संसदीय समिति के सामने गृह सचिव बोले- इसलिए घट रहे हैं बलात्कार और हत्या के मामले

गृह मंत्रालय के अधिकारी संसदीय कमेटी के सामने पेश हुए और महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों के बारे में आंकड़ा रखा.
गृह मंत्रालय के अधिकारी संसदीय कमेटी के सामने पेश हुए और महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों के बारे में आंकड़ा रखा.

देशभर में साइबर फोरेंसिक लेबोरेट्री बढ़ाई जा रही हैं. अब तक 14 राज्यों में ऐसी लेबोरेट्री तैयार हो चुकी हैं. साथ ही साइबर अपराधों के लिए पुलिसकर्मियों, सरकारी वकीलों और न्यायिक अधिकारियों को ट्रेनिंग भी दी गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 27, 2020, 3:39 PM IST
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नई दिल्ली. महिलाओं के खिलाफ होने वाले बलात्कार और बलात्कार के बाद मर्डर के मामलों से जुड़े अपराधों में कमी आई है. इतना ही नहीं महिलाओं के खिलाफ होने वाले दूसरे अपराधों में बढ़ोतरी की वजह महिलाओं में आई जागरुकता है. यह कहना है गृह सचिव अजय भल्ला का. अजय भल्ला संसद की गृह मामलों की संसदीय समिति के सामने पेश हुए थे. उन्होंने कहा कि एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि एफआईआर दर्ज कराने में आसानी और कानून का सख्ती से पालन होने के कारण यह बदलाव आया है.

बलात्कार और मर्डर के मामले पर समिति के सामने रखे यह आंकड़े

संसद की गृह मामलों की संसदीय समिति के सामने गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि एनसीआरबी के डाटा के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ अपराध साल 2019 में पिछले साल के मुकाबले 7.3 प्रतिशत बढ़े हैं. इसका बड़ा कारण है कि लोगों खासतौर से महिलाओं में जागरुकता आई है. पुलिस के पास एफआईआर दर्ज करवाने की प्रक्रिया आसान हो गई है.



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कानून का सख्ती से पालन कराया जा रहा है. गृह मंत्रालय के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों में साल 2019 में 2018 के मुकाबले कमी आई है. बलात्कार के मामलों में साल 2018 के मुकाबले 4 फीसदी की कमी आई है. साल 2018 में 33356 बलात्कार के मामले सामने आए थे. जबकि साल 2019 में इनकी संख्या 32260 रही है. दूसरी ओर साल 2018 में बलात्कार और हत्या के 294 मामले सामने आए थे, जबकि साल 2019 में इनकी संख्या 283 रही थी.NCRB

इन कारणों से महिलाओं के खिलाफ अपराध में आई कमी

गृह मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि पूरे देश में खासतौर से महिलाओं के लिए एक भारत एक सुरक्षा एप 112 नंबर जारी किया गया है. आपात स्थिति में तुरंत संपर्क करने की व्यवस्था है. महिलाओं के साथ अपराध करने वालों का राष्ट्रीय डाटाबेस भी तैयार किया गया है. इस डाटाबेस में बलात्कार, बलात्कार और हत्या, छेड़खानी और पॉस्को जैसे अपराध करने वालों का पूरा डाटा रखा जा रहा है. इससे बार-बार अपराध करने वालों पर निगरानी रखने का काम किया जा रहा है. फरवरी 2019 में सेक्सुअल अपराधों के लिए जांच ट्रेकिंग सिस्टम भी जारी किया गया है.
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