दिल्ली में एक महिला की बेटियों की शिक्षा में आधार कार्ड कैसे बाधक बना!

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Updated: August 30, 2019, 6:18 PM IST
दिल्ली में एक महिला की बेटियों की शिक्षा में आधार कार्ड कैसे बाधक बना!
दिल्ली में आधार कार्ड पर एक महिला का नाम उसकी बेटियों के एडमिशन के लिए मुश्किल बन गया. (सांकेतिक तस्वीर)

ब्यूटी और पिंकी द्वारका सेक्टर 21 में बमनोली में आठवीं और नवीं की छात्रा थीं. जून 2019 में परिवार ने घर बदल दिया, जिसके बाद उन्हें नए स्कूल में दाखिला लेना पड़ा.

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(इरम आघा)

कुमारी रेखा दिल्ली में घरेलू नौकर है. अपनी दो बेटियों ब्यूटी और पिंकी राय को पालने के लिए वह एक घर से दूसरे घर जाकर काम करती हैं. उनकी दोनों बेटियां एक बेहतर भविष्य का सपना देखती हैं, जो उनके वर्तमान जीवन की कठोर वास्तविकताओं से अलग होगा. हालांकि इन सपनों को एक आधार कार्ड (Aadhaar Card) की वजह से तोड़ने की कोशिश हुई.

रेखा की बेटियों को सरकारी स्कूल (Government School) में प्रवेश नहीं दिया गया. अधिकारियों ने उनका एडमिशन नहीं होने दिया क्योंकि आधार कार्ड पर उनकी मां का नाम वह नहीं था जो कि स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज है.

जब ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट अशोक अग्रवाल को इस बारे में पता चला तो उन्होंने मामले को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के सामने उठाने का फैसला किया.

उन्होंने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर कहा, "एक सरकारी स्कूल ने छात्रों को प्रवेश देने की अनुमति से इनकार कर दिया है. ऐसा सिर्फ इसलिए किया जा रहा है क्योंकि उनकी मां का नाम आधार कार्ड पर स्कूल रिकॉर्ड से अलग है." उन्होंने पत्र में इस बात का भी जिक्र किया कि उनकी मां घरों में नौकरानी का काम करती है.

मकान बदलने के बाद नए स्कूल में दाखिला
ब्यूटी और पिंकी द्वारका सेक्टर 28 में बमनोली में आठवीं और नवीं कक्षा की छात्रा थीं. जून 2019 में परिवार ने घर बदल दिया, जिसके बाद उन्हें नए स्कूल में दाखिला लेना पड़ा.
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अशोक अग्रवाल ने पत्र में लिखा, "पहले के स्कूल ने राजकीय सर्वोदय कन्या विद्यालय न्यू अशोक नगर में ट्रांसफर का निवेदन भेजा, जिसे अधिकारियों द्वारा स्वीकार कर लिया गया." हालांकि स्कूल प्रशासन ने प्रवेश देने से इनकार कर दिया, क्योंकि मां का नाम आधार कार्ड पर अलग था.

शिक्षा में रुकावट क्यों?
इस कदम पर सवाल उठाते हुए एडवोकेट अशोक अग्रवाल ने कहा कि वह यह समझने में नाकाम हैं कि आधार कार्ड पर इन छात्रों की मां का नाम दिल्ली सरकार के स्कूलों में इन बच्चों की शिक्षा के लिए कैसे प्रासंगिक है. हालांकि सीएम अरविंद केजरीवाल द्वारा पत्र का संज्ञान लिए जाने के बाद स्कूल प्रशासन रेखा की बेटियों को प्रवेश देने के लिए तैयार हो गया.

अशोक अग्रवाल ने लिखा कि राजकीय सर्वोदय विद्यालय न्यू अशोक नगर के पास कोई औचित्य नहीं है कि वह इन छात्रों को प्रवेश न दे. उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि स्कूल चलाने वाले लोग इन छात्रों और विशेष रूप से इन लड़कियों की शिक्षा के प्रति असंवेदनशील हैं.

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First published: August 30, 2019, 4:58 PM IST
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