मध्य प्रदेश को कोरोना फ्री करने के लिए सरकार ने बनाया खास प्लान; रेड, येलो और ग्रीन ज़ोन में बांटे जाएंगे गांव

सीएम शिवराज सिंह चौहान (फ़ाइल फोटो)

सीएम शिवराज सिंह चौहान (फ़ाइल फोटो)

Coronavirus: मध्य प्रदेश में अप्रैल के आखिर में हर रोज़ 13 हज़ार से ज्यादा केस सामने आ रहे थे. 10 मई को राज्य में एक्टिव केस की संख्या 1.11 लाख पहुंच गई थी, लेकिन इसके बाद से कोरोना के केस में काफी कमी आई है.

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नई दिल्ली. मध्य प्रदेश के गांव में कोरोना वायरस (Coronavirus) को मात देने के लिए बीजेपी सरकार ने खास रणनीति तैयार की है. इसके तहत एक्टिव केस के आधार पर गांव को तीन अलग-अलग ज़ोन- रेड, येलो और ग्रीन में बांटा जाएगा. सरकार मंगलवार से एक खास अभियान 'किल कोरोना-4' की शुरुआत करने जा रही है. इस अभियान का मकसद है, राज्य को 31 मई तक कोरोना फ्री बनाना.

इस खास कैंपन के तहत सरकार कोरोना को मात देने के लिए किस तरह के कदम उठाने जा रही है, इसकी कॉपी न्यूज़ 18 के पास है. 24 मई को राज्य के सभी जिला अधिकारी को एक चिट्ठी लिखी गई. इसमें कहा गया है कि किसी भी घर में अगर कोरोना के एक-दो केस मिले हैं तो वहां दो टीम भेजी जाए. जिन पंचायत में 1-4 एक्टिव केस हैं उसे येलो ज़ोन में रखने का आदेश दिया गया है. इसके अलावा जिन पंचायतों में 5 से ज्यादा एक्टिव केस हैं उन्हें रेड ज़ोन में रखा जाएगा. सरकार चाहती है कि ऐसी पंचायत को तुरंत ग्रीन ज़ोन में लाया जाए.

सीएम शिवराज सिंह चौहान का प्लान

राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है, 'किल कोरोना -4' अभियान को 31 मई तक पूरे राज्य को कोरोना मुक्त करने के मुख्यमंत्री के संकल्प के अनुसार तैयार किया गया है. सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि कोरोना को नियंत्रित करने के बाद धीरे-धीरे अनलॉक की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. बता दें कि मध्य प्रदेश में इन दिनों हर रोज़ करीब 3 हज़ार कोरोना केस सामने आ रहे हैं, जबकि राज्य में 53 हज़ार से ज्यादा एक्टिव केस हैं.

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इस तरह टीमें करेंगी काम



सरकार की तरफ से जारी चिट्ठी में कहा गया है कि हर गांव में दो टीमें भेजी जाएंगी. पहली टीम में आशाकर्मी और लोकल हेल्थ सुपरवाइजर होंगे. ये टीम ऐसे लोगों की जांच करेगी, जिनमें कोरोना के लक्षण हैं. पॉजिटिव आने वाले लोगों को दवाइयां दी जाएंगी. दूसरी टीम में राज्य सरकार के एक स्वास्थ्य अधिकारी सहित दो लोग शामिल हैं. संदिग्ध कोविड रोगियों के घर का फिर से दौरा करेगी, जिनकी सूची पहली टीम द्वारा साझा की जाएगी, और जांच की जाएगी कि क्या उन्हें दवाएं मिली हैं. बाद में इन्हें फीवर क्लीनिक भेजने के लिए निर्णय लिया जाएगा. पूरे मध्य प्रदेश में ऐसे 1715 फीवर क्लीनिक काम कर रहे हैं. राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आदेश में कहा गया है, 'जब तक ऐसे रोगियों के पॉजिटिव होने की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक उन्हें घर पर ही क्वारंटाइन किया जाएगा या फिर उन्हें गांव के पंचायत भवन में रखा जाएगा.'



मध्य प्रदेश में कोरोना के मौजूदा हालात

मध्य प्रदेश में अप्रैल के आखिर में हर रोज़ 13 हज़ार से ज्यादा केस सामने आ रहे थे. 10 मई को राज्य में एक्टिव केस की संख्या 1.11 लाख पहुंच गई थी. लेकिन इसके बाद से कोरोना के केस में काफी कमी आई है. 24 मई को सिर्फ 2936 केस सामने आए. जबकि एक्टिव केस की संख्या इस समय करीब 53 हज़ार है. इंदौर में अब भी 9850 एक्टिव केस हैं. दूसरे नंबर पर भोपाल (8677) है. जबकि ग्वालियर में एक्टिव केस की संख्या 4066 है. मध्य प्रदश में इन दिनों हर रोज़ 76 हज़ार कोरोना के टेस्ट हो रहे हैं. जबकि पिछले 15 दिनों में पॉजिटिविटी रेट 4 फीसदी से नीचे पहुंच गई है.

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