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किताब का दावा: भगोड़ा आर्थिक अपराधी नीरव मोदी ने 2016 की नोटबंदी को ऐसे दिया था गच्‍चा

News18Hindi
Updated: October 23, 2019, 2:27 PM IST
किताब का दावा: भगोड़ा आर्थिक अपराधी नीरव मोदी ने 2016 की नोटबंदी को ऐसे दिया था गच्‍चा
पत्रकार पवन सी. लाल ने अपनी नई किताब में दावा किया है कि नोटबंदी को गच्‍चा देने में उसकी करीबी टीम ने काफी मदद की.

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) को 14,000 करोड़ रुपये की चपत लगाने वाले हीरा कारोबारी नीरव मोदी (Nirav Modi) और उसके मामा मेहुल चोकसी (Mehul Choksi) 2016 में हुई नोटबंदी के दौरान 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट इकट्ठा करने में व्‍यस्‍त थे. नीरव मोदी की 'ए' टीम ने नोटबंदी को गच्‍चा देने में उसकी पूरी मदद की. पत्रकार पवन सी. लाल ने अपनी किताब 'द राइज ऑफ इंडियाज डायमंड मुगल नीरव मोदी' में नोटबंदी के दौरान हीरा कारोबारी के काम करने के तरीके का चिट्ठा खोला है.

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  • Last Updated: October 23, 2019, 2:27 PM IST
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राशिद किदवई

नई दिल्‍ली. पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के साथ 14,000 करोड़ की धोखाधड़ी (Fraud) का मुख्‍य आरोपी और भगोड़ा आर्थिक अपराधी (Fugitive Economic Offender) नीरव मोदी (Nirav Modi) 2016 में हुई नोटबंदी (Demonetization) के दौरान 500-1000 के पुराने करेंसी नोट इकट्ठा करने में व्‍यस्‍त था. हीरा कारोबारी (Diamantaire) नीरव ने अपने कर्मचरियों को अपने-अपने खातों में जमा करने के लिए 300 करोड़ रुपये दिए. बाद में बांटी गई रकम को उनकी सैलरी (Salary) से एडजस्‍ट कर दिया गया. ये सभी दावे पत्रकार पवन सी. लाल की नई किताब 'फ्लॉड - द राइज एंड फाल ऑफ इंडियाज डायमंड मुगल नीरव मोदी' (Flawed – The Rise and Fall of India’s Diamond Mogul Nirav Modi) में किए गए हैं. लाला की किताब में नोटबंदी को गच्‍चा देने के लिए नीरव मोदी के अपनाए गए तरीकों (Modus Operandi) का कच्‍चा चिट्ठा खोलने का दावा किया गया है.

करीबी टीम ने नोटबंदी को गच्‍चा देने में की मदद
किताब में दावा किया गया है कि इस काम में उसकी करीबी टीम ने काफी मदद की. लाल ने किताब में नीरव मोदी के विदेशी जमीन पर गिरफ्तार होने, जमानत याचिका खारिज होने, प्रत्‍यर्पण की कवायद और जांच एजेंसियों (Investigation Agencies) की ओर से तीन देशों में की गई पड़ताल की पूरी कहानी बयां की है. उन्‍होंने नीरव मोदी के वैश्‍विक कारोबारी बनने और नाटकीय अंदाज में उसके पतन का ब्‍योरा भी किताब में दर्ज किया है. साथ ही सवाल उठाया है कि कैसे एक व्‍यक्ति पूरे इकोनॉमिक सिस्‍टम (Ecosystem) के लिए परेशानी का कारण बनने में सफल हुआ. किताब में नोटबंदी का जिक्र करने हुए लिखा गया है कि 8 नवंबर 2016 के कुछ दिन बाद दिल्‍ली में नीरव मोदी की कंपनी गीतांजलि के एक कस्‍टमर को एक जूनियर सेल्‍स एसोसिएट ने मेसेज किया, 'हम पुराने नोट लेते हैं.' हीरा कारोबार में नकद लेनदेन आम बात है. ऐसे कारोबार में नोटबंदी हिला देने वाली घटना थी. बावजूद इसके पुराने नोट स्‍वीकारने का मेसेज चौंकाने वाला था.

