भारतीय वायुसेना इस तरह पहुंची AN-32 के मलबे तक, फिर जो हुआ सुनकर भर आएंगी आंखें...

भारतीय वायुसेना ने बताया है कि वायुसेना शहीद वायुसैनिकों के शव लाने का पूरा प्रयास कर रही है. इसे जोरहाट बेस पर सैनिकों के परिजनों को सौंपा जाएगा.

News18Hindi
Updated: June 13, 2019, 10:27 PM IST
भारतीय वायुसेना इस तरह पहुंची AN-32 के मलबे तक, फिर जो हुआ सुनकर भर आएंगी आंखें...
इस हालत में मिला था गायब हुए इंडियन एयरफोर्स के AN-32 एयरक्राफ्ट का मलबा (सैटेलाइट तस्वीर)
News18Hindi
Updated: June 13, 2019, 10:27 PM IST
तीन जून को असम के जोरहाट से मेचुका एडवांस लैंडिंग ग्राउंड जा रहे भारतीय वायुसेना के AN-32 एयरक्राफ्ट ने दिन में करीब साढ़े बारह बजे उड़ान भरी थी. इस एयरक्राफ्ट पर 13 लोग सवार थे. इसमें 8 एयरक्रू के लोग थे जबकि 5 यात्री थे. हालांकि यात्री भी वायुसैनिक ही थे. जब यह एयरक्राफ्ट अपनी मंजिल तक तय समय 12 बजकर 55 मिनट पर नहीं पहुंचा तो इसकी खोज शुरू हुई. इस खोज में भारतीय सेना के साथ, कई सारी सरकारी और नागरिक संस्थाएं, भारतीय वायुसेना आदि ने ईस्टर्न एयर कमांड की देखरेख में खोजी अभियान चलाया गया.

मौसम की परेशानियों के बावजूद जारी रहा ऑपरेशन


भारतीय नौसेना
का P-8i एयरक्राफ्ट भी अगले दिन इस खोज में शामिल हो गया. यहां तक की एयरक्राफ्ट की खोज में ISRO की सहायता भी ली गई. कार्टोसैट और रीसैट नाम के इसरो के दो सैटेलाइट इस दौरान पूरे इलाके की तस्वीरें लेकर धरती पर खोज करने वाली टीमों को भेज रहे थे. हालांकि बहुत घने जंगलों, ऊंची-नीची जमीन और खराब मौसम के चलते इस बड़े इलाके में हवाई खोजी अभियान में बहुत परेशानियां आ रही थीं. तमाम समस्याओं के बावजूद भारतीय एयरफोर्स ने अपने ऑपरेशन रात में भी जारी रखे.

भारतीय एयरफोर्स के हेलिकॉप्टर में सबसे पहले देखा मलबा

अंतत: 11 जून, 2019 को एयरक्राफ्ट का मलबा अरुणाचल प्रदेश के लीपो और टाटो से कुछ दूरी पर करीब 12000 फीट की ऊंचाई पर देखा जा सका. भारतीय एयरफोर्स के एमआई-17 हेलिकॉप्टर ने इस मलबे का पता लगाया था.

गूगल मैप में स्थित वह जगह जहां मिला AN-32 का मलबा


तुरंत ही इस जगह पर दूसरे एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर भेजे गए लेकिन तेज ढलान और घने जंगलों के चलते हेलिकॉप्टर क्रैश की जगह पर उतर नहीं सकते थे. ऐसे में इन हेलिकॉप्टर को क्रैश की जगह से दो किमी दूर लैंड कराया गया. यहां पर हेलिकॉप्टरों और बचाव दल के सदस्यों के लिए बाकायदा एक कैंप बनाया गया था.
Loading...

एक दिन पैदल चलने के बाद मलबे तक पहुंच सके सैनिक
12 जून, 2019 को भारतीय वायुसेना के 9 जवानों मलबे की तरफ बढ़े. इनमें पर्वतारोही भी शामिल थे. इस दौरान आर्मी की स्पेशल फोर्स के चार जवानों को और दो स्थानीय पर्वतारोहियों को कैंप की जगह पर ही रोका गया था. इन लोगों को घायल हालत में पाए गए सैनिकों के इलाज का इंतजाम करना था. वहीं मृत सैनिकों के शवों के लिए भी इन्हें ही प्रबंध करना था.

लेकिन जब एक दिन तक दुर्गम पहाड़ियों को चढ़ते हुए 13 जून, 2019 को बचाव दल के आठ लोग एयरक्राफ्ट के क्रैश होने की जगह पर पहुंचे तो वे बहुत निराश हुए. वहां पहुंचे तो एयरक्राफ्ट पर सवार कोई भी वायुसैनिक जिंदा नहीं बचा था.

ये वायुसैनिक हुए शहीद
जिन वायुसैनिकों की इस दौरान मौत हुई, उसमें विंग कमांडर जीएम चार्ल्स, स्कवॉड्रन लीडर एच विनोद, फ्लाइट लेफ्टिनेंट एमके गर्ग, वॉरन्ट ऑफिसर केके मिश्रा, सार्जेंट अनूप कुमार, कॉरपोरल शेरिन, लीडिंग एयरक्राफ्टमैन एसके सिंह, लीडिंग एयरक्राफ्टमैन पंकज, एनसी (ई) पुताली और एनसी (ई) राजेश कुमार शामिल थे.

AN-32 एयरक्राफ्ट के क्रैश के दौरान इसपर सवार सभी 13 वायुसैनिकों की मौत हो गई


जोरहाट बेस में परिजनों को सौंपे जाएंगे शव
भारतीय वायुसेना ने कहा है कि वह अपने उन सभी वीर वायुसैनिकों को सलाम करती है, जिन्होंने देश की रक्षा में अपना कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाई. भारतीय वायुसेना मृतकों के शवों को लाने के सभी प्रयासों में लगी हुई है. जिस प्रक्रिया के तहत वायुसेना के लोग क्रैश की जगह पर पहुंचे, वैसे ही शवों को लेकर आया जा रहा है. इसमें वक्त लगना तय है.

वायुसेना का कहना है कि मृतकों के शवों को उनके परिवारों तक पहुंचाने के लिए वायुसेना पूरा प्रयास करेगी. जोरहाट के बेस पर इन शवों को वायुसैनिकों के परिवारों को सौंपा जाएगा. इसके अलावा इस मामले में क्रैश की वजहों की जांच के लिए एक कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का भी गठन कर दिया गया है.

यह भी पढ़ें: भारत ने खरीदे थे 100 प्लस AN-32, अपग्रेड नहीं हो सके विमान!

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...