कोरोना की वजह से महिलाओं से छिन रहा रोजगार, दशकों की मेहनत बर्बाद

कोरोना की वजह से महिलाओं से छिन रहा रोजगार, दशकों की मेहनत बर्बाद
असंगठित क्षेत्रों में कोरोना काल में महिलाओं को रोजगार मिलने की दर बीते आठ सालों में सबसे कम है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

एक्शन एड (ActionAid) नाम के एक एनजीओ (Non-Governmental Organisation) द्वारा की गई इस विस्तृत स्टडी में बताया गया है कि कैसे असंगठित क्षेत्रों में महिलाओं के हाथों से रोजगार छिना है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 28, 2020, 8:03 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना महामारी (Covid-19 Pandemic) का प्रभाव सिर्फ लोगों के स्वास्थ्य पर ही नहीं पड़ रहा है बल्कि इससे पूरा सामाजिक-आर्थिक (Socio-Economic) ढांचा कमजोर हो रहा है. हाल में इंडियन एक्सप्रेस द्वारा प्रकाशित की गई एक रिपोर्ट बताती है कि असंगठित क्षेत्रों में कोरोना काल में महिलाओं को रोजगार मिलने की दर बीते आठ सालों में सबसे कम है. ये डेटा नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी स्कीम के बारे में बताया गया है.

क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है हालिया डेटा
इस ताजा डेटा को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एक्सपर्ट्स चिंता जाहिर करते रहे हैं कि कोरोना का प्रभाव महिलाओं पर पड़ रहा है. महिलाओं की रोजगार में कम होती भागीदारी की वजह से बीते कई दशकों के दौरान की गई मेहनत बर्बाद हो रही है. गौरतलब है कि बीते कई दशक के प्रयासों के बाद महिलाओं की रोजगार में भागीदारी बढ़ने लगी थी.

किन क्षेत्रों को किया गया शामिल
एक्शन एड नाम के एक एनजीओ द्वारा की गई इस विस्तृत स्टडी में बताया गया है कि कैसे असंगठित क्षेत्रों में महिलाओं के हाथों से रोजगार छिना है. पारंपरिक रूप से इन क्षेत्रों में महिलाओं की सबसे ज्यादा भागीदारी रही है. सर्वे विशेष रूप से पांच क्षेत्रों पर किया गया. इनमें घरेलू काम-काज, कृषि मजदूरी, निराई का काम, कचरे से संबंधित काम और बीड़ी मजदूरी को शामिल किया था.



किस क्षेत्र में कितने प्रतिशत गईं नौकरियां
सर्वे में सामने आया कि घरेलू कामों में लगी 85 प्रतिशत महिलाओं को कोरोना काल में नौकरी से हाथ धोना पड़ा है. कृषि मजदूरी में करीब 90 प्रतिशत महिलाओं का काम छूट गया. निराई के काम में 85 प्रतिशत महिलाओं को काम से हाथ धोना पड़ा. वेस्ट मैनेजमेंट के काम में 69 प्रतिशत महिलाओं का काम छिना तो वहीं बीड़ी के काम में लगी साठ प्रतिशत महिलाओं का काम छूट गया.

(सुहास मुंशी की स्टोरी से इनपुट्स के साथ. पूरी स्टोरी यहां क्लिक कर पढ़ी जा सकती है.)
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