भारत को कोरोना के भंवर से बाहर निकाल सकते हैं फील्ड हॉस्पिटल, जानिए कैसे

देश कोरोना की दूसरी लहर की चपेट में आ चुका है. (Pic- AP)

देश कोरोना की दूसरी लहर की चपेट में आ चुका है. (Pic- AP)

महामारी विशेषज्ञ (Experts) परंपरागत रास्तों के अलावा भी कई सुझाव दे रहे हैं. ऐसे में कोरोना के भंवर से निकलने में भारत के लिए फील्ड हॉस्पिटल (Field Hospital) की बड़ी भूमिका हो सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 20, 2021, 6:01 AM IST
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नई दिल्ली. भारत इस वक्त कोरोना की दूसरी लहर (Second Wave Of Covid-19) का जबरदस्त प्रकोप झेल रहा है. अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे हैं और शायद ही कोई ऐसा राज्य हो जहां से अव्यवस्था की खबरें न आ रही हों. डरा हुआ आम आदमी कोरोना से बचाव की कोशिशों में लगा है तो एक्सपर्ट्स महामारी की रोकथाम के लिए नए रास्ते तलाशने में जुटे है. महामारी विशेषज्ञ परंपरागत रास्तों के अलावा भी कई सुझाव दे रहे हैं. ऐसे में कोरोना के भंवर से निकलने में भारत के लिए फील्ड हॉस्पिटल (Field Hospital) की बड़ी भूमिका हो सकती है.

कोरोना मरीजों के बढ़ने की वजह से पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे रोगियों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. बड़ी संख्या में ऐसे भी अस्पताल हैं जहां पर सामान्य रोगियों के अलावा अलग से कोरोना वार्ड बनाकर भी इलाज चल रहा है. ऐसी स्थिति में सामान्य गंभीर रोगियों पर दोहरा खतरा है. पहला तो ये कि बढ़े कोरोना मामलों की वजह से उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा है. दूसरा, ऐसे रोगियों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और उन्हें कोरोना संक्रमण हुआ तो भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है.

यूएई समेत मिडिल ईस्ट के कई देशों ने बनाए फील्ड हॉस्पिटल

इंडियन एक्सप्रेस में दो एक्सपर्ट्स ने एक लेख में बताया है कि भारत को इस वक्त कोरोना की रोकथाम के लिए फील्ड अस्पतालों का रुख करना चाहिए. ऐसे अस्पताल जल्द बनाए जा सकते हैं और अन्य गंभीर रोगियों के लिए मुश्किलें भी कम होंगी. यूएई समेत मिडिल ईस्ट के कई देश ऐसे फील्ड अस्पताल बनाकर कोरोना के खिलाफ सफल लड़ाई का उदाहरण पेश कर चुके हैं.
भारत में भी बनाए गए लेकिन संख्या कम

भारत में भी कोरोना की पहली लहर में ऐसे अस्थाई अस्पतालों का निर्माण किया गया था. हालांकि मिडिल ईस्ट के फील्ड अस्पतालों में सुविधाएं और ज्यादा रखी गई थीं. इस तरह के सुनियोजित अस्पताल शहर के बाहरी इलाकों में कुछ ही दिनों के भीतर तैयार किए जा सकते हैं. इससे सामान्य अस्पतालों पर बोझ भी कम होता है और शहर में संक्रमण का डर भी.

ऐसे फील्ड अस्पतालों का सबसे शानदार उदाहरण यूएई में पेश किया गया था. खलीज टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुबई हेल्थ अथॉरिटी के डायरेक्टर जनरल हुमैद अल कुतामी ने एक टेलीविजन इंटरव्यू में कहा था कि दुबई ने दो फील्ड हॉस्पिटल बनाए हैं. अल कुतामी की तरफ से कहा गया था कि हर हॉस्पिटल में करीब 4 से 5 हजार बेड की व्यवस्था है. यानी महज दो अस्पतालों में 10 हजार बेड की व्यवस्था की गई थी. इसके अलावा दुबई में मौजूद वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए 3 हजार बेड वाले अस्पताल में बदल दिया गया था.



भारत में कोशिश जारी

इस बीच भारत में भी कोरोना के इलाज के लिए डीआरडीओ की तरफ से दिल्ली में नई कोविड फेसेलिटी बनाई जा रही है. इस फैसेलिटी के बन जाने के बाद दिल्ली में कोविड के इलाज के लिए 500 बेड अतिरिक्त मिल जाएंगे. साथ ही रक्षामंत्री ने डीआरडीओ को लखनऊ में भी दो अस्थायी अस्पताल बनाने के निर्देश जारी किए हैं.

पांच सौ बेड वाले अस्पताल में डीआरडीओ के डॉक्टर्स और स्टाफ के अलावा आर्म्ड फोर्सेज और केंद्रीय पुलिसबल के डॉक्टर्स शामिल तैनात होंगे. हालांकि जरूरत पड़ने पर बेडों की संख्या को आने वाले दिनों में बढ़ाया भी जा सकता है. अगर पिछले साल के आंकड़ों पर गौर करें तो जुलाई 2020 में सेना और अर्धसैनिक बलों के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के साथ मिलकर इस 1000 बेड के ऐसे अस्पताल का निर्माण किया था. इनमें 500 बेड आईसीयू सुविधा से लैस थे.

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित लेख के मुताबिक भारत में कोरोना की दूसरी लहर इतनी प्रचंड है कि ऐसे फील्ड अस्पतालों की अधिक संख्या में जरूरत है. सामान्य अस्पतालों पर पड़े बेतहाशा बोझ को फील्ड हॉस्पिटल के जरिए ही कम किया जा सकता है और बड़ी संख्या में लोगों की जिंदगी भी बचाई जा सकती है.
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