेशा विश्व कप में पाकिस्तान को हराया है और मैच रद्द करने के बजाय हमें उन्हें हराना चाहिए और दो अंक जीतने चाहिए.

मैं इस बहस में नहीं पड़ना चाहता. हर संस्था की स्वायत्तता है. मैं बीसीसीआई को निर्णय लेने के लिए यह स्वायत्तता देता हूं. लेकिन कोई भी निर्णय लेने से पहले सोचें और यह ध्यान रखें कि वह हमारे राष्ट्रीय गौरव को प्रभावित नहीं करेगा.

आप कह रहे हैं कि भारतीयों के बीच ऐसी भावनाएं हो सकती हैं, यह आप को समझ में आता है और आप इसका सम्मान करते है.

वास्तव में.

पुलवामा की बात करें तो CRPF पर इतना बड़ा हमला किया गया. बहुत सारे विस्फोटक वहां ले जाया गया. क्या यह एक खुफिया विफलता नहीं है?

कई बार हमें ऐसे खुफिया इनपुट मिलते हैं कि इस तरह की घटना कहीं और हो सकती है लेकिन कभी-कभी हमारे पास स्थान के बारे में विशिष्ट जानकारी नहीं होती है. हम जिला और उप-मंडल को जान सकते हैं .पूरे मामले की जांच की जा रही है. मैं जांच पूरी होने के बाद ही उस पर टिप्पणी कर सकूंगा.

कश्मीर समस्या का हल क्या है? हम वहां कैसे सामान्य स्थिति ला सकते हैं? हम वहां चुनाव की उम्मीद कब कर सकते हैं?

जल्द ही चुनाव होंगे. हमने सिर्फ स्थानीय निकाय, ग्रामीण पंचायत और नगर निकाय चुनाव कराए. चुनाव आयोग को फैसला करना है और मुझे विश्वास है कि वे जल्द ही इस पर फैसला करेंगे. हम जम्मू-कश्मीर में भी निर्वाचित सरकार चाहते हैं.

एक विचार है कि हमने जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव नहीं कराकर पाकिस्तान को झुकाया है...

लोकसभा चुनाव हो रहे हैं. लोकसभा चुनाव के साथ-साथ विधानसभा चुनाव होंगे या नहीं, इस पर चुनाव आयोग को फैसला लेना था. किसी भी राजनीतिक दल को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है.

देश में कश्मीरियों पर कई हमले हुए हैं ...

देखिए, मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि बहुत सारे हमले हुए हैं. मैंने खुद इस संबंध में सावधानी बरती है। जब इस तरह का पहला हमला हुआ, तो मैंने एक विशेष सचिव नियुक्त किया.उनका काम सभी राज्य सचिवों और पुलिस प्रमुखों के साथ समन्वय करना था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी कश्मीरी किसी भी उत्पीड़न का सामना न करे. आपने देखा होगा कि मैंने अपनी सभी जनसभाओं में कहा था कि कश्मीरी बच्चे हमारे बच्चे हैं.उन्हें प्यार और सुरक्षा देना हमारी जिम्मेदारी है. मैंने बीजेपी कार्यकर्ताओं से भी यही अपील की. मैं जानता हूं कि 90% कश्मीरी लोग शांति से रहना चाहते हैं और कश्मीर का विकास चाहते हैं. उन्हें कश्मीर की मौजूदा स्थिति भी पसंद नहीं है लेकिन कुछ ताकतें हैं. और फिर हमारा पड़ोसी देश है जिसकी वजह से कुछ न कुछ होता रहता है. निश्चिंत रहें, यह रुक जाएगा. बहुत हो चुका.

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क्या आपको लगता है कि लोग पीएम नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व पर भरोसा करते हैं कि वह भविष्य में ऐसी चीजों का दृढ़ता से मुकाबला कर पाएंगे?

लोगों का मानना है कि यह एक निर्णायक नेतृत्व है. लोगों का यह भी मानना है कि हमारे पीएम 'ईमानदार' हैंय वह कभी भी भ्रष्टाचार से समझौता नहीं कर सकते. वह एक दूरदर्शी हैं.

आगामी चुनावों के लिए आपके मुख्य मुद्दे क्या हैं?

