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सभी राज्यों को अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं को वापस भेजने के दिए निर्देश- राज्यसभा में गृह मंत्रालय

फोटो सौ. (Reuters)
फोटो सौ. (Reuters)

बजट सत्र (Budget session 2021) के दौरान सांसद किरोड़ी लाल मीणा के सवाल पर राज्यसभा में गृह मंत्रालय ने कहा कि नियमों के तहत साल 2014 और साल 2019 में सभी राज्यों को रोहिंग्याओं को वापस भेजने के लिए विस्तृत निर्देश दिए गए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 3, 2021, 6:28 PM IST
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नई दिल्ली. भारत के पड़ोसी देश म्यांमार से आए रोहिंग्याओं से जुड़े एक सवाल पर गृह मंत्रालय ने कहा कि जिस किसी शख्स के पास मुनासिब कागजात नहीं है उन्हें वापस भेजने के नियम हैं. बजट सत्र के दौरान सांसद किरोड़ी लाल मीणा के सवाल पर राज्यसभा में गृह मंत्रालय ने कहा कि इन्हीं नियमों के तहत साल 2014 और साल 2019 में सभी राज्यों को रोहिंग्याओं को वापस भेजने के लिए विस्तृत निर्देश दिए गए हैं.

बताया गया कि अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं को वापस भेजने का आदेश निर्वासन प्रत्यर्पण नियम के तहत दिया गया है. अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं से जुड़े एक और सवाल में गृह मंत्रालय का राज्यसभा में कहना है कि रोहिंग्या, जम्मू कश्मीर, तेलंगाना, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, कर्नाटक और केरल में रह रहे हैं.मंत्रालय ने कहा कि इनके पास कोई भी वैध कागजात नहीं है इसलिए स्पष्ट रूप से अवैध तरीके से रह रहे रोहिंग्याओं की संख्या निर्धारित नहीं की जा सकती है.





कौन हैं रोहिंग्या?
म्यांमार में साल 2017 में उग्रवाद के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान सामूहिक बलात्कार, हत्या और गांवों को जलाने की घटनाएं हुई थीं, जिसके बाद 7,00,000 से अधिक रोहिंग्या मुसलमानों को पड़ोसी बांग्लादेश जाना पड़ा था, जहां वे भीड़ वाले शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं.

बांग्लादेश ने संयुक्त समझौते के तहत उन्हें म्यांमा भेजने की कई कोशिशें कीं, लेकिन रोहिंग्या हिंसा का शिकार होने के डर से अपने देश लौटने के लिए तैयार नहीं है. बड़ी संख्या में रोहिंग्या भारत में भी आए और वह देश के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे हैं.

हालांकि म्यांमार ऐसा कोई आरोप मानने को राजी नहीं है. वहीं दूसरी ओर  म्यांमार की सेना छोड़कर भागे दो सैनिकों ने अल्पसंख्यक रोहिंग्या के खिलाफ रखाइन प्रांत में हुए नरसंहार की बात कबूल की थी. बीते साल दो सैनिकों ने एक वीडियो में कबूल किया था कि अगस्त 2017 में उन्हें आदेश मिले थे कि जिन भी गांवों में अल्पसंख्यक रोहिंग्या रहते हैं, वहां 'जितने भी दिखें या जिनके बारे में पता चले उन सभी को गोलियां चला कर मार डालो.' इसके अलावा रोहिंग्या औरतों के रेप और जलाकर मारने जैसे वीभत्स जुर्म भी कबूल किये थे.
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