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Opinion: जेल में बंद लालू प्रसाद यादव ने NDA को कैसे कर रखा है बेचैन

जेल में बंद हैं लालू प्रसाद यादव. (File Pic)
जेल में बंद हैं लालू प्रसाद यादव. (File Pic)

चारा घोटाला केस के एक मामले में न्यायिक हिरासत में रहने वाले लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) ने एनडीए से सत्ता छीनने की उम्मीद नहीं खोई थी

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 29, 2020, 10:09 AM IST
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विजय देव झा
नई दिल्‍ली.
चारा घोटाले (Fodder Scam) के एक मामले में जेल में बंद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad yadav) के समर्थकों को शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) के जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली एकल पीठ के उस निर्णय से निराशा झेलनी पड़ी, जिसमें उन्‍होंने लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर 11 दिसंबर तक सुनवाई टाल दी.

लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले के अब तक 4 मामलों में दोषी करार दिए जा चुके हैं. वह दिसंबर 2017 से ही रांची में न्यायिक हिरासत में हैं. उन्‍हें तीन मामलों में जमानत मिली थी, लेकिन दुमका कोषागार मामले में सीबीआई अदालत ने उन्‍हें कड़ी सजा सुनाई. कोर्ट ने उन्‍हें भारी जुर्माने के साथ 14 साल की कैद की सजा का ऐलान किया था. सीबीआई ने अब इस आधार पर उनकी जमानत का विरोध किया है कि लालू ने जेल में सजा की अवधि का आधा समय भी अभी नहीं गुजारा है.

आरजेडी के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद का महत्‍व बताते हुए कहा, 'लालू प्रसाद यादव हमारे अभिभावक हैं. न केवल हमारी पार्टी बल्कि बिहार के लोगों को इस समय उनकी जरूरत है क्‍योंकि बिहार में एनडीए ने अनैतिक रूप से बहुमत हासिल किया है.' लालू प्रसाद यादव के लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक रूप से चीजें बदल गई हैं. बिहार विधानसभा चुनाव तेजस्वी के नेतृत्व वाले आरजेडी-कांग्रेस-लेफ्ट के महागठबंधन के लिए एक करीबी जीत का खेल था. हालांकि उनके बेटे तेजस्‍वी को चुनाव और मुख्‍यमंत्री पद दोनों में ही एनडीए व नीतीश कुमार के आगे हार का सामना करना पड़ा.
रांची के केली बंगले में न्यायिक हिरासत में रखे गए लालू प्रसाद यादव ने एनडीए से सत्ता छीनने की उम्मीद नहीं खोई थी और उन्होंने एनडीए गठबंधन के सहयोगियों में से हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के जीतनराम मांझी और विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश साहनी को साथ जोड़ने की कोशिश की थी. उन्होंने एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से भी तेजस्वी का समर्थन करने की अपील की थी.



बीजेपी नेता सुशील मोदी की ओर से हाल ही में एक फोन कॉल का ऑडियो जारी किया गया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि कि यह ऑडियो लालू प्रसाद यादव की ओर से बीजेपी विधायक ललन पासवान की किए गए फोन कॉल का है. इसके बाद लालू प्रसाद यादव एक और ताजा विवाद में फंस गए. इस ऑडियो टेप में कथित रूप से लालू प्रसाद यादव को बीजेपी विधायक ललन पासवान को कोरोना संक्रमण का हवाला देते हुए बिहार विधानसभा स्पीकर के चुनाव के मतदान से दूर रहने के लिए कहते सुना गया था. उन्होंने पासवान को मंत्रि पद का आश्वासन भी दिया.

पासवान ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत पटना में विजिलेंस ब्‍यूरो पुलिस स्टेशन में लालू के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई है. झारखंड के वरिष्ठ बीजेपी नेता अनुरंजन अशोक सिंह ने जेल मैनुअल से हटकर लालू प्रसाद को दी गई सुविधाओं की जांच की मांग करते हुए झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया है और सवाल उठाया है कि लालू प्रसाद को मोबाइल फोन का उपयोग करने की अनुमति कैसे दी गई.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में झारखंड में झामुमो-कांग्रेस-आरजेडी सरकार ने दबाव में लालू प्रसाद को केली बंगले से रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरआईएमएस) के वार्ड में ट्रांसफर कर दिया गया. हालांकि एनडीए को यह चिंता सता रही है कि लालू को दोषी ठहराकर जेल भेजे जाने का मतलब यह नहीं है कि उनके पंख को काट दिए गए या वह चुनावी मंच से बाहर हो गए. बीजेपी और जेडीयू के नेताओं को यह चिंता सता रही है कि लालू प्रसाद यादव एनडीए सरकार के लिए परेशानी खड़ी करते रह सकते हैं.

झारखंड के बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल नाथ शाहदेव ने चिंतित स्‍वर में कहा, 'हमें नहीं पता कि लालू प्रसाद ने अब तक कितने विधायकों से बात की है, लेकिन ऐसा लगता है कि उन्‍होंने कई विधायकों से बात की होगी. वह बिहार में हार मानने को तैयार नहीं हैं. वह अपने बेटे (तेजस्‍वी यादव) को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं. क्या आपने सुना है कि वह सरकार को गिराने के लिए किस तरह से बात करते हैं? वह एक दोषी हैं, लेकिन झारखंड सरकार उन्‍हें एक अतिथि के रूप में मान रही है.'

बिहार के एक अन्य बीजेपी नेता ने एनडीए को लालू पर नजर रखने के लिए सतर्क किया है. तेजस्वी ने भले ही बिहार के उभरते हुए चेहरे के रूप में और महागठबंधन का सफलतापूर्वक नेतृत्व करने के लिए प्रशंसा अर्जित की हो, लेकिन न तो तेजस्वी और न ही उनकी पार्टी या कहें कि बिहार की राजनीति लालू की छवि से उभर पा रही है.

जदयू के प्रवक्ता अजय आलोक कहते हैं, 'लालू प्रसाद को अपना राजनीतिक एजेंडा चलाने के लिए हेमंत सोरेन सरकार ने बेजा सहूलियतें दे रखी है. एक रणनीति के तहत उन्हें रिम्स के वार्ड से केली के बंगले में ट्रांसफर कर दिया गया, ताकि वे बिहार चुनाव का प्रबंधन कर सकें. असंख्‍य लोग लालू से मिल सकते थे और उन्हें फोन करने की भी अनुमति थी. वह कभी जेल में नहीं थे और हेमंत सोरेन सरकार के आतिथ्य का लगातार आनंद लेते रहे.'

यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि आरजेडी तथा महागठबंधन के वरिष्ठ नेता तेजस्वी यादव लालू से मार्गदर्शन लेने के लिए रांची जाते थे. ऐसा एक भी दिन नहीं था जब बिहार और झारखंड के एनडीए नेताओं ने प्रेस कांफ्रेंस करके ये आरोप नहीं लगाए कि रांची में केली का बंगला आरजेडी का मुख्‍यालय बन गया था. आरोप लगाया गया था कि केली के बंगले के बाहर विधानसभा टिकट के लिए बायोडाटा जमा करने के लिए हजारों लोग पहुंचते थे.
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