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कोरोना वैक्सीन के मामले में कैसे भारत ने पूरी बाजी पलट दी, SII का है इसमें बड़ा रोल

कुछ महीने पहले तक देश वैक्सीन की कमी से जूझ रहा था. (सांकेतिक तस्वीर)

कुछ महीने पहले तक देश वैक्सीन की कमी से जूझ रहा था. (सांकेतिक तस्वीर)

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि वो दिसंबर तक लगभग सभी वयस्कों के वैक्सीनेशन (All Adults Covid Vaccination) को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं. शायद यही वजह है कि सरकार अब वैक्सीन निर्यात दोबारा खोलने पर विचार कर रही है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. केवल कुछ महीने पहले तक भारत वैक्सीन की कमी (Covid Vaccine Shortage) से जूझ रहा था. स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को सोशल मीडिया पर जबरदस्त आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था. बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया और फिर मनसुख मंडाविया की नियुक्ति हुई. मंडाविया के नजदीकी लोगों का कहना है कि वो लगभग हर दिन वैक्सीन उत्पादकों से बातचीत करते हैं और उनकी समस्याएं सुलझाने का प्रयास करते हैं.

    सरकारी अधिकारियों का कहना है कि वो दिसंबर तक लगभग सभी वयस्कों के वैक्सीनेशन को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं. शायद यही वजह है कि सरकार अब वैक्सीन निर्यात दोबारा खोलने पर विचार कर रही है. माना जा रहा है कि अक्टूबर महीने से वैक्सीन निर्यात की शुरुआत की जा सकती है. अप्रैल महीने में दूसरी प्रचंड लहर के प्रकोप के बाद वैक्सीन निर्यात बंद कर दिया गया था. इसके बाद से लगातार भारत अपनी जरूरतों पर ही ध्यान दे रहा है.

    सरकार ये वैक्सीन सप्लाई कोवैक्स फैसिलिटी के अंतर्गत करेगी. कोवैक्स को वैक्सीन अलायंस संस्था गावी स्पॉन्सर करती है. गावी के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनीसेफ और सीईपीआई भी इसके स्पॉन्सर्स हैं.

    भारत द्वारा वैक्सीन निर्यात के विचार पर गावी के प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा- ‘इसका भारत और दुनियाभर में प्रतिरोधक क्षमता विस्तार पर सकारात्मक प्रभाव हो सकता है. इस वक्त हमारी प्राथमिकता है कि भारत सरकार और सीरम इंस्टिट्यूट के साथ मिलकर वैक्सीन सप्लाई पर इसके सकारात्मक प्रभाव को समझा जाए.’

    सीरम इंस्टिट्यूट का वैक्सीन डोज प्रोडक्शन
    दरअसल वैक्सीन सप्लाई की बढ़ी हुई संख्या के लिए मुख्य रूप से सीरम इंस्टिट्यूट को धन्यवाद कहा जाना चाहिए. ये कंपनी सरकार के सर्वाधिक आशावादी प्रोजेक्शन से भी ज्यादा वैक्सीन डोज की सप्लाई कर रही है. नाम न बताने की शर्त पर एक सरकारी सूत्र ने कहा कि सीरम इंस्टिट्यूट इस महीने केंद्र सरकार को 20 करोड़ कोविशील्ड डोज की सप्लाई करेगा. इससे पहले बीते महीने में 15 करोड़ डोज की सप्लाई की गई थी.

    दिसंबर तक 90 करोड़ डोज का उत्पादन करेगा सीरम इंस्टिट्यूट!
    मामले की जानकारी रखने वाले दो अन्य सूत्रों का कहना है कि सरकार ने मई महीने में कहा था कि अगस्त से दिसंबर महीने के बीच कोविशील्ड की 75 करोड़ सप्लाई हो सकती है. लेकिन माना जा रहा है कि वास्तविक उत्पादन 90 करोड़ डोज का हो सकता है. हालांकि सीरम इंस्टिट्यूट और स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे लेकर अब तक कोई जवाब नहीं दिया है. वहीं भारत की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन के उत्पादक भारत बायोटेक का कहना है कि इस साल के आखिरी तक हर महीने 10 करोड़ डोज का उत्पादन होने लगेगा.

    दरअसल बीते सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है, ‘वैक्सीन मैत्री’ के तहत, भारत पूरी दुनिया की मदद करेगा और चौथी तिमाही में कोवैक्स में योगदान देगा.’ उन्होंने कहा, ‘हमें अगले महीने कोरोना-रोधी वैक्सीन की 30 करोड़ से अधिक खुराक मिलने की उम्मीद है. वैक्सीन का उत्पादन बढ़ेगा क्योंकि जैविक ई (Biological E) और अन्य कंपनियां अपने टीके बाजार में ला रही हैं.’

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