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पश्चिम बंगाल के राज्‍यपाल जगदीप धनकड़ और मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी की लड़ाई से सांसत में नौकरशाह

News18Hindi
Updated: October 23, 2019, 12:55 PM IST
पश्चिम बंगाल के राज्‍यपाल जगदीप धनकड़ और मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी की लड़ाई से सांसत में नौकरशाह
तीन महीने पश्चिम बंगाल के राज्‍यपाल नियुक्‍त किए गए जगदीप धनकड़ और ममता बनर्जी सरकार के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.

पश्चिम बंगाल सरकार (West Bengal Government) और राज्‍यपाल (Governor) के बीच विवाद (Rift) तब शुरू हुआ, जब 19 सितंबर को जगदीप धनकड़ (Jagdeep Dhankar) केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो (Babul Supriyo) को विरोध कर रहे छात्रों से बचाने के लिए जाधवपुर युनिवर्सिटी (Jadavpur University) पहुंच गए थे. राज्‍यपाल और मुख्‍यमंत्री के बीच छिड़ी इस लड़ाई में प्रशासनिक अधिकारियों (Administrative Officials) को समझ नहीं आ रहा है कि वे क्‍या करें.

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  • Last Updated: October 23, 2019, 12:55 PM IST
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सौगत मुखोपाध्‍याय

कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal) में नवनियुक्‍त राज्‍यपाल जगदीप धनकड़ (Governor Jagdeep Dhankar) और मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) के बीच कुछ समय से छिड़ी लड़ाई के कारण राज्‍य के नौकरशाह (Bureaucrats) सांसत में हैं. प्रशासनिक अधिकारियों को समझ नहीं आ रहा है कि वे क्‍या करें. दोनों के विवाद की वजह से राज्‍य के वरिष्‍ठ अधिकारी बशीरहाट के धमकली में मंगलवार को हुई प्रशासनिक बैठक में शामिल नहीं हुए. इससे गुस्‍साए राज्‍यपाल धनकड़ ने कहा कि अधिकारियों का बैठक में शामिल नहीं होना असंवैधानिक है. ये सेंसरशिप (Censorship) की कोशिश माना जाएगा. वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्‍ठ नेता धनकड़ पर पहले ही पक्षपात का आरोप लगा चुके हैं. टीएमसी का कहना है कि धनकड़ एकतरफा बयानबाजी करने के साथ ही अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर के मामलों में हस्‍तक्षेप कर रहे हैं.

धनकड़ ने कहा - असहमति जताने का बेहतर तरीका ढूंढिये
राज्‍यपाल धनकड़ ने टीएमसी नेताओं (TMC Leadership) के आरोपों से आहत होकर हाल में ट्वीट किया था, 'अपने विचारों को जाहिर करने की आजादी हमारे संविधान का सबसे खूबसूरत तोहफा है. इसके प्रति किसी भी तरह की असहिष्‍णुता (Intolerance) लोकतंत्र (Democracy) के लिए खतरनाक है. किसी भी व्‍यक्ति के विचारों से असहमति जताने का बेहतर तरीका ढूंढिये. सोचे-समझे तरीके से असहिष्‍णुता का प्रदर्शन चिंताजनक है.' पश्चिम बंगाल सरकार (West Bengal Government) और राज्‍यपाल के बीच विवाद तब शुरू हुआ, जब 19 सितंबर को जगदीप धनकड़ विरोध कर रहे छात्रों से केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो (Babul Supriyo) को बचाने के लिए जाधवपुर युनिवर्सिटी (Jadavpur University) पहुंच गए थे. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्‍ता और राजस्‍थान से पूर्व सांसद धनकड़ 2003 में बीजेपी में शामिल हुए थे.

टीएमसी ने कहा - मना करने के बाद भी जेयू गए धनकड़
सुप्रियो को बचाने के लिए पहुंचे राज्‍यपाल धनकड़ करीब डेढ़ घंटे तक जाधवपुर यूनिवर्सिटी में फंसे रहे. कोलकाता पुलिस (Kolkata Police) को धनकड़ और सुप्रियो को कैंपस से सुरक्षित निकालने के लिए काफी मशक्‍कत करनी पड़ी थी. इसके बाद कथित तौर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) कार्यकर्ताओं ने कैंपस में तोड़फोड़ की. तृणमूल कांग्रेस नेता और राज्‍य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी (Partha Chaterjee) ने धनकड़ के इस कदम को दुर्भाग्‍यपूर्ण बताया. उन्‍होंने बताया कि मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्‍यपाल को यूनिवर्सिटी जाने से मना किया था. उन्‍होंने कैंपस में हालात पर नियंत्रण के लिए कुछ समय मांगा था. बावजूद इसके वह वहां गए. यह सीएम का अपमान है. इस पर धनकड़ ने कहा था कि उनके पास सुप्रियो को बचाने जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्‍प नहीं था, क्‍योंकि छात्रों ने केंद्रीय मंत्री के साथ हाथापाई शुरू कर थी. वहां का माहौल लगातार बिगड़ता जा रहा था.

