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होम कॉरन्टाइन: कहीं पुलिस के दौरे के बाद भी परेशान कर रहे पड़ोसी, कहीं प्रशासन ने नहीं ली कोई सुध

News18Hindi
Updated: March 25, 2020, 8:28 PM IST
होम कॉरन्टाइन: कहीं पुलिस के दौरे के बाद भी परेशान कर रहे पड़ोसी, कहीं प्रशासन ने नहीं ली कोई सुध
मंदर यादव की सोसाइटी में लगा है ये पोस्टर

पिछले 15 दिनों में करीब 15.24 लाख लोगों की एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग की गई और उसमें से बड़ी तादाद में लोगों को कॉरन्टाइन में रखा गया. भारत की फाइनेंशियल कैपिटल मुंबई (Mumbai) कोरोना वायरस (Coronavirus) से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है. पूरे महाराष्ट्र (Maharashtra) में करीब 11,000 लोगों को कॉरन्टाइन में रखा गया है.

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  • Last Updated: March 25, 2020, 8:28 PM IST
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(निखिल घानेकर)

नई दिल्ली. भारत (India) में कोरोना वायरस (Coronavirus) को फैलने से रोकने के दो महत्वपूर्ण स्तंभ इसकी रोकथाम और कॉरन्टाइन हैं. जहां इसकी रोक के लिए एयरपोर्ट्स पर अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों की स्क्रीनिंग की जरूरत है वहीं इसे खत्म करने की रणनीति कॉरन्टाइन है जिसे सामाजिक दूरी और घर आइसोलेशन के साथ-साथ अधिक प्रभावी माना जाता है. कॉरन्टाइन का प्रभाव स्थानीय स्वास्थ्य विभागों की निगरानी पर टिका हुआ है.

पिछले 15 दिनों में करीब 15.24 लाख लोगों की एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग की गई और उसमें से बड़ी तादाद में लोगों को कॉरन्टाइन में रखा गया. भारत की फाइनेंशियल कैपिटल मुंबई इस वैश्विक महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है. पूरे महाराष्ट्र में करीब 11,000 लोगों को कॉरन्टाइन में रखा गया है. न्यूज़18 ने उनमें से दो लोगों से बात की जो कि पिछले हफ्ते विदेशों से लौटे थे.

पिछले ही हफ्ते लौटे हैं दोनों 



32 साल के मंदर यादव इंजीनियरिंग डिजाइनर हैं और अंगोला के मलेंबो से दुबई के रास्ते मुंबई पहुंचे हैं. जबकि 56 साल के नितिन घानेकर समुद्री नाविक हैं और दुबई से मुंबई पहुंचे हैं. नितिन ने इसके पहले कतर के इंडस्ट्रियल पोर्ट कस्बे रास लफन की यात्रा की थी. ये दोनों ही पिछले हफ्ते वापस लौटे हैं, इसके बाद ही भारत ने सभी अंतरर्राष्ट्रीय फ्लाइट्स को बैन कर दिया था. ये दोनों ही अप्रैल के पहले हफ्ते तक घर में ही कॉरन्टाइन में रहेंगे.

सामने आया दोहरा रवैया
दोनों के साथ पिछले एक सप्ताह में कई चीजें समान रूप से हुई हैं, इसमें एक समय पर घर वापस लौटने को लेकर बनी अनिश्चितता का एक चरण भी शामिल है, उनके अनुभव इस बात को दर्शाते हैं कि निगरानी पूरी तरह से हो रही है या लचर है.

उनके अनुभव जब तक वे हवाई अड्डे पर उतरे तब से लेकर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा निगरानी और फॉलो अप लिए जाने तक विपरीत हैं. यादव के हाथ पर हवाई अड्डे की मुहर लगी थी, जो उनकी कॉरन्टाइन की अवधि की जानकारी देती है. एक बार जिस घर में वह रहते हैं वहां की हाउसिंग सोसाइटी में स्थानीय पुलिस ने दौरा किया, और लोगों से पूछताछ की कि वह विदेश से कब लौटे हैं. स्थानीय पुलिस ने नगर निकाय की एक नर्स के साथ उसके घर का दौरा भी किया.

कई बार लिया गया फॉलोअप
यादव ने कहा “पुलिस ने मेरी हाउसिंग सोसायटी का दौरा करने के बाद, मेरी मां ने स्वेच्छा से पुलिस को मेरी कार्य यात्रा का विवरण दिया. 22 मार्च को, वे एक नर्स के साथ मेरे घर आए. उन्होंने पूछा कि क्या मैं कॉरन्टाइन का पालन कर रहा हूं और यह भी जांचा गया कि क्या मेरे घर में खुद को अलग रखने के लिए पर्याप्त जगह है. यादव ने कहा कि उन्हें उसी नर्स ने 24 मार्च को एक फॉलो-अप का फोन भी किया.

इसके अलावा, पुलिस ने उनकी सोसाइटी में एक नोटिस चिपका दिया, जिससे अन्य निवासियों को उनके घर का दौरा न करने के लिए कहा गया. नोटिस में उनके कॉरन्टाइन की अवधि, उनका नाम लिखा गया है. साथ ही यह भी लिखा गया है कि, "यदि वह घर से बाहर मिले, तो कृपया कॉल करें."

कोई नहीं आया पूछने
वहीं दादर वेस्ट में रहने वाले घानेकर के घर पर न तो किसी स्वास्थ्य कर्मी ने दौरा किया है और न ही उन्हें कोई फोन कॉल आया है. जबकि उनकी उम्र 50 साल से ऊपर है. घानेकरने कहा कि मैं प्रशासन से किसी तरह के फॉलो अप की उम्मीद कर रहा था. मैं एक अलग कमरे में रह रहा हूं. मेरी एक अलग कुर्सी है जिसपर मैं अपनी पत्नी से अलग बैठकर खाना खाता हूं.

घानेकर इससे पहले फरवरी की शुरुआत में भी घानेकर काम के सिलसिले में मुंबई आए थे और स्क्रीनिंग की प्रक्रिया से गुजरे थे. यहां तक कि फरवरी में भी उन्हें कोई फोन नहीं आया और न ही म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन से कोई उनके घर आया.

उधर रविवार को यादव के कुछ पड़ोसियों ने उनकी मां से इस बात को लेकर झगड़ा किया कि वह राशन आदि सामान लेने क्यों जा रही हैं. ये बताने के बावजूद भी कि पुलिस को उनके कॉरन्टाइन की जानकारी है वह नहीं माने और म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन को फोन कर दिया.

परिवार वालों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे पड़ोसी
यादव ने कहा मैं समझता हूं कि लोग इसे लेकर काफी सतर्क हैं और स्थिति गंभीर है. लेकिन लोग उन लोगों को इस तरह परेशान नहीं कर सकते जो सरकार के नियमों का पालन कर रहे हैं. शुक्र है कि म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के लोग सहयोगी हैं इसलिए उन्होंने मुझसे परेशान न होने के लिए कहा.

यादव ने कहा हम सभी इस आपदा को झेल रहे हैं. सरकार के निर्देशों का पालन करने से सभी का भला होगा न कि सिर्फ हमारा और हमारे परिवारों का. लेकिन कुछ लोग हैं जो निर्दयता दिखाते हैं और समाज के लोगों को उन्हें इसके प्रति जागरुक करना चाहिए.

(ये दोनों ही लोग लेखक के परिचित हैं)

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First published: March 25, 2020, 8:28 PM IST
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