केजरीवाल सरकार के 9 सलाहकार बर्खास्त, एक ने कहा- बस एक रुपया लेते थे सैलरी

ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द किए के फैसले के बाद अब इस मामले से केंद्र और केजरीवाल सरकार के बीच विवाद फिर से बढ़ने के आसार हैं.

News18Hindi
Updated: April 18, 2018, 12:23 AM IST
केजरीवाल सरकार के 9 सलाहकार बर्खास्त, एक ने कहा- बस एक रुपया लेते थे सैलरी
पीएम मोदी और अरविंद केजरीवाल की फाइल फोटो
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Updated: April 18, 2018, 12:23 AM IST
दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार के नौ टॉप सलाहकारों को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बर्खास्त कर दिया है. आतिशी मार्लेना और राघव चड्ढा सहित सभी नौ सलाहकारों को बर्खास्त करने के फैसले के पीछे गृह मंत्रालय ने तर्क दिया कि इन नियुक्तियों के लिए वित्त मंत्रालय से सलाह नहीं ली गई थी. इन नेताओं की बर्खास्ती का आदेश एलजी अनिल बैजल ने पारित किया था.

ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द किए के फैसले के बाद अब इस मामले से केंद्र और केजरीवाल सरकार के बीच विवाद फिर से बढ़ने के आसार हैं. इसी की बानगी मंगलवार को ही देखने को ही मिली, जब आप सरकार ने कहा कि केंद्र उसे बेजा परेशान कर रहा है.

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की सलाहकार आतिशी मार्लेना के अलावा वित्त मंत्री के सलाहकार राघव चड्ढा, कानून मंत्री के मीडिया सलाहकार अमरदीप तिवारी और पीडब्ल्यूडी मंत्री के सलाह रजत तिवारी भी शामिल हैं.


गृह मंत्रालय की तरफ से जारी आदेश में कहा गया, 'इन लोगों को जिन पदों को नियुक्त किया गया, वह दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री और विभिन्न मंत्रियों के लिए मंजूर किए पदों की सूचि में नहीं आता. इन नए पदों के लिए जरूरी केंद्र सरकार से पहले कोई मंजूरी भी नहीं ली गई थी.'




वहीं राघव चड्ढा ने अपनी नियुक्ति का बचाव करते हुए अपने नियुक्ति पत्र की तस्वीर शेयर की है और कहा कि वह सैलरी के रूप में बस एक रुपये ले रहे थे. उन्होंने ट्वीट किया, 'गृह मंत्रालय में मुझे किस जगह से बर्खास्त कर रही है? अगर कोई देखना चाहता है तो यहां नियुक्ति के नियम हैं. धन्यवाद...'


इसके साथ ही उन्होंने कहा, 'बीजेपी के शह पर गृह मंत्रालय की तरफ से ध्यान भटकाने वाला बेहतरीन कदम. रेप की वारदातों और नकदी संकट जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए उन्हें यह मुफीद वक्त लगा और उन्होंने मुझे उस पद से हटाने का फैसला कर लिया, जिस पर 45 दिनों के लिए रहते हुए मैंने महज 2.50 रुपये की सैलरी ली.'

वहीं इस मुद्दे पर केंद्र को आड़े हाथ लेते हुए सिसोदिया ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार का आदेश दिल्ली में 'शिक्षा क्रांति' को 'पटरी से उतारने की साजिश' है. सिसोदिया ने कहा कि चूंकि बीजेपी की कोई भी सरकार शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्रों में कुछ नहीं कर पा रही है, इसलिए केंद्र सरकार 'आप' सरकार को पंगु बनाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार में 'अहम भूमिका' निभा रही उनकी सलाहकार आतिशी मार्लेना को 'निशाना बनाया गया है.'

इस कदम के बाद सिसोदिया ने ट्वीट करके कहा, 'दिल्ली सरकार के सलाहकारों को हटाने का मोदी सरकार का आदेश दिल्ली में शिक्षा क्रांति को पटरी से उतारने की साजिश है.' उन्होंने कहा, 'आदेश की असल मंशा हमारे सरकारी काम को पंगु बनाना है, क्योंकि बीजेपी की कोई सरकार शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में कोई काम नहीं कर पाई है.'



सिसोदिया ने ट्वीट किया, 'कोई आश्चर्य नहीं कि मोदी सरकार ने आतिशी मार्लेना- जिसने सेंट स्टीफेंस से पढ़ाई के बाद ऑक्सफोर्ड में भी पढ़ाई की, फिर रोड्स स्कॉलर के तौर पर काम किया और तब शिक्षा सलाहकार के तौर पर दिल्ली सरकार में शामिल हुईं- जैसे सलाहकारों को हटाया है. वह पिछले तीन साल से मेरे साथ एक रुपए प्रति माह के वेतन पर काम कर रही थीं.'
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