कैसे पहुंचाई गई वैक्‍सीन और 16 जनवरी को टीकाकरण स्थल पर क्या होगा? जानिए सबकुछ

देश में 16 जनवरी से टीकाकरण अभियान की शुरुआत होने जा रही है. (न्यूज़18 क्रिएटिव)

Coronavirus Vaccination: देश में व्यापक टीकाकरण अभियान 16 जनवरी से शुरू होगा. न्यूज़18 के जरिए जानें कि देश भर में वैक्‍सीन कैसे पहुंचाए गए, उन्हें कहां संग्रहित किया गया और 16 जनवरी को टीकाकरण स्थल पर क्या होगा?

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    नई दिल्ली. इस सप्ताह के शुरू में केंद्र सरकार (Central Government) ने 1.65 करोड़ कोविड-19 वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) खरीदने के आदेश दे दिए थे. इनमें से कोवीशील्ड (Covishield) के 1.10 करोड़ और कोवैक्सीन (Covaxin) के 55 लाख खुराक खरीदी जाना तय हुआ था. केंद्र के इस आदेश ने पहले चरण के टीकाकरण का निर्धारण तो किया लेकिन विशाल देशभर में इनका परिवहन एक बड़ी चुनौती है. विभिन्न राज्यों में पहुंचने के बाद वैक्सीन को निर्धारित स्थानों पर संग्रह किया जाना है. राष्ट्रीय टीकाकरण 16 जनवरी से शुरू होगा. न्यूज़18 के जरिए जानें कि देश भर में वैक्‍सीन कैसे पहुंचाए गए, उन्हें कहां संग्रहित किया गया और 16 जनवरी को टीकाकरण स्थल पर क्या होगा?

    निर्माण इकाइयों से वैक्सीन का परिवहन कैसे हुआ?
    सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक ने अपने-अपने वैक्सीन की खेप को क्रमशः मंगलवार और बुधवार को भेजना शुरू किया. शुरुआती वैक्सीन जो वजन में करीब 1088 किलो थीं, उसे पुणे स्थित निर्माण इकाई से विशेष ट्रकों के माध्यम से एयरपोर्ट तक लाया गया जहां से यह विमानों द्वारा दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, गुवाहाटी, शिलॉन्ग, अहमदाबाद, हैदराबाद, विजयवाड़ा, भुवनेश्वर, पटना, बेंगलुरु, लखनऊ और चंडीगढ़ भेजा गया. इसके बाद बुधवार को भारत बायोटेक ने अपने पहले बैच की वैक्सीन (प्रत्येक शीशी में 20 खुराक) को गनवरम, गुवाहटी, पटना, दिल्ली,  कुरुक्षेत्र, बेंगलुरु, पुणे, भुवनेश्वर, जयपुर, चेन्नई और लखनऊ विमानों से भेजा.

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    जब वैक्‍सीन अलग-अलग शहरों में पहुंचती हैं तो क्या होता है?
    एक बार जब वैक्सीन, निर्माण इकाई से बाहर निकलती है तो उसके बाद केंद्र व राज्य सरकारें उसके संग्रहण केंद्र पहुंचने तक परिवहन की निगरानी करती हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार वैक्‍सीन को करनाल, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता के सरकारी मेडिकल स्टोर डिपो (जीएमएसडी) में पहुंचाया जाता है. इन चार नोडल स्थानों में वैक्सीन के पहुंचने के बाद इन्हें रेफ्रिजरेटेड या आइसोलेटेड वैन के माध्यम से स्‍टेट वैक्सीन स्टोर्स तक भेजा जाता है. अभी 37 राज्य वैक्सीन स्टोर है जिनमें थोक भंडारण किया जा रहा है.



    स्टेट वैक्सीन स्टोर में आने के बाद वैक्सीन को कहां पहुंचाया जाता है?
    स्टेट वैक्सीन स्टोर में आने के बाद वैक्सीन को टीका केंद्रों तक सुरक्षित और जीरोवेस्ट के साथ पहुंचाने का जिम्मा संबंधित राज्य सरकारों का होता है. जिला, उप-जिला और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बने स्टोर, वैक्सीन के अगले ठिकाने बनते हैं. स्टेट वैक्सीन स्टोर की तरह ही जिला स्टोर भी तापमान नियंत्रित हैं. वैक्सीन की पूरी यात्रा के दौरान सूचनाएं को-विन (कोविड-19 वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क), डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्लीकेशन पर जानकारी दी जाती है.

    देश में मौजूदा कोल्ड चेन उपकरण की क्षमता क्या है?
    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार सभी राज्यों में कम से कम 1 राज्य स्तरीय क्षेत्रीय वैक्सीन स्टोर है. उत्तर प्रदेश में 9, मध्यप्रदेश और गुजरात में चार, केरल में तीन और जम्मू एवं कश्मीर, कर्नाटक, राजस्थान में प्रत्येक में दो-दो वैक्सीन स्टोर हैं. नेशनल कोल्ड चेन मैनेजमेंट इनफार्मेशन सिस्टम के अनुसार 6 दिसंबर को 28932 कोल्ड चेन पॉइंट्स, 240 वाकिंग कूलर्स, 70 वाकिंग फ्रीजर, 44226 आइस लाइंड रेफ्रिजरेटर, 40792 डीप फ्रीजर और 294 सोलर यूनिट मौजूद हैं.

