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EXCLUSIVE: लॉरेंस बिश्नोई के गैंग में करीब 200 युवा, नन्हे हाथों में हथियार थमाकर चलाता है अपना साम्राज्य

गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को और 5 दिन के लिए कोर्ट ने अमृतसर पुलिस की कस्टडी में भेज दिया है. (फाइल फोटो)

गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को और 5 दिन के लिए कोर्ट ने अमृतसर पुलिस की कस्टडी में भेज दिया है. (फाइल फोटो)

Gangster Lawrence Bishnoi: पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान समेत कई राज्यों में आतंक फैलाने वाले गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के गिरोह में करीब 200 युवा शामिल बताए जाते हैं. जुर्म की दुनिया में छोटी उम्र में बड़ा कारनामा करने वालों पर लॉरेंस गैंग खास नजर रखता था. नाबालिगों को हथियारों की ट्रेनिंग और पुलिस की गिरफ्त से बचने के तकनीक के इस्तेमाल के गुर भी सिखाए जाते थे.

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नई दिल्लीः पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद से ही गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई खबरों में हैं. तिहाड़ जेल में बंद लॉरेंस को इन दिनों पंजाब पुलिस अपने यहां लाकर पूछताछ कर रही है. अमृतसर की कोर्ट ने बुधवार को लॉरेंस का रिमांड 5 दिन के लिए और बढ़ा दिया. वैसे तो लॉरेंस लंबे समय से जेल में है, लेकिन उस पर वहीं से अपना गैंग चलाने के आरोप लगते रहे हैं. पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान समेत कई राज्यों में उसके खिलाफ करीब तीन दर्जन केस दर्ज हैं. उसके गैंग की कहानी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. वह कैसे नाबालिगों को गिरोह में शामिल करता था, उन्हें हथियार चलाने और पुलिस से बचने की ट्रेनिंग कैसे दी जाती, पुलिस के बंदोबस्त के बावजूद वह कैसे तकनीकी तौर पर सबको चकमा देकर अपना गैंग चलाता रहा, ये जानना भी दिलचस्प है.

गोल्डी बरार और काला राणा उर्फ़ वीरेंद्र प्रताप को लॉरेंस बिश्नोई के दो मजबूत हाथ माना जाता था. गोल्डी फिलहाल कनाडा में है जबकि राणा पुलिस की गिरफ्त में. काला राणा जब इंटरपोल की मदद से भारतीय एजेंसियों के हत्थे चढ़ा था तो बिश्नोई को तगड़ी चोट लगी थी. राणा के जेल में होने के बाद लॉरेंस फिलहाल गोल्डी बरार पर ज्यादा निर्भर है. बिश्नोई के आदेश पर गिरोह को हथियार मुहैया कराने का काम उसी का है. सूत्रों के मुताबिक, लॉरेंस के गिरोह में मुख्य रूप से उसका भाई अनमोल, संपत नकेरा, टीनू करियाणा, आशीष बिश्नोई, दिनेश बिश्नोई और अमित बवाना शामिल हैं. एक्टर सलमान खान पर हमला करने के लिए संपत और टीनू को ही भेजा गया था. इनके अलावा अंकित भादू भी था, जो एनकाउंटर में मारा गया.

गैंग में 200 से ज्यादा युवा शामिल
लॉरेंस के गिरोह का एक और गैंगस्टर है, जो अपने काम करने के तरीकों की वजहों से लॉरेंस का खास बन गया. उसका नाम है अभिषेक कोली. उम्र 19 साल. वह जब नाबालिग था, तभी से बिश्नोई गैंग से जुड़ गया था. बताया जाता है कि लॉरेंस के गिरोह में करीब 200 युवा शामिल हैं. लॉरेंस गैंग में नाबालिगों पर क्यों जोर देता था, इसके लिए अभिषेक का केस समझना होगा. जुर्म की दुनिया में छोटी उम्र में कौन बड़ा कारनामा करता है, इसकी सारी जानकारी ह्यूमन इंटेलिजेंस से रखी जाती. बाकी थानों से पता किया जाता. अखबारों में आने वाली जुवेनाइल क्राइम की खबरों पर भी नजर रखी जाती. उसके बाद उनसे संपर्क किया जाता.

