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अगर ये पूर्व प्रधानमंत्री मान लेते गृह मंत्रालय की बात तो गिरने से बचाई जा सकती थी बाबरी मस्जिद

News18Hindi
Updated: November 3, 2019, 6:13 PM IST
अगर ये पूर्व प्रधानमंत्री मान लेते गृह मंत्रालय की बात तो गिरने से बचाई जा सकती थी बाबरी मस्जिद
बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर पूर्व गृह सचिव ने कई दावे किए हैं (न्यूज18 क्रिएटिव- मीर सुहैल)

पीवी नरसिम्हा (PV Narasimha Rao) राव ने लंबे समय से चले आ रहे इस मसले में प्रमुख रोल अदा किया है. माधव गोडबोले (Madhav Godbole) कहते हैं कि लेकिन दुर्भाग्यवश वे इस टेस्ट मैच में एक न खेलने वाले कप्तान साबित हुए.

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  • Last Updated: November 3, 2019, 6:13 PM IST
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नई दिल्ली. अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति होती और तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव (P V Narasimha Rao) ने गृह मंत्रालय की एक व्यापक आपात योजना को स्वीकार कर लिया होता तो बाबरी मस्जिद को बचाया जा सकता था. इस योजना को तत्कालीन गृह मंत्रालय ने बाबरी मस्जिद के तोड़े जाने से पहले तैयार किया था, ऐसा दावा उस समय केंद्रीय गृह सचिव रहे माधव गोडबोले (Madhav Godbole) ने किया है.

PTI की खबर के मुताबिक उन्होंने अपनी नई किताब (New Book) में कहा है कि अगर प्रधानमंत्री के स्तर से राजनीतिक पहल की गई होती तो, इस 'रामायण की महाभारत' (Mahabharata of this Ramayana) को रोका जा सकता था.

'समय पर कदम उठाने में फेल रहे राजीव गांधी-वीपी सिंह'
इस घटना की सच्ची तस्वीर गढ़ने का प्रयास करने के दौरान बाबरी (Babri Mosque) को ढ़हाए जाने से पहले और उसके बाद की घटनाओं के बारे में गोडबोले कहते हैं, प्रधानमंत्री राव जिन्होंने इस टेस्ट मैच में सबसे महत्वपूर्ण रोल निभाया, दुर्भाग्यवश वे मैच न खेलने वाले कप्तान साबित हुए.

अपनी किताब द बाबरी मस्जिद-राम मंदिर डिलेमा: एन एसिड टेस्ट फॉर इंडियन कॉन्स्टीट्यूशन (बाबरी मस्जिद-राम मंदिर दुविधाः भारतीय संविधान के लिए एक एसिड टेस्ट) में लेखक दावा करते हैं कि जब बाबरी मस्जिद गंभीर खतरने में थी तब राव के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और वीपी सिंह भी समय से कोई कदम उठाने में फेल रहे.

वे कहते हैं कि जब राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) प्रधानमंत्री थे, तब दोनों ही पक्षों के बीच स्थितियां कठोर होने से पहले विवाद को खत्म करने के लिए कुछ काम करने वाले समझौते की बातें सुझाई गई थीं. लेकिन कोई भी कदम नहीं उठाया गया.

वे कहते हैं, "वीपी सिंह (VP Singh) बाबरी मस्जिद और उसके आसपास के इलाके को केंद्र सरकार के अधिकार में देने वाले एक अध्यादेश को लाने के बाद इस पर दृढ़ रहे."
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'माना जाता गृह मंत्रालय को सुझाव तो नहीं गिरती बाबरी'
गोडबोले बताते हैं कि 1992 में इससे जुड़ी संस्थाओं और अधिकारियों से लंबी बातचीत के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक व्यापक आपात योजना बनाई. इस योजना के तहत संविधान के 356वें अनुच्छेद (Article 356) का प्रयोग कर ढांचे को कब्जे में लेना का विचार था. केंद्रीय कानून मंत्रालय ने इस संबंध में कैबिनेट के नोट को मंजूरी भी दे दी थी.

गृह मंत्रालय (Home Ministry) ने अपनी यह योजना 4 नवंबर को कैबिनेट सचिव, प्रधानमंत्री के मुख्य सचिव, प्रधानमंत्री के वरिष्ठ सलाहकार, गृह मंत्री और प्रधानमंत्री को भेजा.

गोडबोले याद करते हैं, इसमें बाबरी मस्जिद पर सफलतापूर्वक कब्जा करने और उसके आसपास के इलाके को सुरक्षा के लिहाज से घेरने के लिए केंद्रीय पैरामिलिट्री दलों के प्रयोग पर जोर दिया गया था. ऐसा बिल्कुल समय से सभी को चौंकाते हुए किया जाना था.

लेकिन योजना के लिए राजी नहीं हुए नरसिम्हा राव
कोणार्क प्रकाशन से छपी अपनी किताब में वे लिखते हैं कि ऐसा कारसेवा के लिए तय की गई तारीख से पहले ही किया जाना था. ताकि बड़ी संख्या में जुटने वाली कारसेवकों की भारी भीड़ को संभाला जा सके.

उनका कहना है कि इस मामले में केंद्रीय रिजर्व बलों (Central Reserve Forces) की कार्रवाई से पहले संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन का लगाया जाना जरूरी था. लेकिन राव ने महसूस किया कि आपातकालीन योजना काम नहीं करेगी और उन्होंने इसे खारिज कर दिया.

गोडबोले कहते हैं कि अगर नरसिम्हा राव ने इस योजना को स्वीकार कर लिया होता तो बाबरी मस्जिद को बचाया जा सकता था.

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First published: November 3, 2019, 5:44 PM IST
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