जानिए कैसे मुस्लिम पार्टी के तौर पर पूरे देश में मौजूदगी दर्ज करा रही है AIMIM

AIMIM के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी अपनी पार्टी की पैठ बढ़ा रहे हैं. (फाइल फोटो)

AIMIM के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी अपनी पार्टी की पैठ बढ़ा रहे हैं. (फाइल फोटो)

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) के नतीजों ने असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) को उत्साह से भर दिया है. वो कई राज्यों में अपनी पार्टी की पैठ बनाने के लिए तैयार हैं. उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु इसके सबसे मजबूत उदाहरण हैं. कभी हैदराबाद तक केंद्रित रही AIMIM अब देशभर में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने को बेताब है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 8, 2021, 9:11 PM IST
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नई दिल्ली. 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Election 2020) को असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की अगुआई वाली AIMIM के लिए राजनीतिक टर्निंग प्वाइंट माना जा सकता है. यही वो चुनाव है जिसके बाद असुदुद्दीन ओवैसी की धमक हैदराबाद और महाराष्ट्र के कुछ इलाकों से आगे बढ़कर अन्य राज्यों में भी सुनाई देने लगी है. एक तरफ पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ओवैसी पर निशाना साध रही हैं तो दूसरी तरफ तमिलनाडु में डीएमके के सहयोगी भी चिंतित दिख रहे हैं. तमिलनाडु में डीएमके की दो सहयोगी पार्टियां अल्पसंख्यक केंद्रित राजनीतिक करती हैं और एमआईएम के चुनाव लड़ने की सुगबुगाहट के बाद चिंतित हैं. कहा जा सकता है कि ओवैसी की पार्टी इस वक्त देशभर में मुस्लिम पार्टी के तौर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने लगी है.

उत्तर प्रदेश की तरफ भी रुख कर चुके हैं ओवैसी

देश की आजादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जबकि मुस्लिम पार्टी के तौर पर पहचान रखने वाली कोई राजनीतिक पार्टी कई राज्यों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है. बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित ओवैसी ने घोषणा की थी कि वो अब अन्य राज्यों में भी अपनी पैठ बढ़ाएंगे. इसी क्रम में वो देश की सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश की तरफ भी रुख कर चुके हैं.

कभी सिर्फ हैदराबाद तक केंद्रित थी AIMIM
कभी हैदराबाद केंद्र रही एमआईएम अब बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना में अपने पैर जमा चुकी है. अब तमिलनाडु की राजनीति में ओवैसी गर्मी बढ़ा रहे हैं. डीएमके ने ओवैसी को अपने 6 जनवरी के कार्यक्रम में निमंत्रण दिया था लेकिन जल्द ही अपने सहयोगियों के विरोध को देखते हुए निमंत्रण वापस ले लिया. गौरतलब है कि तमिलनाडु में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और मनिधानेया मक्काल काची (MMK) डीएमके की सहयोगी पार्टियां हैं.

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पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गर्मी पैदा कर रहे हैं ओवैसी



उधर पश्चिम बंगाल में ओवैसी अपनी पहली यात्रा कर चुके हैं. वहां के प्रभावशाली धर्मगुरु के साथ मिलकर वो अपने प्रत्याशी उतारने की तैयारी में हैं. ऐसे में टीएमसी की तरफ से आरोप लगाए जा रहे हैं कि एमआईएम बीजेपी की बी टीम बनकर राज्य में चुनाव लड़ने आ रही है. लेकिन इन सबके बीच बेफिक्र ओवैसी हर राज्य में अपने कदम बढ़ा रहे हैं. वो साफ कर चुके हैं भारतीय लोकतंत्र में चुनाव लड़ना संवैधानिक अधिकार है और वे चुनाव लड़ेंगे. उन्होंने यह प्रतिक्रिया 'वोटकटवा' कहे जाने पर दी थी.
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