'हेट स्पीच' की परिभाषा तय करने की तैयारी में गृह मंत्रालय, पैनल ने रखा IPC में नई धारा का पस्ताव

IPC में अभी तक 'भड़काऊ बयान' की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है.  (फाइल फोटो)

IPC में अभी तक 'भड़काऊ बयान' की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है. (फाइल फोटो)

Hate Speech in IPC: गृह मंत्रालय (Home Ministry) की तरफ से गठित की गई कमेटी पहली बार हेट स्पीच को परिभाषित करने की कोशिश कर रही है. कहा जा रहा है कमेटी इस मामले में जल्द ही अपनी रिपोर्ट दाखिल कर सकती है.

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नई दिल्ली. अभिव्यक्ति की आजादी (Freedom of Expression) को लेकर देश में लंबे समय से चर्चा चल रही है. अब खबर है कि भारतीय दंड संहिता (IPC) में 'भड़काऊ बयान' (Law on Hate Speech) को भी जल्द शामिल किया जा सकता है. IPC में सुधार के लिए काम करने वाली एक पैनल 'अभिव्यक्ति और भाषणों से जुड़े अपराधों' पर अलग से धारा का प्रस्ताव रखने जा रही है. इस दौरान पैनल भड़काऊ बयान की एक कानूनी परिभाषा तैयार करने की कोशिश करेगी. हाल ही में हाईकोर्ट में इससे जुड़े मामले पर सुनवाई हुई थी.

द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, IPC में अभी तक 'भड़काऊ बयान' की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है. ऐसे में अपराध संबंधी कानून में सुधार को लेकर गृह मंत्रालय की तरफ से गठित की गई कमेटी पहली बार इसे परिभाषित करने की कोशिश कर रही है. कहा जा रहा है कमेटी इस मामले में जल्द ही अपनी रिपोर्ट दाखिल कर सकती है.

यह भी पढ़ें: राजद्रोह कानून की वैधता पर फिर उठे सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

इस महीने की शुरुआत में बॉम्बे हाईकोर्ट ने नवी मुंबई के एक निवासी के खिलाफ दर्ज हुई FIR को खारिज कर दिया था. उस दौरान कहा गया था कि एक अत्याधिक और कठोर दृष्टिकोण को भड़काऊ भाषण नहीं कहा जा सकता है. जस्टिस एसएस शिंदे और एमएस कार्णिक की डिवीजन बेंच ने कहा था कि हमारे लोकतंत्र में अपने विचारों को सामने रखना सुरक्षित और पोषित है. अदालत ने कहा था कि याचिकाकर्ता का केवल कठोर दृष्टिकोण होने के चलते उसे भड़काऊ बयान नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वह दूसरा दृष्टिकोण पेश कर रहा था.


राजद्रोह की धारा को भी अदालत में मिली है चुनौती

बीती 30 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने राज-द्रोह से जुड़ी एक याचिका पर सुनावाई की अनुमति दी थी. इस याचिका में IPC की धारा 124A की वैधता पर सवाल उठाए गए थे. इस मामले में याचिकाकर्ता दो पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेमचा और कन्हैया लाल शुक्ला थे. फिलहाल मामले में शामिल पत्रकारों के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों के चलते राजद्रोह का ममला चल रहा है.

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