जानिए मोदी सरकार के सौ दिनों में कैसा रहा गृह मंत्रालय का कामकाज

अमित पांडेय | News18Hindi
Updated: September 7, 2019, 12:27 PM IST
जानिए मोदी सरकार के सौ दिनों में कैसा रहा गृह मंत्रालय का कामकाज
गृह मंत्री अमित शाह

5 अगस्त को गृहमंत्री मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने एक और अहम घोषणा की वह थी जम्मू कश्मीर राज्य का पुनर्गठन. इस अधिनियम में जम्मू और कश्मीर (Jammu And Kashmir) राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में पुनर्गठित करने का प्रावधान है.

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के दूसरे कार्यकाल में सबसे ताकतवर मंत्री थे अमित शाह (Amit Shah) और अपने 100 दिन के कार्यकाल के दौरान एक के बाद एक ऐसे निर्णय लिए गए जिसने देश का इतिहास बदल दिया. ये निर्णय कश्मीर से लेकर उत्तर पूर्व के थे. गृह मंत्री अमित शाह के कार्यकाल में क्या अहम पड़ाव थे इस रिपोर्ट में हम ये देखेंगे.

धारा 370 का कश्मीर से हटाना
5 अगस्त 2019 को गृह मंत्री अमित शाह अपनी चिर परिचित अंदाज में संसद भवन आए. लेकिन उससे पहले सबको यह आभास हो चुका था कश्मीर को लेकर कुछ न कुछ अहम जरूर होने वाला है. उसकी वजह थी कश्मीर में भारी तादात में सुरक्षा बलों की मौजूदगी, ठीक 1 घंटे पहले यानी 9:00 हुई कैबिनेट और कैबिनेट कमेटी ऑफ सिक्योरिटी की अहम बैठक और कश्मीर में हो रही तमाम तरीके की हलचल ने भी इस हवा को जोर दे दिया था. हाथ में चंद कागजात लिए गृह मंत्री अमित शाह ने संसद भवन में बोलना शुरू किया. करीब 11:05 पर उन्होंने ऐलान किया कि जम्मू कश्मीर से धारा 370 को हटाया जा रहा है.

गृह मंत्री अमित शाह.


यानी कि जो विशेष अधिकार इस कानून के तहत कश्मीर के लोगों के पास था अब इस धारा के हटने के बाद वह अधिकार खत्म हो गए थे. कश्मीर में अब आईपीसी कि कानून के मुताबिक न्याय व्यवस्था चलने का ऐलान किया गया. इस धारा के हटने के बाद सबसे अहम बदलाव ये हुआ कि अब कश्मीर में कोई भी आदमी भारत का आकर जमीन खरीद सकता है अगर बेचने वाला शख्स राजी है. इस धारा के हटने के बाद से मानों भारत के लिए कश्मीर के रास्ते खुल गए. लेकिन स्थानीय लोग यानी कश्मीर में जो लोग रहते हैं वह इस धारा के हटने के बाद किस तरीके से अपनी प्रतिक्रिया देंगे इसका अभी सबको इंतजार है.

जम्मू कश्मीर राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2019
5 अगस्त को गृहमंत्री मंत्री अमित शाह ने एक और अहम घोषणा की वह थी जम्मू कश्मीर राज्य का पुनर्गठन. इस अधिनियम में जम्मू और कश्मीर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में पुनर्गठित करने का प्रावधान है, (1) जम्मू और कश्मीर (2) लद्दाख, इस अधिनियम के प्रावधान 31 अक्टूबर 2019 से लागू होंगे, जो भारत के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती है. हालांकि कि गृहमंत्री ने ये भी साफ किया कि जम्मू -कश्मीर को वापस प्रदेश बनाया जाता है अगर तय समय की समीक्षा के बाद माहौल अनुकूल पाया गया. इस अधिनियम के पारित होने के बाद जम्मू कश्मीर और लद्दाख के केन्द्र सरकार द्वारा प्रशासित होने का प्रावधान है. यानी देश में जितनी भी केंद्र शासित प्रदेश हैं अब उनकी तरह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भी होगा. 5 अगस्त को ही हुई इस घोषणा के बाद भारत में जम्मू कश्मीर का नक्शा बदल गया और 2 नए केंद्र शासित प्रदेश अपने अस्तित्व में आ गए.
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जम्मू कश्मीर आरक्षण संशोधन 2019 विधायक
यह विधेयक भी मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में संसद सत्र के पहले महीने में ही पारित हो गया. इस विधेयक के पारित होने के बाद जम्मू में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रह रहे लोगों को 3 फ़ीसदी आरक्षण का लाभ उसी तरह मिलना शुरू हो जाएगा. ठीक उसी तरह जैसे नियंत्रण रेखा यानी लाइन ऑफ कंट्रोल जो कि भारत पाकिस्तान सीमा पर है और जम्मू कश्मीर के इलाकों में पड़ता है वहां पर रह रहे लोगों को मिलता है. सरकार का मकसद बिल को पारित कराने के पीछे ये था कि जम्मू और कश्मीर के लोगों को समान अधिकार और सहूलियतें मिले.

कश्मीर में तैनात भारतीय सेना के जवान.


जम्मू कश्मीर से जुड़े इन तीनों महत्वपूर्ण कदम उठाते वक्त गृह मंत्री ने यह साफ कर दिया कि भारत सरकार कश्मीर के लोगों के साथ है और हर कदम पर उस इलाके के विकास के लिए वह काम करेगी. इसीलिए सरपंचों और पंचों का जम्मू कश्मीर में सशक्तिकरण किया गया यानी उन्हें और ज्यादा वित्तीय अधिकार दिए गए जिसके बाद उन्हें अपने गांव में अपने इलाकों में अपनी जरूरत के हिसाब से पैसे खर्च करने की छूट है. इसके अलावा केंद्र सरकार के 80000 करोड रुपए जो परियोजनाएं जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जो चल रही हैं उसके भी काम में तेजी लाई गई है.

