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दिल्ली की आबोहवा 'बेहद खराब', बच्चों को बाहर न निकलने की सलाह

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

गुड़गांव में वायु गुणवत्ता एक्यूआई 416 के साथ 'गंभीर' दर्ज की गई जबकि गाजियाबाद, फरीदाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में यह 'बेहद खराब' दर्ज की गई.

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    प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के कारण दिल्ली के अस्पतालों में सांस और दमा के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है. डॉक्टरों ने बच्चों और बुजुर्गों को सलाह दी है कि जितना संभव हो सके घर में ही रहें. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा बुधवार को दिल्ली की कुल वायु गुणवत्ता सूचकांक 366 दर्ज की गई, जो कि बहुत खराब श्रेणी है.

    सर गंगा राम अस्पताल में एक पुलमोनोलॉजिस्ट और बाल रोग विशेषज्ञ अनिल सचदेव ने कहा, "मैं दिन में लगभग 20 रोगियों को देख रहा हूं और 10 में से सात एलर्जी, खांसी या श्वसन की समस्या से ग्रसित हैं. प्रदूषण के कारण कुछ लोगों को आंखों से पानी आने की भी शिकायत हैं. श्वास संबंधी लगभग 50 फीसदी मामले बढ़े हैं."

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    उन्होंने दिल्ली के पैरेंट्स को सलाह दी है कि जब तक हवा की गुणवत्ता में सुधार न हो जाए तब तक जितना संभव हो सके बच्चों को घर में रखें.

    उन्होंने कहा, "मैं वास्तव में इसे नुस्खे के तौर पर लिख रहा हूं- 'कृपया बाहर जाने से बचें', मुझे ऐसा कहते हुए बुरा भी लगता है क्योंकि बच्चों को बाहर जाने और खेलने की ज़रूरत है. लेकिन हवा उनके लिए अच्छी नहीं है." उन्होंने कहा कि माता पिता यह ध्यान रखें कि सुबह और शाम को बच्चे बाहर नहीं निकले. स्कूल जाते समय मास्क जरूर पहने.

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    दिल्ली की वायु गुणवत्ता में बुधवार को मामूली सुधार देखा गया बावजूद इसके प्रदूषण का स्तर 'बेहद खराब' श्रेणी का दर्ज किया गया. वायु गुणवत्ता में यह सुधार ऐसे वक्त में दर्ज किया गया जब पराली जलाने के मामले और बढ़ गए हैं. केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक 366 दर्ज किया.

    केंद्र संचालित वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान एवं शोध प्रणाली (सफर) के एक अधिकारी ने बताया कि वायु गुणवत्ता में सुधार को सुबह तेज हवा के चलने से जोड़ा जा सकता है. सुबह हवा की रफ्तार बढ़ी थी जो राहत बनकर आई. इससे प्रदूषक कण तेजी से बिखरे और वायु गुणवत्ता 'गंभीर' से फिर से 'बेहद खराब' श्रेणी की तरफ आई. उन्होंने कहा कि अगले दो दिनों के लिए एक्यूआई बढ़ सकता है लेकिन वह 'बेहद खराब' की श्रेणी में ही बना रहेगा.

    गुड़गांव में वायु गुणवत्ता एक्यूआई 416 के साथ 'गंभीर' दर्ज की गई जबकि गाजियाबाद, फरीदाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में यह 'बेहद खराब' दर्ज की गई. सीपीसीबी के डेटा के मुताबिक दिल्ली के 10 इलाकों में वायु गुणवत्ता 'गंभीर' जबकि 23 इलाकों में बहुत खराब' दर्ज की गई. बुधवार को हवा में घुले हुए अतिसूक्ष्म प्रदूषक कण पीएम 2.5 को 215 दर्ज किया गया. वहीं पीएम 10 की मौजूदगी 370 दर्ज की गई. पीएम 10 की तुलना में पीएम 2.5 स्वास्थ्य के लिए अधिक खतरनाक होता है.

    शून्य से 50 के एक्यूआई को 'अच्छा' माना जाता है जबकि 51 से 100 को 'संतोषजनक', 101 एवं 200 को 'सामान्य', 201 एवं 300 को 'खराब', 301 एवं 400 को 'बेहद खराब' और 401 एवं 500 को 'गंभीर' माना जाता है.

    वसंत कुंज स्थित फोर्टिस अस्पताल के पुलमोनोलॉजिस्ट और लंग सेंटर हेड विवेक नांगिया ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों से उनके ओपीडी में लगभग 15 से 20 फीसदी की वृद्धि हुई है. उन्होंने कहा कि हम लोगों से सिफारिश कर रहे हैं कि जितना संभव हो सके घर से बाहर निकलने से बचें. लोगों को अपने वाहनों के बजाय मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना चाहिए.

    फोर्टिस के डॉक्टर ने सुबह के जॉगर्स को भी इससे बचने की सलाही दी क्योंकि सुबह के समय प्रदूषण का स्तर ज्यादा जहरीला है. उन्होंने कहा, 'बाहर निकलना खतरनाक है और विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए. दिल, फेफड़ों और श्वास के मरीजों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है.'

    डॉक्टरों ने प्रदूषण के कणों से बचने के लिए एन 91 या एन 95 मास्क का उपयोग करने की सलाह दी है. डॉक्टरा नांगिया ने कहा, 'सर्जिकल मास्क इस प्रदूषण से बचाव करने में सक्षम नहीं है. इससे बचाव के लिए विशेष मास्कों का उपयोग किया जाना चाहिए. लोगों को अपने बच्चों को मास्क पहनाना चाहिए या बाहर निकलते समय मुंह पर गीला कपड़ा रखना चाहिए.'

    एम्स, आरएमएल और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने भी कहा है कि श्वास संबंधी बीमारी के मामले तेजी से बढ़ें हैं. अपोलो अस्पताल के क्रिटिकल केयर, पल्मोनरी एंड स्लीप डिसऑर्डर के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. राजेश चावला ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों से ऐसे मरीजों की संख्या में डेढ़ गुना की बढ़ोतरी हुई है. ओपीडी में ज्यादातर श्वास, अस्थमा जैसी बीमारियों के गंभीर रोगी आ रहे हैं. बच्चों को व्यायाम या खेलने के लिए बाहर नहीं जाने देना चाहिए. लोगों को जितना संभव हो बाहर नहीं निकलना चाहिए.

    सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण ने दिल्लीवासियों से नवंबर के पहले 10 दिनों के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने का आग्रह किया है. क्योंकि इस दौरान दिल्ली की वायु गुणवत्ता में और गिरावट आने की संभावना है.

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