कोरोना के इलाज में क्या गेमचेंजर साबित होगी DRDO की दवा 2-DG? जानें हर सवाल का जवाब

देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस के दो लाख 81 हजार 386 नए मामले सामने आए हैं.

देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस के दो लाख 81 हजार 386 नए मामले सामने आए हैं.

DRDO anti-Drug against Coronavirus: ये दवा आईएनएमएएस-डीआरडीओ के दो वैज्ञानिकों डॉ. सुधीर चांदना और डॉ. अनंत भट्ट ने तैयार की है. आइए जानते हैं कि कोरोना के इलाज और इस वायरस को खत्म करने में ये दवा कैसे काम करती है?

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DRDO anti-Drug against Coronavirus: पिछले दिनों ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (DRDO) की बनाई एक दवा 2डीजी (2DG) कोरोना मरीजों को दिए जाने की सिफारिश की है. ये दवा आईएनएमएएस-डीआरडीओ के दो वैज्ञानिकों डॉ. सुधीर चांदना और डॉ. अनंत भट्ट ने तैयार की है. एक साल के लंबे ट्राइल के बाद इसे इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी भी मिल गई है, जिसके बाद आज डीआरडीओ इमर्जेंसी यूज़ के लिए इस दवा की 1,000 डोज़ बाजार में उतार दी गई है.

ऐसे मेंआइए जानते हैं कि कोरोना के इलाज और इस वायरस को खत्म करने में ये दवा कैसे काम करती है? क्या इसे कोरोना महामारी के मद्देनजर गेम चेंजर माना जा सकता है:-

  • ये कौन सी दवा है?

    ये दवा ग्लूकोज का बदला हुआ रूप है. इसे 2 डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2डीजी) कहते हैं. ये दवा वायरस की ग्रोथ रोकती है. ऐसा हमने पिछले साल अप्रैल-मई में एक्सपेरिमेंट करके टेस्ट किया. सरकार को उम्मीद है कि इस दवा के चिकित्सीय उपयोग को मंजूरी देने से मेडिकल ऑक्सीजन पर निर्भरता कम होगी और अस्पतालों में भर्ती मरीजों की रिकवरी में भी मदद मिलेगी.

  • ये दवा कैसे काम करती है?

    वायरस से हमारे शरीर में जब कुछ सेल्स इन्फेक्ट हो जाते हैं, तब वे ज्यादा ग्लूकोज मांगते हैं. हम मरीज को ग्लूकोज का यह बदला हुआ रूप देते हैं, तो इसके साथ-साथ 2डीजी भी उन सेल्स में जाता है और वायरस की ग्रोथ में रुकावट आ जाती है. जब हम मरीज को सुबह शाम इसकी डोज देते हैं तो वायरस आगे ग्रो नहीं कर पाता और तब हमारा सिस्टम वायरस को खत्म करने में मदद करता है.


  • इस दवा को कैसे लेना है?

    ये दवा पाउडर के रूप में आती है. इसे पानी में घोलकर आपको पीना होता है.


  • क्या इंफेक्शन के पहले दिन से ही ये दवा दी जा सकती है?

    हां, इस दवा का जो मैकेनिज्म है वह शुरुआती दौर में लेने में भी बहुत फायदा करेगा. अभी मॉडरेट से सीवियर मरीजों पर इसके इस्तेमाल की अनुमति मिली है, आगे जैसे-जैसे दवा का प्रयोग बढ़ेगा, ड्रग कंट्रोलर से ही आगे के दिशा-निर्देश लिए जाएंगे.


  • क्या कोरोना महामारी में इस दवा को गेम चेंजर कहा जाएगा?

    दवा अस्पताल में भर्ती मरीजों की रिकवरी में तेजी ला सकती है और मेडिकल ऑक्सीजन पर उनकी निर्भरता को कम कर सकती है. अस्पताल के परीक्षणों में यह पाया गया कि 42% रोगी, जिन्हें प्रतिदिन दो पाउच दवा दी जाती थी, तीसरे दिन तक ऑक्सीजन समर्थन से बाहर हो गए. ऐसे में मानक इलाज के तहत, तीसरे दिन तक केवल 30% रोगी ऑक्सीजन सहायता से बाहर हो जाते हैं.ये दवा मॉडरेट और गंभीर कोविड मामलों में प्रभावी पाई गई है. ऐसे में 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों पर भी ये अच्छी तरह से काम करती है, इसे कोरोना के इलाज में एक सहायक आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति दी गई है. दूसरे शब्दों में, यह कोई चमत्कारिक इलाज नहीं है. ऐसे में इसे कोरोना प्रोटोकॉल और पूरे इलाज का एक हिस्सा ही माना जाएगा.


  • इस दवा की कितनी कीमत होगी?

    2डीजी (2DG) की कीमत की घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि हर पाउच की कीमत 500-600 रुपये होने की उम्मीद है. डीआरडीओ का कहना है कि 2-डीजी का बड़े पैमाने पर आसानी से उत्पादन किया जा सकता है. इस परियोजना में डीआरडीओ के उद्योग भागीदार डॉ. रेड्डीज लैब ने पहले ही अस्पतालों के लिए सीमित मात्रा में दवाओं का उत्पादन शुरू कर दिया है. यह फिलहाल काउंटर पर उपलब्ध नहीं होगा.


  • क्या यह दवा बच्चों के लिए भी काम आएगी?

    जो क्लिनिकल ट्रायल हुए हैं, वे सभी पेशेंट 18 साल की उम्र से बड़े थे. तो बच्चों को यह दवा दी जाएगी या नहीं, यह ड्रग कंट्रोलर ही तय करेंगे. वैसे यह दवा नुकसान नहीं करती और इसकी बहुत माइल्ड डोज ही दी जाती है.

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