सुशासन और विकास, हमने जो भी किया है उसे आगे बढ़ाएंगे, भविष्य में हम जो कुछ भी करना चाहते हैं उसे हमारे चुनावी घोषणा पत्र में रेखांकित किया जाएगा जो 'संकल्प पत्र' है. हम जनता की आकांक्षाओं को समझने की कोशिश कर रहे हैं. हमने भारत के मन की बात, एक कार्यक्रम शुरू किया है, जिससे वे अगले पांच वर्षों में लोगों की अपेक्षाओं को समझ सकें. हमने इसके लिए वेबसाइट बनाई हैं, लोग मिस्ड कॉल करके भी इसे कर सकते हैं. हम एक घोषणापत्र बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप हो.

क्या आप 3-4 प्रमुख मुद्दों को बता सकते हैं जो घोषणापत्र में होंगे?

समाज के सभी वर्गों के लिए चीजें होंगी - किसान, सैनिक, वकील, अन्य पेशेवर. यह आर्थिक विकास के लिए हमारी दृष्टि को भी रेखांकित करेगा क्योंकि उस मोर्चे पर सरकार से बहुत उम्मीदें हैं. पांच वर्षों के भीतर, देश दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया है, अर्थव्यवस्था का विस्तार हो गया है क्योंकि हम ब्रिटेन को 5 वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में आगे निकल गए हैं. अर्थशास्त्रियों ने स्वीकार करना शुरू कर दिया है कि भारत 10-12 वर्षों के भीतर दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकता है.

जब हम आर्थिक विकास के बारे में बात करते हैं, तो हमें नौकरियों के बारे में भी बात करनी होगी. लोगों का मानना है कि आपने 7-7.5% जीडीपी ग्रोथ दी है, लेकिन जॉब क्रिएशन एक मुद्दा है. सरकार ने नौकरियां पैदा करने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. आप इसका क्या कारण मानते हैं?

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किसी पार्टी का राजनीतिक कार्यकर्ता उस विशेष पार्टी को बढ़ावा देने के लिए गलत बातें कह सकता है, लेकिन आंकड़े गलत नहीं हो सकते. MUDRA योजना के तहत, 4-4.5 करोड़ युवाओं को पहली बार ऋण मिला है.जिसने भी कर्ज लिया है, बिना गिरवी रखे, रोजगार पा चुका होगा. उसके साथ / उसके साथ एक या दो और लोगों को काम मिला होगा.दूसरे, यह सड़क निर्माण की सबसे तेज दर है जो स्वतंत्र भारत में हुई है. हवाई अड्डों, रेलवे लाइनों, विनिर्माण क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का विकास देखा जा सकता है। इतना कामहुआ; नौकरी के अवसर कैसे घट सकते हैं?

पीएम यह भी कहते हैं कि इतनी आर्थिक गतिविधियां हुईं कि रोजगार पैदा हुए. आप तस्वीर को कैसे देखते हैं? पूरे विपक्ष ने बीजेपी को हराने के लिए महागठबंधन बनाया है तो, 2019 में आप अपने आंकड़ों को कैसे देखते हैं?

कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों के लिए, गठबंधन एक मजबूरी होगी लेकिन जहां तक बीजेपी की बात है, तो गठबंधन एक मजबूरी नहीं, बल्कि प्रतिबद्धता है. अटल जी पहले पीएम थे जिन्होंने छह साल तक सरकार चलाने के लिए 24 दलों को साथ लिया. हमारे साथ भी ऐसा ही है. मैं कह सकता हूं कि 2014 की तुलना में हमारे सहयोगी बढ़े हैं.

कुछ ने छोड़ भी दिया है. चंद्रबाबू नायडू चले गए. शिवसेना के साथ भी आपका वाकयुद्ध जारी है.

इस तरह के विचार घर में भी होते हैं. आपके भाई या बेटे के साथ आपके छोटे-छोटे मामले हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि संबंध टूट रहा है. शिवसेना हमारी बहुत पुरानी सहयोगी है.शिव सेना और जद (यू) हमारे परिवार के सदस्यों की तरह हैं.

तो आप सहयोगियों पर जोर दे रहे हैं. आप सहयोगियों के साथ आगे बढ़ेंगे?

हां, हम उनके साथ चलेंगे. भले ही हमें स्पष्ट बहुमत मिलेगा, सरकार में सभी को शामिल करेंगे. इसे प्रतिबद्धता कहा जाता है. वे महागठबंधन कहते रहते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि वह भी ठीक से एक साथ नहीं आ पा रहा रहे हैं.

