सोनिया गांधी की टिप्पणी को जेटली ने मोदी के लिए कैसे बनाया था हथियार

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Updated: August 24, 2019, 4:50 PM IST
सोनिया गांधी की टिप्पणी को जेटली ने मोदी के लिए कैसे बनाया था हथियार
अरुण जेटली (Arun Jaitley) इस बारे में बात किया करते थे कि मोदी (Modi) जिस शिद्दत से अपने काम में लगे हैं, उसकी सराहना करनी चाहिए. जिस तरह विपरीत हालात में पढ़ाई की, उसकी सराहना करनी चाहिए.

अरुण जेटली (Arun Jaitley) इस बारे में बात किया करते थे कि मोदी (Modi) जिस शिद्दत से अपने काम में लगे हैं, उसकी सराहना करनी चाहिए. जिस तरह विपरीत हालात में पढ़ाई की, उसकी सराहना करनी चाहिए.

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  • Last Updated: August 24, 2019, 4:50 PM IST
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दिसंबर 2007 की बात है, जब गुजरात (Gujarat) के विधानसभा चुनाव (Assembly Election) होने वाले थे. अरुण जेटली अहमदाबाद (Ahmedabad) में थे. वहीं रहकर वो चुनाव का कामकाज देख रहे थे. आसपास जो भी घट रहा था, उस पर नजर रखने के साथ-साथ कैंपेन की रणनीति और मीडिया रणनीति बनाने का काम उन्होंने संभाला हुआ था. एक शाम मीडिया कर्मियों के पास संदेश आया कि जेटली प्रेस कांफ्रेंस (Press Conference) करने वाले हैं. वो प्रेस कांफ्रेंस मोदी और बीजेपी (BJP) के लिए एक तरह से गेम चेंजर साबित हुई. इसी प्रेस कांफ्रेंस में जेटली ने सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) पर खुलकर हमला बोला.

सोनिया ने मोदी को ‘मौत का सौदागर’ कहा था. सोनिया गांधी ने यह बात किसी बड़ी रैली में नहीं कही थी. छोटी रैली थी, जिसमें उनके मुंह से निकली इस बात को ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई. जेटली ने सुना और उन्होंने समाचार चैनलों के संवाददाताओं से फुटेज मांगी. वो टीवी देखकर तय नहीं करना चाहते थे. इसलिए फुटेज देखकर फैसला किया. उन्होंने वो हमला बोला और हम सब जानते हैं कि उसके बाद सोनिया गांधी की इस टिप्पणी का नरेंद्र मोदी को कितना फायदा हुआ.

पीएम मोदी और अमित शाह से पुराने संबंध
दरअसल, पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) से जेटली के संबंध बहुत पुराने हैं. 70 के दशक में मोदी दिल्ली आया करते थे. वह संघ के कार्यक्रमों का हिस्सा होते थे. साथ ही, अपनी ग्रेजुएशन भी पूरी कर रहे थे. जेटली उसके गवाह थे. मोदी आते थे, तो पुरानी दिल्ली में जनसंघ के ऑफिस के एक कोने में रुका करते थे. जेटली इस बारे में बात किया करते थे कि मोदी जिस शिद्दत से अपने काम में लगे थे, उसकी सराहना करनी चाहिए. जिस तरह विपरीत हालात में पढ़ाई की, उसकी सराहना करनी चाहिए. इसीलिए, जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने मोदी की डिग्री पर सवाल उठाया, तो जेटली बेहद नाराज थे.



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अरुण जेटली ने हमेशा शाह का किया समर्थन
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इसी तरह, अमित शाह के मामले को भी मोदी ने बेहद करीबी से देखा. सीबीआई की तरफ से दायर केस को लेकर जेटली हमेशा यही कहते थे कि अमित शाह और बाकियों को सोहराबुद्दीन मामले में फंसाया जा रहा है. वो लगातार कहते थे कि यूपीए सरकार का असली निशाना नरेंद्र मोदी हैं. जब अमित शाह को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात छोड़ने का आदेश दिया और कहा कि बगैर इजाजत के वो राज्य में दाखिल नहीं होंगे, तो जेटली दिल्ली में उनके मेजबान बने. हालांकि शाह गुजरात भवन में रहते थे. लेकिन पूरा दिन वो संसद के अंदर जेटली के नेता प्रतिपक्ष कार्यालय में गुजारते थे. जेटली लगातार उनसे चर्चा करते थे. जो लोग जेटली के ऑफिस में मिलने आते, उनसे अमित शाह की भी बातचीत होती थी.

उन दिनों शाह ज्यादातर समय सुनते थे, बहुत कम बोलते थे. उसी दौरान संसद की कार्यवाही के बारे में जेटली उन्हें बताया करते थे. रॉबर्ट वाड्रा पर जमीन घोटाले से जुड़े जितने आरोप है, उन मामलों की जानकारी भी अमित शाह को तभी दी गई थी.

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First published: August 24, 2019, 3:58 PM IST
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