लाइव टीवी

केरल के ‘मेयर ब्रो’ ने कांटे की टक्कर में जीता वत्तियूरक्कव का विधानसभा उप चुनाव

News18Hindi
Updated: October 24, 2019, 4:30 PM IST
केरल के ‘मेयर ब्रो’ ने कांटे की टक्कर में जीता वत्तियूरक्कव का विधानसभा उप चुनाव
शुरुआत में वीके प्रशांत का जीतना बहुत मुश्किल लग रहा था (फाइल फोटो)

जब उप चुनाव में प्रशांत (VK Prasanth) को उम्मीदवार बनाया गया तो आंकड़े उनके खिलाफ लग रहे थे. यूडीएफ (UDF) और बीजेपी (BJP) को सम्मिलित रूप से यहां महज चार माह पहले हुए आम चुनाव में एक लाख से ज्यादा वोट मिले थे. ऐसा लग रहा था की प्रशांत का जीतना मुश्किल होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 24, 2019, 4:30 PM IST
  • Share this:
चंद्रकांत विश्वनाथ

तिरुवनंतपुरम: ‘मेयर ब्रो’ (mayor bro) के नाम से लोगों में लोकप्रिय वीके प्रशांत (VK Prasanth) ने एक बार फिर अपनी सफलता का झंडा गाड़ दिया है. उन्होंने यूडीएफ़ (UDF) के के. मोहन कुमार आर एनडीए (NDA) के उम्मीदवार एस सुरेश को पराजित कर वत्तीयूरक्कव विधानसभा सीट (Vattiyoorkkav Assembly Seat) से 14,438 मतों से उप चुनाव जीत गए हैं. यह सीट दक्षिणपंथ का गढ़ माना जाता है.

प्रशांत (VK Prasanth) को इस चुनाव में 54,782 मत मिले. अपनी जीत के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनको अपनी जीत के बारे में कोई संदेह नहीं था. उन्होंने कहा कि लोगों को गलत साबित करने की अब उन्हें आदत सी लग गई है.

मात्र 34 साल के हैं वीके प्रशांत

प्रशांत की उम्र महज 34 साल है और 2015 में वे केरल (Kerala) के सबसे बड़े कारपोरेशन के सबसे कम उम्र में मेयर बने. उसी दौरान जब राज्य के उत्तरी जिलों में भारी बाढ़ आई तो उन्होंने 80 ट्रक से ज्यादा राहत सामग्री लोगों तक पहुंचाई और थेक्कन-वदक्कन (दक्षिण-उत्तर) मामले को लेकर पर उन दिनों सोशल मीडिया में चल रहे विवाद पर विराम लगा दिया.

इस उप चुनाव में सीपीएम (CPM) के नेतृत्व में एलडीएफ की जीत की संभावना शुरू से ही नहीं नजर आ रही थी. यह सीट राज्य के विधानसभा सीटों में बहुत ही महत्त्वपूर्ण सीट मानी जाती है.

बेहद महत्वपूर्ण है वीके प्रशांत का क्षेत्र
Loading...

इस क्षेत्र में अमूमन सभी बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यालय हैं, जैसे, विधानसभा, मुख्यमंत्री, राज्यपाल एवं कई मंत्रियों के सरकारी आवास और तीन बड़ी राजनीतिक पार्टियों – सीपीएम, कांग्रेस और बीजेपी के मुख्यालय यहां हैं.

यद्यपि सीपीएम (CPM) तिरुवनंतपुरम कारपोरेशन में सत्ता में है, पिछले दो चुनावों – 2016 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनावों में उसे यहां भारी हार का सामना करना पड़ा और वह तीसरे स्थान पर रही.

शुरुआत में वीके प्रशांत का जीतना लग रहा था मुश्किल
जब उप चुनाव में प्रशांत को उम्मीदवार बनाया गया तो आंकड़े उनके खिलाफ लग रहे थे. यूडीएफ (UDF) और बीजेपी को सम्मिलित रूप से यहां महज चार माह पहले हुए आम चुनाव में एक लाख से ज्यादा वोट मिले थे. ऐसा लग रहा था की प्रशांत का जीतना मुश्किल होगा.

फिर, इस विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़े समुदाय के रूप में नायर सर्विस सोसाइटी ने राज्य में पांच सीटों के लिए हुए उप चुनावों में एलडीएफ (LDF) के खिलाफ स्टैंड लिया. बीजेपी ने अपने जिला प्रमुख को इस क्षेत्र से चुनाव लड़ाया और पार्टी के कार्यकर्ता इससे खुश नहीं थे क्योंकि वे जानते थे कि इससे सीपीएम के खिलाफ पड़ने वाले वोट का लाभ कांग्रेस उम्मीदवार को मिलेगा.

बाढ़ के समय प्रशांत ने किया था जबरदस्त काम
हालांकि मेयर ब्रो की छवि एक युवा और उत्साही नेता की है और एलडीएफ ने इस चुनाव में बहुत ही सलीके से चुनाव प्रचार किया और इससे स्थिति बदल गई.

बाढ़ राहत (Flood Relief) की एक बार और चर्चा करते हुए बता दें, कि उन दिनों लोगों को लग रहा था कि प्रशासन 2018 की तुलना में इस बार लोगों को राहत पहुंचाने में कुछ सुस्त दिख रही है क्योंकि इस बार उत्तरी केरल इस बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित है और दक्षिण और मध्य केरल को उनकी कोई चिंता नहीं है. इसके बाद प्रशांत ने वोलंटियर्स और ट्रक ड्राईवरों को निगम कार्यालय में राहत सामग्री जमा करने वाले केन्द्रों पर भेजा और कई दिन तक इन लोगों ने बिना थके दिन-रात काम किया. इस अच्छे काम के बाद वे इन्टरनेट पर सक्रिय लोगों में ‘मेयर ब्रो’ (mayor bro) के नाम से प्रसिद्ध हो गए.

यह भी पढ़ें: Haryana Election Result: तीन खिलाड़ी, तीनों धुरंधर लेकिन जीता सिर्फ एक

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 24, 2019, 4:30 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...