पिछली बार आपकी जीत में हिंदी हार्टलैंड की प्रमुख भूमिका थी.आपने वहां लगभग 90% सीटें जीतीं लेकिन उस प्रदर्शन को दोहराना थोड़ा अवास्तविक लगता है. आप उस घाटे को कैसे पूरा करेंगे?

2014 में, मैं बीजेपी अध्यक्ष था और पार्टी ने मोदी जी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किया था.उस समय भी, लोग कहते थे कि स्पष्ट बहुमत संभव नहीं होगा. लोगों ने कहा था. बीजेपी करीब 225 सीटें जीतेगी. मोदी जी से चर्चा के दौरान भी मैं कहता था कि हम स्पष्ट बहुमत से जीतेंगे. मोदी जी कहते थे कि लोग कहते हैं कि हम लगभग 225 सीटें जीतेंगे ', लेकिन मैंने कहा कि मोदी लहर ऐसी है कि मुझे ऐसा लगता है.

आज भी आपको लगता है कि मोदी लहर बरकरार है?

साल 2014 में, लोगों ने मोदी जी को राष्ट्रीय स्तर पर काम करते नहीं देखा था. लोगों ने गुजरात में उनके शासन के लिए उनकी सराहना की. गुजरात के बारे में लोगों ने थोड़ा बहुत सुना था, लेकिन पिछले पांच सालों में लोगों ने मोदी जी की शासन शैली को देखा है इसलिए मैं कह सकता हूं कि उन पर लोगों का भरोसा बढ़ा है इसमें कोई दोराय नहीं है.सभी को इसे स्वीकार करना चाहिए. मेरा मानना है कि विरोधियों को भी यह मानना चाहिए.

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2014 में जीतने के बाद, आपने कई राज्य चुनाव जीते. आपने दिल्ली या बिहार जैसे कुछ राज्यों को खो दिया लेकिन आपने कई राज्यों में जीत हासिल की. वास्तव में, यूपी आपके लिए एक ऐतिहासिक जीत थी, लेकिन जैसा कि हम 2019 के चुनावों के करीब आते वक्त आपको राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हार का सामना करना पड़ा, जहां आपका गढ़ था. तीनों राज्यों में कांग्रेस सत्ता में आई. क्या आपको लगता है कि यह आपके लिए लोकसभा चुनाव में झटका होगा क्योंकि 2014 में तीन राज्यों ने आपको बड़ा सहारा दिया था?

मप्र में हमारी सरकार 15 साल तक सत्ता में रही. कभी-कभी, लोग बदलाव चाहते हैं. यही कारण रहा होगा. बीजेपी का वोट शेयर कांग्रेस से 0.5% अधिक है. छत्तीसगढ़ एक सवालिया निशान है, लेकिन हमें राजस्थान में इतना बुरा नुकसान नहीं हुआ. केवल 1.25-1.50% वोट शेयर का अंतर था. कभी-कभी ये चीजें एंटी-इनकंबेंसी के कारण होती हैं.मैंने विधानसभा चुनावों के प्रचार के दौरान देखा कि लोगों का हमारे पीएम के प्रति बहुत सम्मान था. लोग कहते थे कि हमारे पास राज्य सरकार के साथ छोटे मुद्दे हैं, लेकिन केंद्र में हम बीजेपी को वोट देंगे.'

क्या आप सहमत हैं कि लोग राज्य और केंद्र में अलग-अलग वोट देते हैं?

हाँ. जिन मुद्दों पर लोग वोट देते हैं वे राज्य और केंद्रीय चुनावों में भिन्न होते हैं. अधिकांश मुद्दे समान हैं, लेकिन कुछ अलग हैं.

शरद पवार जी  ने हाल ही में कहा था कि बीजेपी अकेली सबसे बड़ी पार्टी बनेगी, लेकिन मोदी जी पीएम नहीं होंगे, इसका मतलब है कि बीजेपी अन्य दलों के समर्थन से सरकार बनाएगी और कुछ अन्य नेता सामने आएंगे. इस बारे में आपका क्या कहना है?

यह हवा में महल बनाने जैसा है. पीएम मोदी , पीएम थे और वह पीएम बने रहेंगे. इस बारे में कोई बहस नहीं है कि कितनी सीटें आती हैं. विपक्ष कुछ भ्रम पैदा करने की कोशिश करेगा, लेकिन पीएम मोदी ही पीएम बनेंगे.