नाबालिग अभिषेक ऐसे बना क्रिमिनल
अभिषेक से भी ऐसे ही कॉन्टैक्ट हुआ था. बताया जाता है कि अभिषेक का एक बार जुए का अड्डा चलाने वाले तुषार से झगड़ा हुआ था. तुषार ने उसका अपहरण कर लिया. खूब मारा. तब उसकी उम्र करीब 16 साल थी. मूसेवाला हत्याकांड के प्रमुख आरोपी संतोष जाधव को इसकी जानकारी मिली तो उसने वीडियो कॉल पर लॉरेंस से बात कराई. अभिषेक संतोष को कुछ करके दिखाना चाहता था. अभिषेक के जज्बे को देखकर उसे जयपुर भेजा गया. वहां आशीष बिश्नोई, दिनेश बिश्नोई और अमित बवाना ने उसे हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी. अभिषेक ने अच्छे से ट्रेनिंग ली. जब वह तैयार हुआ तो फिरौती के धंधे में आजमाने की तैयारी की गई.

फिरौती में कमीशन ने बढ़ाया लालच
सूत्र बताते हैं कि अभिषेक से कहा गया था कि जितनी फिरौती मिलेगी, उसका 15 फीसदी अभिषेक को मिलेगा, बाकी लॉरेंस के पास जाएगा. इसके बाद राजस्थान में राकेश उर्फ़ लाला खटीक से 1 करोड़ की फिरौती मांगी गई, जो मिली भी. उसमें अभिषेक को 15 लाख मिले. गंगानगर के शुभम गुप्ता से 1 करोड़ की फिरौती में से भी अभिषेक को 15 लाख मिले. हनुमानगढ़ के इंदु हिसारिया से मिली 2 करोड़ की फिरौती में से 1 करोड़ दिए गए. बीकानेर में दीपक पारेख से 50 लाख की फिरौती मांगी गई. इसमें भी अभिषेक वॉन्टेड रहा.

लॉरेंस के गैंग में नाबालिगों पर जोर
बताया जाता है कि नाबालिग पर लॉरेंस ज्यादा जोर इसलिए देता था कि वो पकड़े जाएं तो जुवेनाइल एक्ट में कार्रवाई हो और जल्दी बाहर आ जाएं. दूसरी वजह ये कि नए-नए लड़कों में खून गर्म होता है. उनसे जो कहा जाए, वो करने को राजी हो जाते हैं. सबसे बड़ी बात कि उम्र कम होने से लंबी रेस में काम भी आते हैं. एक बात यह भी कि गिरोह में शामिल किसी को कोई टास्क दिया जाता, तभी उसे हथियार मिलता था. हथियार की जिम्मेदारी गोल्डी बरार की थी. टास्क खत्म होते ही हथियार वापिस ले लिया जाता था. गिरोह के नए लड़के हाथ में हथियार पकड़ने को हमेशा बेताब रहते थे.

बचने के लिए आजमाते ये तकनीक
लड़कों को हथियारों की ट्रेनिंग के साथ पुलिस की गिरफ्त से बचने के तकनीक के इस्तेमाल के गुर भी सिखाए जाते थे. सूत्र बताते हैं कि गिरोह के बीच एकदूसरे से संपर्क के लिए सिग्नल, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और फेसबुक का इस्तेमाल किया जाता. ये बातचीत भी कोड से शुरू होती थी. जैसे टेलीग्राम पर बात करना सेफ है कि नही, इसके लिए कोड जेनरेट होता. जैसे संतोष ने अभिषेक को (..) दो डॉट भेजे तो सामने से 3 डॉट (…) आने चाहिए. अगर 2 या 4 डॉट आए तो इसका मतलब ये कि अभी सेफ नही है. इसके अलावा, बातचीत के लिए वॉइसओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VoIP) की मदद ली जाती थी. VoIP कॉल को ट्रैस करना मुश्किल होता है क्योंकि आईपी एड्रेस लगातार चेंज होता रहता है. गिरोह को इसमें महारत हासिल थी. इसके बावजूद एजेंसियों के हाथ कुछ नंबर लग गए.

लॉरेंस अब भी पुलिस के लिए सिरदर्द
अभिषेक कोली के भाई का पुणे के कॉलेज में किसी से झगड़ा हो गया था. उसे मारने के लिए अभिषेक ने हथियार मांगा था. उसके बाद कॉलेज में ही फायरिंग की थी, लेकिन झगड़ा करने वाला बच गया था. बाद में वलसाड पुलिस को अभिषेक के गुजरात जाने की जानकारी मिली तो उसे हथियार के साथ तभी पकड़ लिया गया. फिलहाल कॉलेज फायरिंग केस में अभिषेक पुणे पुलिस की कस्टडी में है. लॉरेंस जेल में पुलिस कस्टडी में है, इसके बावजूद वह कई राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है. सिद्धू मूसेवाला की हत्या में भी लॉरेंस का नाम प्रमुखता से आया है. माना जा रहा है कि लॉरेंस की नीरज बवाना से दुश्मनी का शिकार मूसेवाला हो गया.

Tags: Gangster, Gangster Lawrence Vishnoi, Sidhu Moose Wala

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