यूएपीए कानून में बदलाव और एनआईए को मजबूत बनाना
इन दोनों कानूनों को मजबूत बनाने के लिए संसद में दो महत्वपूर्ण पहले पारित करवाए गए जिसके पीछे सरकार का मकसद यही था की जांच एजेंसियां जो संवेदनशील अपराधों की तफ्तीश कर रही है उनको और ज्यादा शक्ति मिले. यही नहीं कानून को इतना मजबूत बना दिया जाए कि अगर पुख्ता सबूत है जांच एजेंसियों के पास अपराधी को तुरंत सजा मिले. यह तो थी संसद के भीतर सरकार द्वारा कुछ ऐतिहासिक कदम उठाए जाने की बात. अब जरा नजर डालते हैं संसद के बाहर कुछ ऐसे कदम जिसके जरिए सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह बदलाव करना चाहती है और इसके लिए देश को तैयार रहना चाहिए.

एनआरसी की सूची जारी करना
हालांकि यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक चल रही थी जिसके तहत असम में 31 अगस्त को एनआरसी यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन की सूची आई. इसमें 19 लाख से ज्यादा लोगों को भारत का नागरिक नहीं माना गया जबकि तीन करोड़ से ज्यादा लोगों का नाम इस सूची में था जिसके बाद वह लोग स्वाभाविक रूप से भारत के नागरिक थे. असम में ये बेहद संवेदनशील मुद्दा था और सरकार ने यह साफ कर दिया की इस सूची के जारी होने के बाद भी जिनका नाम इसमें नहीं आया है उनके लिए 300 से भी ज्यादा ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं जिसमें वह अपनी अपील दाखिल कर सकते हैं.

नक्सलियों के खिलाफ अभियान में तेजी का दावा
गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सल प्रभावित प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ 26 अगस्त को बैठक की जिसमें गृह मंत्री शाह के साथ नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे. बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह पहली बार नक्सल समस्या को लेकर बैठक की. इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों को बुलाया गया था. इस बैठक के दो मुख्य मकसद थे पहला तो नक्सल समस्या का जड़ से खात्मा करना और दूसरा उन इलाकों का विकास करना जो नक्सल समस्या की वजह से मुख्यधारा से बहुत दूर चले गए और विकास से कोसों पीछे हैं. बैठक के बाद सरकार की ओर से दावा किया गया वह नक्सल समस्या के खात्मे के लिए प्रतिबद्ध है.

पुलिसिंग को मजबूत बनाने पर जोर
अपने 100 दिनों के कार्यकाल में गृह मंत्री अमित शाह ने जिन पुलिस अकादमियों का दौरा किया उसमें हैदराबाद की नेशनल पुलिस अकादमी और दिल्ली की ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रमुख थे. इसके अलावा गृह मंत्री दिल्ली के पुलिस मेमोरियल भी गए जिसको शहीद हुए पुलिसकर्मियों की याद में बनाया गया है. पुलिस सिस्टम से जुड़ी इन जगहों का दौरा कर गृह मंत्री ने यह साफ कर दिया पुलिस व्यवस्था को दुरुस्त करना उसके महत्वपूर्ण लक्ष्य में से एक है.

प्रधानमंत्री मोदी के साथ गृह मंत्री अमित शाह.


इसके लिए पुलिस को मजबूत बनाने के लिए विशेष संस्थान खोले जाएंगे जहां पर वह खासतौर के तकनीकी शिक्षा ले सकें साथ ही तैनात पुलिस वालों को उनके काम के लिए पूरा सम्मान मिले इसके लिए सिर्फ पुलिसकर्मियों के लिए स्मारक बनाया गया जिसमें आजादी के बाद से अब तक 35 हजार से ज्यादा शहीद हुए पुलिसकर्मियों का नाम है. गृह मंत्रालय की ओर से अमित शाह ने यह साफ कर दिया कि अपराधियों से 10 कदम आगे पुलिस को रहना चाहिए तभी अपराध पर काबू पाया जा सकेगा.

नॉर्थ ईस्ट पॉलिसी
उत्तर पूर्व के राज्य भारत सरकार के लिए कितने महत्वपूर्ण है उसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 5 साल से एक अलग मंत्रालय वहां के इलाकों के लिए बनाया गया है जो कि काम कर रहा है. गृहमंत्री नॉर्थ ईस्ट जोनल काउंसिल की बैठक में हिस्सा लेने जल्द ही जाएंगे. इसके अलावा दिल्ली में उत्तर पूर्व की कुछ विशेष जनजातियों के लिए खास तौर पर भवन का निर्माण करवाना सरकार के इस कदम को जाहिर करता है कि वह लगातार उत्तर पूर्व के लोगों के लिए काम कर रही है और उनकी संस्कृति बचाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है.

कुल मिलाकर पहले 100 दिनों में गृह मंत्रालय ने देश की अलग-अलग समस्याएं के पहलुओं को छूने की कोशिश की है. दावा यह किया गया है कि बदलाव बड़े हैं और जनता के हितों में हो रहे हैं. लेकिन बदलाव का असर जनता के ऊपर कितने दिनों में होगा और क्या होगा इस पर सरकार के आने वाले कार्यकाल के दिनों में सबकी नजर रहेगी.

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First published: September 7, 2019, 12:27 PM IST
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