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क्या अंडमान में 'ट्राइबल टूरिज्म' के नियमों में बदलाव के चलते हुई अमेरिकी नागरिक की हत्या?

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Updated: November 27, 2018, 3:23 AM IST
क्या अंडमान में 'ट्राइबल टूरिज्म' के नियमों में बदलाव के चलते हुई अमेरिकी नागरिक की हत्या?
प्रतीकात्मक तस्वीर

साल अगस्त 1981 में, सेंटीनल द्वीप पर एक कार्गो जहाज पहुंचा गया. बताया गया कि द्वीप पर रहने वाले 50 लोग दिखाई दिए और उन्होंने जहाज पर सवार लोगों को धमकाया. इसके बाद हेलिकॉप्टर की मदद से लोगों को बचाया गया.

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अनिरुद्ध घोषाल

अंडमान और निकोबार स्थित उत्तरी सेंटीनल द्वीप पर एक अमेरिकी नागरिक की हत्या के तीन महीने केंद्र सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नियमों में कुछ बदलाव किए थे. मृतक की पहचान 27 वर्षीय जॉन एलन चाऊ के तौर पर हुई है. मिली जानकारी के अनुसार जब वह द्वीप पर पहुंचा तो उस पर तीरों की बौछार हुई जिसमें उसकी मौत हो गई है.

इस साल अगस्त तक उत्तरी सेंटीनल द्वीप पर बाहरी लोगों का जाना मना था. हालांकि अगस्त में सरकार ने संघ शासित इलाकों में इस द्वीप सहित 28 अन्य द्वीपों को 31 दिसम्बर, 2022 तक रिस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट (आरएपी) की सूची से बाहर कर दिया था. आरएपी को हटाने का मतलब हुआ कि विदेशी नागरिक सरकार की अनुमति के बिना इन द्वीपों पर जा सकेंगे. हालांकि यह अफगानिस्तान, चीन और पाकिस्तान के नागिरकों पर लागू नहीं होता.

एक अधिकारी ने उस समय समझाया था, 'समुद्री उद्यान और संघ शासित प्रदेश सहित प्राकृतिक और समुद्री संसाधनों के संरक्षण को सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है.यही कारण है कि पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन किया जाना चाहिए.'

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हालांकि, इस कदम से विवाद बढ़ गया था. एक्टिविस्ट्स और पत्रकारों ने इसका विरोध किया था. अंडमान क्रॉनिकल के एडिटर डेनिस गिल्स ने कहा, सरकार ने उत्तरी सेंटीनल द्वीप को पर्यटन के लिए खोलने का फैसला क्यों किया? एक बार जब सरकार इसकी घोषणा करती है कि RAP हटा लिया गया है और यह पर्यटन के लिए खुला है, तो विश्व में इसका क्या संदेश जाएगा?'

गिल्स ने आगे कहा, यह अमेरिकी नागरिक संभवतः यह जानता रहा होगा कि RAP हटा लिया गया इसलिए वह वहां गया.  RAP हटाने के फैसले का शोधकर्ताओं और एक्टिविस्ट्स ने विरोध किया था. उन्होंने इस कदम को जल्दीबाजी वाला बताया था.
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गिल्स ने कहा, 'सरकार ने हस्तक्षेप की अपनी नीति को उलट दिया है. यह जनजातियां अलग रहना चाहती हैं.तो भारत सरकार ने यह निर्णय क्यों लिया? इसका मतलब क्या यह नहीं है कि यह 'जनजातीय पर्यटन' की वकालत करने की कोशिश कर रहा है?'

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साल अगस्त 1981 में, द्वीप पर एक कार्गो जहाज पहुंचा गया. बताया गया कि द्वीप पर रहने वाले 50 लोग दिखाई दिए और उन्होंने जहाज पर सवार लोगों को धमकाया. इसके बाद हेलिकॉप्टर की मदद से लोगों को बचाया गया.

पोर्ट ब्लेयर से News18 से बात करते हुए, दक्षिण अंडमान के डिप्टी कमिश्नर उदित प्रकाश राय ने कहा, 'हमें उत्तरी सेंटीनल द्वीप में एक विदेशी निवासी के शव के बारे में जानकारी मिली है. मामले की जांच की जा रही है. स्थानीय पुलिस शव को हासिल करने का प्रयास कर रही है.'

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First published: November 21, 2018, 11:20 PM IST
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