आपकी सरकार में एक मंत्री हैं जिन्हें उनके काम के लिए सराहा जाता है.आप भी सहमत हैं लेकिन उन बयानों के बारे में क्या जो उन्होंने पिछले 2-3 महीनों में दिए हैं?

उनके बयानों को एक अलग तरह से पेश किया गया है. मैं नितिन गडकरी को लंबे समय से जानता हूं, क्योंकि इससे पहले भी वह बीजेपी अध्यक्ष थे. उनका अच्छे दिल के हैं. उन्होंने कहा कि उनके बयानों को गलत तरीके से चित्रित किया गया है.

उन्होंने तुरंत स्पष्ट नहीं किया. ऐसी बातें थीं कि वह नेतृत्व से नाखुश हैं ...

जिन्हें बातें बनानी हैं, वे बनाते हैं. हमारे पास इस बारे में कहने के लिए कुछ भी नहीं है.

यूपी इस चुनाव का केंद्र बिंदु है. पिछले चुनाव में भी, आपने यूपी में अच्छा प्रदर्शन किया और राज्य आगामी चुनावों में भी प्रमुख भूमिका निभाएगा. यहां, गठबंधन सबसे मजबूत है. सपा और बसपा दो बड़ी पार्टियां एक साथ आई हैं. यहां देखा गया है, जैसे कि कैराना, फूलपुर और गोरखपुर में, गठबंधन के कारण आपको हार का सामना करना पड़ा. अगर आप मुस्लिम, जाटव और यादव वोटों को एक साथ गिनते हैं, तो यह 40% के पार है. आप यूपी में अपने प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीद कैसे करते हैं?

यदि आप सपा और बसपा दोनों के वोट शेयर को जोड़ते हैं, तो हम आगे थे और फिर से आगे रहेंगे. इसके बारे में कोई भ्रम न हो.

लेकिन वे इस बार साथ आए हैं. उन्होंने अपने दोनों चुनाव चिन्ह एक झंडे पर लगाए हैं. यह दिखाने की बहुत कोशिश की जा रही है कि वे एक साथ हैं.

भारतीय राजनीति में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जहां किसी पार्टी के 100% वोट गठबंधन के साथी को ट्रांसफर हो गए हों.

बसपा के वोटर्स में ट्रांसफर की प्रवृत्ति है...

नहीं, किसी भी उदाहरण में पूरी तरह से वोट ट्रांसफर नहीं हुआ है. कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर हो सकता है, लेकिन यह रेयर है. यदि उनका टोटल वोट शेयर 30% था, तो मैं आपको आश्वासन दे सकता हूं कि यह इस बार गर्त में जाएगा क्योंकि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वोट ट्रांसफर हो जाएंगे.

कांग्रेस फैक्टर का क्या असर होगा ? क्या यह आपके 'सवर्ण' वोटों को खा जाएगा या इससे महागठबंधन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा?

हमारे पास न केवल लोगों के एक विशेष वर्ग के वोट हैं, बल्कि समाज के सभी वर्गों का समर्थन है. हमें अल्पसंख्यक वोट भी मिलेंगे.  ऐसा नहीं है कि हमें अल्पसंख्यक वोट नहीं मिलेगा और सपा, बसपा और कांग्रेस ही ऐसी पार्टियां हैं जिन्हें अल्पसंख्यक वोट मिलेंगे. इस सरकार के बाद अल्पसंख्यकों के भीतर भी सुरक्षा की भावना पैदा हुई है.

तो मोदी जी और योगी जी के प्रचार पर कितना बड़ा असर पड़ेगा?

मोदी जी हमारे पीएम हैं और योगी जी हमारे सीएम हैं, तो जाहिर है कि यूपी में उनका प्रभाव होगा.

आप भी स्टार कैंपेनर हैं. आप लंबे समय से चुनाव प्रचार कर रहे हैं.

मैं अपने छोटे से तरीके से कोशिश करता रहता हूं.

आप इस बार लखनऊ से भी लड़ेंगे?

हां बेशक. मुझे लखनऊ के लोगों से बहुत प्यार मिला है.

और मोदी जी बनारस से?

हां, मोदी जी बनारस से चुनाव लड़ेंगे.

लगभग दो दशक बाद, केंद्र और यूपी में बीजेपी सत्ता में है. क्या यूपी में एंटी इनकंबेंसी फैक्टर इस वजह से पैदा हो सकता है?

यह सत्ता-समर्थक होगा, एंटी-इंकंबेंसी का कोई सवाल नहीं है.