    वैक्सीनेशन स्थल पर वैक्सीन को कैसे लाया जाता है?
    वैक्सीन के अंतिम मील की यात्रा आइसबॉक्स या वैक्सीन वाहक बक्से में होती है. यह बिजली से नहीं चलते. इनसे पहले की यात्रा में वैक्सीन को या तो बिजली से चलने वाले या सौर ऊर्जा से संचालित होने वाले बक्से में रखा जाता है. आइस बॉक्स और वैक्सिंग वाहक में तापमान जांचने का प्रावधान होता है.

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    टीकाकरण साइट या सत्र साइट का सेटअप क्या है?
    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार वैक्सीनेशन, स्वास्थ्य केंद्रों (सरकारी और निजी) दोनों में किया जाता है जहां पर मेडिकल अफसर/ डॉक्टर उपलब्ध होता है. ऐसे केंद्रों को फिक्स्ड सेशन साइट कहा जाता है. टीकाकरण स्थल के बारे में सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार वैक्सीनेशन साइट में आने और जाने के लिए जहां तक संभव हो अलग-अलग रास्ते होना चाहिए. इन केंद्रों पर तीन अलग-अलग कमरे जो प्रतीक्षा, वैक्सीनेशन और ऑब्जरवेशन के लिए निर्धारित हो, आदर्श स्थिति में होने चाहिए. ये कमरे हवादार होना चाहिए. इसके अलावा प्रतीक्षा क्षेत्र (कमरे या बाहर होने की दशा में भी) में शारीरिक दूरी के मापदंडों का पालन करते हुए बैठने की व्यवस्था होनी चाहिए.

    प्रतीक्षा क्षेत्र में आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) सामग्री भी प्रदर्शित की जाती है. वैक्सीनेशन रूम में एक बार में एक व्यक्ति को जाने की अनुमति होती है ताकि प्राइवेसी बनी रहे. इस कमरे में टेबल, कुर्सियां, पर्याप्त मात्रा में वैक्सिंग, एनाफ्लेक्सिस किट और वेस्ट बास्केट्स होनी चाहिए. वहीं ऑब्जर्वेशन रूम में लाभार्थियों को हल्की या प्रमुख प्रतिकूल प्रभावों की निगरानी के लिए 30 मिनट तक टीकाकरण के बाद प्रतीक्षा करने के लिए कहा जाता है.

    वैक्सीनेशन टीम में कौन-कौन शामिल है और उनकी क्या जवाबदारी है?
    वैक्सीनेशन टीम में 5 सदस्य होते हैं. इनमें पहला अधिकारी जो सुरक्षा प्रभारी हो सकता है जो व्यक्ति उसे प्रदान की गई सूची और लाभार्थी द्वारा प्राप्त संदेश के आधार पर लाभार्थी के पंजीयन और पंजीकरण करने की जांच का काम करता है. अधिकारी, लाभार्थियों को हाथों को धोने या सैनिटाइज कर प्रवेश की अनुमति देता है. अधिकारी, लाभार्थी के जांच जैसे सरकारी या अन्य फोटो आईडी सत्यापन के लिए जिम्मेदार होगा. टीम का तीसरा सदस्य सबसे महत्वपूर्ण वैक्सीनेटर अधिकारी है जो सुरक्षित रूप से वैक्सीन लगाने वाला होता है. यदि लाभार्थी एक महिला है और टीका लगाने वाला पुरुष है तो एक महिला साथी को टीकाकरण कक्ष में आदर्श रूप से उपस्थित होना चाहिए.

    वैक्सीनेटर को को-विन एप में टीकाकरण संबंधित सभी जानकारियां और पंजीकरण करना होता है. साथ ही वैक्सिंग लगवाने को दी जाने वाली जानकारी भी वैक्सीनेटर ही देगा. साथ ही लाभार्थी को यह सूचित करना होगा कि उसे एसएमएस पर वैक्सीनेशन के दूसरी खुराक के लिए तारीख और समय दिया जाएगा. वैक्सीनेटर लाभार्थी को ऑब्जर्वेशन में कुछ समय रोकने के लिए भी कहेगा. वहीं वैक्सीनेशन स्थल पर यदि लाभार्थियों की संख्या ज्यादा है तो वैक्सीनेटर की संख्या बढ़ाई जा सकती हैं. इसके अलावा दो अन्य अधिकारियों को ऑब्जर्वेशन रूम में लोगों के देखभाल के लिए उपस्थित होना होगा. ये लोग ही साइड इफेक्ट्स या प्रतिकूल प्रभाव के अनुभव होने पर वैक्सीनेटर को सूचित करेंगे.

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