राज्‍यपाल धनकर 24 सितंबर को पहली बार उत्‍तरी बंगाल के सिलीगुड़ी गए, जहां हुई प्रशासनिक बैठक में जिलाधिकारी, जनप्रतिनिधि और टीएमसी सांसदों-विधायकों के शामिल नहीं होने पर विवाद बढ़ा.

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सिलीगुड़ी की बैठक में अफसरों के नहीं पहुंचने पर विवाद
इस घटना को एक सप्‍ताह भी नहीं बीता था और धनकड़ व बनर्जी के बीच फिर विवाद छिड़ गया. राज्‍यपाल धनकर 24 सितंबर को पहली बार उत्‍तरी बंगाल के सिलीगुड़ी (Siliguri) गए. ज्‍यादातर स्‍थानीय दलों ने सिलीगुड़ी की बैठक के लिए राजभवन की ओर से मिले न्‍योते पर सकारात्‍मक प्रतिक्रिया दी. वहीं, दार्जिलिंग जिला प्रशासन, जन प्रतिनिधि, स्‍थानीय तृणमूल सांसद और विधायकों ने बैठक में शिरकत नहीं की. इससे नाराज राज्‍यपाल धनकड़ ने कहा था, 'मैं राज्‍य का संवैधानिक मुखिया हूं. मुझे थोड़ी इज्‍जत मिलनी चाहिए. मुझे जगदीप धनकड़ के लिए नहीं बल्कि राज्‍यपाल के लिए चाहिए. अगर माहौल थोड़ा अलग होता तो मुझे सिलीगुड़ी में ज्‍यादार खुशी मिलती.' हालांकि, राज्‍यपाल ने 15 अक्‍टूबर को तब सबसे तीखी प्रतिक्रिया दी जब राज्‍य सरकार के दुर्गा पूजा मूर्ति विसर्जन कार्यक्रम में मीडिया ने पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया.

मूर्ति विसर्जन कार्यक्रम में धनकड़ को किया नजरअंदाज
राज्‍यपाल धनकड़ ने आरोप लगाया कि मीडिया ने उन्‍हें जानबूझकर नजरअंदाज किया. कार्यक्रम में सभी कैमरे एक सरकारी एजेंसी (Government Agency) ने लगाए थे, जिसने सभी निजी चैनलों को फुटेज उपलब्‍ध कराए थे. धनकड़ ने आरोप लगाया कि उन्‍हें और उनकी पत्‍नी को ऐसी जगह बैठाया गया, जहां कोई कैमरा नहीं था. इससे अपमानित महसूस कर रहे धनकड़ ने कहा कि यह आपातकाल (Emergency) की स्थिति है. इस पर बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के चीफ व्हिप तपस रॉय (Tapas Roy) ने तुरंत पलटवार किया कि धनकड़ पब्लिसिटी के भूखे हैं. वहीं, धनकड़ तीन महीने पहले राज्‍यपाल बनने के बाद से बंगाल की कानून-व्‍यवस्‍था पर बार-बार सवाल उठा रहे हैं. उन्‍होंने जाधपुर यूनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शन के साथ ही मुर्शिदाबाद में तिहरे हत्‍याकांड को लेकर राज्‍य प्रशासन की तीखी आलोचना की थी. उन्‍होंने आरोप लगाया था कि मुर्शिदाबाद की घटना सियासी हत्‍याकांड है.

धनकड़ की चुप्‍पी पर सवाल उठा रही है तृणमूल कांग्रेस
तृणमूल कांग्रेस ने जाधवपुर यूनिवर्सिटी में एबीवीपी कार्यकर्ताओं की तोड़फोड़ पर राज्‍यपाल धनकड़ की चुप्‍पी पर सवाल उठाए. टीएमसी राज्‍यपाल को केंद्र की ओर से जेड श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराने पर भी सवाल उठाती रही है. साथ उनकी सुरक्षा का प्रभार कोलकाता पुलिस के बजाय सीआरपीएफ को देना को लेकर भी विवाद है. इस पूरे विवाद के बीच उत्‍तरी और दक्षिणी 24 परगना में असफल प्रशासनिक बैठक राजभवन और राज्‍य सचिवालय के बीच दरार को बढ़ाने का काम करेगी. इससे राज्‍य सरकार के कामकाज पर भी असर पड़ सकता है. यही नहीं इस विवाद के कारण राज्‍य और केंद्र के बीच संबंधों पर भी असर पड़ सकता है.

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First published: October 23, 2019, 12:22 PM IST
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