घरों में साफ सफाई करते-करते स्टार कॉमेडियन बन गई मुंबई की ये 'मेड'

म्हात्रे को कॉमेडियन के तौर पर काम करते हुए एक साल हो गया है. वो एक हफ्ते में करीब तीन दिन शो करती हैं.

News18.com
Updated: August 10, 2018, 3:32 PM IST
घरों में साफ सफाई करते-करते स्टार कॉमेडियन बन गई मुंबई की ये 'मेड'
दीपिका म्हात्रे
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Updated: August 10, 2018, 3:32 PM IST
दीपिका म्हात्रे मुंबई के कॉमेडी की दुनिया में एक जानी-मानी शख्सियत हो गई हैं. घर-घर जाकर बतौर 'मेड' काम करने वाली दीपिका, कॉमेडी के ज़रिए गरीब औरतों की स्टोरी बताती हैं. वो अपने कॉमेडी के माध्यम से बताती हैं कि घर-घर जाकर काम करने वाली औरतों से किस तरह से भेदभाव किया जाता है.

जब पत्रकार ने उनकी कॉमेडी की स्टाइल के बारे में पूछा तो दीपिका ने कहा, 'मैं तो हंसी-हंसी में ताना मारती हूं.' अगर आप उनका वीडियो देखेंगे तो पाएंगे कि उनकी कॉमेडी में व्यंग्य अंदर तक घुसा होता है.

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म्हात्रे कहती हैं कि उन्हें जो बात सबसे ज़्यादा चौंकाती है वो ये है घर में काम करने वाली महिलाओं से उम्मीद की जाती है कि वो घर की सीढ़ी पर चुपचाप बैठें, उनके प्लेट और गिलास अलग होते हैं. उनके साथ हमेशा भेदभाव किया जाता है.

वो बताती हैं कि जिस बिल्डिंग में वो काम करती थीं उसमें घर में काम करने वाले लोगों के लिए अलग लिफ्ट थी. म्हात्रे औरतों के खिलाफ होने वाले भेदभाव को भी अपनी कॉमेडी में शामिल करती हैं वो कहती हैं कि औरतों को शादी होने के बाद मंगलसूत्र पहनना पड़ता है और सिंदूर लगाना पड़ता है जबकि मर्दों को ऐसा कुछ भी नहीं करना पड़ता.

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म्हात्रे के कॉमेडी की तीन खासियतें हैं. पहली- वो समाज के ऐसे वर्ग से आती हैं जिसका कॉमेडी की दुनिया मे बिल्कुल भी प्रतिनिधित्व नहीं है. भारत मे स्टैंड-अप कॉमेडी अभी अपने शुरुआती स्तर पर है. अभी तक इस क्षेत्र में मिडिल क्लास और हायर मिडिल क्लास का ही कब्ज़ा है. म्हात्रे कि पिताजी एक अस्पताल में क्लर्क थे. वो खुद घर-घर काम करती हैं और अपने तीन बच्चों की परवरिश करती हैं.

दूसरी बात- म्हात्रे अपनी कॉमेडी में निचले तबके के लोगों की बातें शामिल करती हैं जो कि कॉमेडी की दुनिया में मुश्किल से दिखता है वो अदिति मित्तल की 'बैड गर्ल' सीरीज़ में अपना परिचय देती हैं, 'नमस्ते मै दीपिका म्हात्रे और मै मेड का काम करती हूं.'

तीसरी खासियत है कि वो महिला कॉमेडियन हैं. भारत में बहुत कम औरतें हैं जो स्टैंड-अप कॉमेडियन हैं. लेकिन ये सबकुछ म्हात्रे ने अकेले नहीं किया. वो अपनी इस सफलता का श्रेय अदिति मित्तल को देती हैं जिन्होंने उनके जीवन की सच्चाई को हंसी और ठहाकों में बदलने में मदद की.

जिस बिल्डिंग में वो काम करती थीं सबसे पहले वहीं पर उन्होंने परफॉर्म किया जहां पत्रकार रैचेल लोपेज़ की नज़र उन पर पड़ी और उन्हें अदिति मित्तल से मिलाया. म्हात्रे बताती हैं, 'पहले मैं काफी डरी हुई थी लेकिन अदिति मित्तल ने मेरे अंदर हिम्मत भरी और कहा कि वो बताएंगी कि कैसे स्टेज पर परफॉर्म करना है.'

म्हात्रे को कॉमेडियन के तौर पर काम करते हुए एक साल हो गया है. वो एक हफ्ते में करीब तीन दिन शो करती हैं. वो बताती हैं कि वो सारे शो करना चाहती हैं लेकिन आजकल वो इंटरव्यू के चलते काफी व्यस्त हैं.

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इस नई नई मिली शोहरत ने म्हात्रे के जीवन में काफी बड़े बदलाव कर दिए हैं. पहले वो सुबह साढ़े चार बजे सोकर उठ जाती थीं और लोकल ट्रेन में जाकर इमिटेशन जूलरी बेचती थीं. साढ़े छह बजे तक इससे फ्री होकर वो मलाड में घरों में काम करने चली जाती थीं जहां से वो दोपहर के 2 से तीन 3 बजे तक फ्री हो जाती थीं. इसके बाद वो मलाड या दादर जाकर कुछ नई जूलरी खरीदती थीं ताकि उसे अगले दिन बेचा जा सके. फिर घर लौटकर घर का काम करती थीं. घर का काम खत्म होते-होते रात के 12 बज जाते थे.

जब पत्रकार ने पूछा कि बतौर स्टैंड-अप कॉमेडियन अपना करियर बनाने के लिए क्या वो घरों में काम करना छोड़ देंगी तो उन्होंने जवाब दिया कि स्टैंड-अप कॉमेडी में तो कुछ कमाई ही नहीं है.

म्हात्रे बताती हैं कि भले ही वो अभी तक सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध नहीं थी लेकिन दोस्तों के बीच इससे पहले भी काफी मशहूर थीं. म्हात्रे इससे पहले स्टार प्लस पर आने वाले इंडियाज़ गॉट टैलेंट में कन्टेस्टेंट के तौर पर भी चुनी जा चुकी हैं.
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