मैंने सुना है कि इस बार कई टिकट कटने वाले हैं, कुछ लोग कह रहे हैं कि लगभग 30-35 टिकट काटे जा सकते हैं.

अब क्या होगा, कैसे होगा...

कुछ 2-4 सांसदों ने भी छोड़ दिया ...

किसी भी राजनीतिक दल में जब भी कोई चुनाव आता है तो यह होता है.

मापदंड क्या होगा? क्या 'जिताऊ होना' मानदंड होगा?

'जिताऊ' को मापने के कारक हैं और इसके अंतर्गत बहुत कुछ आता है; वे कितने समय तक पार्टी में रहे, उन्होंने पार्टी में क्या योगदान दिया है, क्या उन्होंने कभी किसी सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन के साथ काम किया है, उन्होंने कैसा प्रदर्शन किया है. उम्मीदवारी तय करते समय बहुत सी चीजें हैं जिन पर ध्यान दिया जाता है.

और यूपी में जो गठबंधन आप बना रहे हैं, क्या वह काम करेगा? क्या आपको लगता है कि अपना दल या ओमप्रकाश राजभर आपको बांधे हुए हैं?

हां, हमने अपने सपनों को हासिल करने के लिए बहुत मेहनत की है.

अगर आप सपा-बसपा और रालोद के वोटों को एक साथ मिलाते हैं, तो बीजेपी को लगभग 56 सीटों का फायदा होगा. अगर आप सपा-बसपा के वोट शेयर को एक साथ रखते, तो पिछले तीन चुनावों में 48-50 सीटें गठबन्धन में जातीं.इसके बाद भी, क्या आपको विश्वास है कि कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा?

फिर भी, हम 2% आगे हैं।

प्रियंका गांधी ने औपचारिक रूप से राजनीति में प्रवेश किया है और आक्रामक प्रचार कर रही हैं. हमने सुना है कि वह परिवार की दो सीटों से आगे जा रही है. आप इसे कैसे देखते हैं?

हमें क्या देखना है? सब लोग काम कर रहे हैं, वे भी काम कर रहे हैं.

तो आपके अनुसार, प्रियंका गांधी के राजनीति में आने से बहुत फर्क नहीं पड़ेगा? क्या यूपी में प्रियंका फैक्टर नहीं है?

अगर वह राजनीति में काम करना चाहती हैं, तो उन्हें काम करने देना चाहिए. यह कोई मुद्दा नहीं है. कई लोग हर साल राजनीति में आते रहते हैं.

मैं यूपी के बारे में एक सवाल पूछना चाहता हूं क्योंकि आप एक शिक्षक रहे हैं. आप यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार का मूल्यांकन कैसे करेंगे? आप उन्हें कितने नंबर देंगे?

मैंने एक शिक्षक की जिम्मेदारियों को छोड़ दिया है, इसलिए मैं नंबर नहीं दे सकता. योगी सरकार बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही है. हर कोई योगी जी के मार्गदर्शन में अच्छा काम कर रहा है.

योगी यूपी में अकेले नेता हैं. एक समय था जब मुझे याद है कि जब अखिलेश यादव सीएम थे, तब कहा गया था कि यूपी में साढ़े चार मुख्यमंत्री हैं - मुलायम, उनके दो भाई, आजम खान और आधे अखिलेश थे. आज भी यूपी में चार सीएम हैं. दो डिप्टी सीएम हैं जो बहुत शक्तिशाली हैं और सुनील बंसल...

नहीं नहीं.. केवल योगी है. अंतिम निर्णय सीएम द्वारा लिया जाता है. सब लोग उनके साथ हैं, सब लोग साथ हैं. बीजेपी में कोई किसी से पीछे नहीं है, हम सब साथ हैं. बीजेपी में हम सब साथ हैं, हम साथ खड़े हैं.

राफेल के एक और मुद्दे पर विपक्षी दल सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं. रिपोर्ट्स आ रही हैं कि पीएमओ ने रक्षा मंत्रालय को दरकिनार करते हुए सीधे बातचीत कर रहा था. क्या आपको लगता है कि यह सही है? क्या ऐसा हुआ था?

रक्षा मंत्रालय को दरकिनार कर यह पीएमओ कहां से आया? यह सिर्फ एक आरोप है, जो बेबुनियाद है. दूसरी बात, जहां तक ​कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार का सवाल है, पिछले 30 सालों से दूसरी पीढ़ी के फाइटर प्लेन जिन्हें भारत के लिए खरीदा जाना था ... यह काम यूपीए ने नहीं किया था.