कर्मचारियों को रकम बांटकर खातों में जमा कराई
'फ्लॉड - द राइज एंड फाल ऑफ इंडियाज डायमंड मुगल नीरव मोदी' में बताया गया है कि नोटबंदी के दौरान हीरा कारोबारी और उसकी करीबी टीम ने कैसे काम (Modus Operandi) किया. नोटबंदी के बाद सरकार ने नागरिकों को अपना पहचानपत्र दिखाकर पुराने करेंसी नोट बैंक में जमा कराने की अनुमति दी थी. अगर किसी के खाते में पहले से ही लाखों रुपये पड़े हैं और वह दो या तीन लाख रुपये जमा करा रहा था तो आयकर अधिकारी (Income tax Officials) ज्‍यादा ध्‍यान नहीं दे रहे थे. वहीं, अगर वही व्‍यक्ति उस दौर में 10 लाख रुपये जमा कराता तो नजर में आना तय था. ऐसे में किसी भी कंपनी के लिए अघोषित नकदी (Unaccounted Cash) को खाते में जमा कराने से कहीं बेहतर था अपने कर्मचारियों के बीच बांट देना. ऐसे में अगर वह 10 लाख रुपये अपने 20 कर्मचारियों के बीच बांट दे और वे उसे बचत (Savings) बताकर अपने खातों में जमा कर दें तो किसी की नजर नहीं पड़नी थी. नीरव ने अपने कर्मचारियों में पैसे बांटकर हेराफेरी की.

एक लॉ फर्म के अनुमान के मुताबिक नीरव मोदी ने नोटबंदी के दौरान कम से कम 300 करोड़ रुपये बदलवाए. पीएनबी घोटाले में नीरव के मामा मेहुल चोकसी भी आरोपी हैं.

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अनुमान के मुताबिक बदलवाए गए 300 करोड़ रुपये
लेखक के मुताबिक, नोटबंदी के कुछ महीने बाद हर तरफ चर्चा थी कि नीरव मोदी और उसके करीबियों के ठिकानों पर छापेमारी शुरू हो गई. एक लॉ फर्म के अनुमान के मुताबिक नीरव मोदी ने नोटबंदी के दौरान कम से कम 300 करोड़ रुपये बदलवाए. हालांकि, किसी अधिकारी ने इसकी पुष्टि नहीं की. यह पहली बार नहीं था जब नीरव मोदी के ठिकानों पर छापेमारी हुई हो. इससे पहले 2013 में भी राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और आयकर विभाग (Income Tax Department) ने मुंबई में उसके ठिकानों पर संयुक्‍त छापेमारी की थी. इसमें 200 करोड़ रुपये मूल्‍य के हीरे, नकदी और सोने-चांदी की हेराफेरी का पता चला. एजेंसियों ने मुंबई सेंट्रल स्‍टेशन पर चार ट्रकों से सैकड़ों बैग जब्‍त किए. साथ ही चारों ट्रकों से कई लोगों को गिरफ्तार किया था. इनमें ट्रकों के ड्राइवर-हेल्‍पर के अलावा नीरव मोदी के कार्यालय से जुड़े चपरासी और आंगडि़यों को हिरासत में लिया. ये आंगडि़या अवैध बैंकिंग सेवाएं मुहैया कराते थे.

दावा, कर्ज देने वाली कंपनियां भी चलाता था नीरव
आयकर विभाग ने 2016 के कर चोरी मामले में नकदी, आभूषण और दस्‍तावेज जब्‍त किए. छापेमारी के दौरान गीतांजलि ग्रुप के कार्यालयों की भी तलाशी ली गई. एक बार फिर नीरव मोदी अपने मामा मेहुल चोकसी से अपने संबंधों को छुपा नहीं पाया. चोकसी एक आईपीओ के लिए एक कंपनी बना रहा था. ऐसे में वह भी जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया. इसी दौरान एक के बाद एक कई खबरें आई कि चोकसी के पूर्व ज्‍वेलरी डीलर्स गोल्‍ड लोन स्‍कीम में गीतांजलि के फेरबदल को लेकर कड़ी आलोचना कर रहे हैं. बता दें कि भारतीय एजेंसियों पीएनबी से 14,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में नीरव मोदी, उसके मामा मेहुल चोकसी और परिवार के कई सदस्‍यों की जांच कर रही हैं. सीबीआई इस मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ भ्रष्‍टाचार निषेध कानून और आईपीसी की विभिन्‍न धाराओं से जुड़े मामले में जांच कर रही हैं. लाल ने दावा किया है कि नीरव मोदी 2012 तक कुछ कर्जदाता कंपनियों का प्रभारी भी था.(लेखक ऑब्‍जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में विजिटिंग फेलो हैं. लेख उनके निजी विचार हैं.)

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First published: October 23, 2019, 2:21 PM IST
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