यूपीए सरकार की निंदा की जानी चाहिए क्योंकि 30 साल तक भारत जैसे देश द्वारा दूसरी पीढ़ी का विमान नहीं खरीदा गया था. इससे बुरा और क्या हो सकता है? हमारी सरकार ने त्वरित निर्णय लिया और इसका स्वागत किया जाना चाहिए. इसके बजाय, वे हमारी सरकार पर निराधार आरोप लगा रहे हैं. यह किस तरह का न्याय है?

उन्होंने एक अफवाह फैलाई कि फाइल चोरी हो गई है, फाइल चोरी नहीं हुई है. सभी फाइलें रक्षा मंत्रालय के पास हैं, मामला अदालत में है. अदालत इसकी जांच कर सकती है. असली अपराधी वही हैं जिन्होंने फाइल चुराने की कोशिश की और उसे फोटोकॉपी करवा लिया.

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तो आप कह रहे हैं कि फोटोकॉपी वाली फाइलें लीक हो गईं?

कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन्हें कैसे लीक किया गया था, अपराधी को सजा मिलनी चाहिए. रक्षा मंत्रालय इस मुद्दे की जांच कर रहा है, जो जिम्मेदार होंगे उन्हें दंडित किया जाएगा.

पिछले साल तक राम मंदिर का मुद्दा एक गर्म विषय था. लोग कहते थे कि अगले चुनावों तक, यह बीजेपी के लिए मुख्य बात होनी चाहिए और यह कि वे पूरे राम मंदिर मुद्दे पर चुनाव लड़ेंगे. पिछले 2-3 महीनों से, कुछ भी अधिक चर्चा नहीं की गई है. मोदी जी, अमित शाह और आप जैसे वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि कानून अपना काम करेगा. क्या बीजेपी को लगता है कि युवा भारतीय राम मंदिर के मुद्दे से नहीं जुड़े हैं क्योंकि वे विकास के मुद्दे या रोजगार सृजन के साथ हैं? राम मंदिर की तुलना में किसी के जीवन को प्रभावित करने वाले मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण हैं ...

भगवान राम हर किसी की भावनाओं से जुड़े हैं, मुझे नहीं लगता कि भगवान राम से कोई अलग हुआ है. जहां तक ​राम मंदिर के मुद्दे का सवाल है, सुप्रीम कोर्ट में एक प्रक्रिया चल रही है और उन्होंने मध्यस्थता टीम बनाई है. उन्हें दो महीने का समय मिला है, देखते हैं कि परिणाम क्या होता है. मैं यह कहना चाहूंगा कि मंदिर के निर्माण से हर कोई खुश होगा. जो लोग दावा करते हैं कि मुसलमान दुखी होंगे वे गलत हैं. भारतीय मुसलमानों का कहना है कि अगर मंदिर का निर्माण किया जाए तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं है.

कांग्रेस ने गरीबों के लिए न्यूनतम आय की गारंटी दी है. क्या आपको लगता है कि यह संभव है?

उन्होंने घोषणा की है, लेकिन हम पहले ही असंगठित क्षेत्र के लिए कर चुके हैं. हमने 60 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए 3,000 रुपये पेंशन की व्यवस्था की है.स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार किसानों के लिए आय की मदद मिल रही है.

यूपीए सरकार ने 2008 में केवल एक बार किसानों का कर्ज माफ किया था. हमने इसे कई बार किया है और 75,000 करोड़ रुपये की आय सहायता प्रदान की है. जरूरत पड़ने पर भविष्य में इसे बढ़ाएंगे. हम साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं. उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, हम जो कुछ भी आय सहायता की आवश्यकता है उसे देंगे और हम उसके लिए इनपुट लागत की रिपोर्ट करेंगे.

आप कृषि मंत्री भी रहे हैं. क्या आपको लगता है कि हर राज्य द्वारा घोषित किसान ऋण माफी सफल होगी?

यह सही समाधान नहीं है. किसानों की आय को दोगुना और तिगुना करने की कोशिश होनी चाहिए. हम ऐसी स्थिति बनाना चाहते हैं कि एक किसान का बेटा भी किसान बनना चाहे.

BJD ने महिलाओं को 33% सीटें देने की घोषणा की है. क्या बीजेपी भी इसी तरह का कदम उठाएगी और महिलाओं के लिए 33% टिकट आरक्षित करेगी?

विधानसभा और विधान परिषद में महिलाओं के लिए आरक्षण होना चाहिए. हमारी पार्टी ने हमेशा इस विचार का समर्थन किया है. यह सिर्फ चुनावों के कारण है कि अन्य दलों ने आरक्षण में वृद्धि की है, लेकिन वास्तविकता यह है कि बीजेपी एकमात्र ऐसी पार्टी थी, जब मैं पार्टी की नेता था, जिसमें महिलाओं के लिए 33% आरक्षण था. सबसे पहले, उन्हें अपनी पार्टियों के भीतर महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करना चाहिए, फिर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर इसके बारे में बात करनी चाहिए. यह अटल बिहारी वाजपेयी थे जिन्होंने पहली बार संसद में महिलाओं को आरक्षण दिलाने की मांग की थी. विपक्षी दल इसके लिए तैयार नहीं हैं.

आपने अटल बिहारी वाजपेयी का उल्लेख किया. इसलिए मैं आपसे एक सवाल करना चाहता हूं - यह बीजेपी अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली पार्टी से कैसे अलग है?

कुछ भी अलग नहीं है, यह एक ही पार्टी है जैसा कि पहले थी. हम लगातार सुधार कर रहे हैं. संसद में बहुमत पाने वाली एकमात्र गैर-कांग्रेस पार्टी बीजेपी है.

क्या आप कुछ साझा करना चाहते हैं जो अटल जी ने कहा था और जिसे आप लोगों को जानना चाहते हैं? जो कुछ भी आपके दिल को छू गया?

अटल जी ने जो भी कहा वह हमेशा मेरे दिल को छू गया. शब्दों की ओर जाने का कोई मतलब नहीं है. भारतीय राजनीति में अटल जी मेरे आदर्श हैं.

क्या आपको लगता है कि अमित शाह चुनाव में भाग लेंगे और अगर ऐसा होता है, तो अगला बीजेपी अध्यक्ष कौन होगा?

कुछ भी कहा नहीं जा सकता. हम पहले चुनाव जीतें और सरकार बनाएं.

आप उस समय की बात करते हैं जब आप पार्टी अध्यक्ष थे. तो अगले अध्यक्ष के बारे में आपसे पूछना सही है ...

नहीं, मैं सिर्फ उस काम के बारे में बात करता हूं जो उस समय में किया गया था, और कुछ नहीं. जैसे 33% महिला आरक्षण है.

क्या आप सभी यूपी में चुनाव के लिए तैयार हैं?

हम जानते हैं कि वहां के लोग हमसे प्यार करते हैं, हम तैयार हैं।

लोगों के बीच आपकी छवि अच्छी है. आप लोगों के साथ बातचीत करना और उन्हें जानना पसंद करते हैं. आपने उस सर्वसम्मति का भी गठन किया जिसकी आवश्यकता तब थी जब 2014 में मोदी पीएम उम्मीदवार के लिए सबसे आगे थे. आपने पार्टी को अपने अध्यक्ष के रूप में एकजुट रखा. क्या आपको लगता है कि विपक्षी दलों के बीच आज बहुत भ्रम है और वे एकजुट नहीं हो पा रहे हैं? जब आप पार्टी अध्यक्ष थे तब ऐसा नहीं हुआ था. विपक्ष और केंद्र के बीच संबंध बिखर गए हैं और पिछले वर्षों में स्थिति ऐसी नहीं थी.

इस साल सरकार बनाने के बाद हम विपक्ष से संवाद करेंगे और सारी उलझनें दूर करेंगे.

पिछले वर्षों में, विपक्ष- केंद्र के साथ सहयोग और काम करता था, लेकिन पिछले पांच वर्षों में, स्थिति खराब हो गई है. वे संसद सत्र, पार्टी की रैलियों आदि में रुकावटें पैदा कर रहे हैं.

हां, उन्होंने संसद सत्रों में अराजकता पैदा की, लेकिन मुझे नहीं लगता कि विपक्ष हमसे नाराज है. हमने उन्हें नाराज़ करने के लिए कुछ नहीं किया है और हमने उनके लिए कुछ नहीं किया है. हमने हमेशा इस लोकतांत्रिक वातावरण में विपक्ष का सम्मान किया है.

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