मुंबई नॉर्थ सेंट्रल सीट: किस करवट बैठेगा मराठी और मुस्लिम वोटों का गणित?

भाजपा की तरफ से पूर्व दिग्गज नेता प्रमोद महाजन की बेटी पूनम लोकसभा चुनाव मैदान में हैं तो कांग्रेस की तरफ पूर्व केंद्रीय मंत्री सुनील दत्त की बेटी प्रिया दत्त. इसके बावजूद इस सीट की आबादी का गणित महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

News18Hindi
Updated: April 27, 2019, 6:51 PM IST
मुंबई नॉर्थ सेंट्रल सीट: किस करवट बैठेगा मराठी और मुस्लिम वोटों का गणित?
पूनम महाजन और प्रिया दत्त
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Updated: April 27, 2019, 6:51 PM IST
मुंबई उत्तर मध्य लोकसभा सीट पर भाजपा के टिकट पर वर्तमान सांसद पूनम महाजन उम्मीदवार हैं और कांग्रेस ने एक बार फिर प्रिया दत्त को टिकट दिया है, जो 2014 के चुनाव में महाजन के हाथों हार गई थीं. वहीं, इस सीट पर मराठी और मुस्लिम वोटों का गणित दिलचस्प हो सकता है.

भाजपा के पूर्व नेता स्वर्गीय प्रमोद महाजन की बेटी पूनम पिछले पांच सालों में संसदीय क्षेत्र में किए गए कामों को आधार बनाकर वोट मांग रही हैं जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री सुनील दत्त की बेटी प्रिया दत्त 'लोकतंत्र को बचाने' का मुद्दा लेकर वोटरों के बीच जा रही हैं. लेकिन, इस सीट पर आबादी के आंकड़े कहानी को बयान करते हैं.


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जनसांख्यिकी के मुताबिक मुंबई नार्थ सेंट्रल सीट पर सबसे ज़्यादा आबादी मराठीभाषियों की है. उसके बाद इस क्षेत्र में मुस्लिमों की आबादी है और फिर उत्तर भारतीयों, गुजरातियों, मारवाड़ियों, ईसाइयों और दक्षिण भारतीयों की आबादी है. ये भी याद रखने की बात है कि पिछले लोकसभा चुनाव में पूनम महाजन ने प्रिया दत्त को 1.86 लाख वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी. महाजन को कुल 4,78,535 वोट मिले थे जबकि दत्त को 2,91,764.

जो वोट बंटे थे, इस बार कांग्रेस को मिलेंगे?
विले पार्ले, चांदीवली, कुर्ला, कालीना, बांद्रा पूर्व और पश्चिम के इलाकों में फैले इस संसदीय क्षेत्र में करीब 18 लाख वोटर हैं. एक कांग्रेस नेता का कहना है कि 'ये देखना दिलचस्प होगा कि पिछली बार मोदी लहर के कारण बंट गए दलित, मुस्लिम और मध्यम वर्ग के वोट क्या इस बार कांग्रेस के खाते में वापस आएंगे'.

कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दत्त पिछले चुनाव में हार के बाद एक तरह से संसदीय क्षेत्र से गायब ही हो गईं और वोटरों के साथ ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भी कट गईं, ऐसी शिकायतें उनके खिलाफ हैं. लेकिन विश्लेषक ये भी मान रहे हैं कि अगर दत्त ने वोटरों का गणित ठीक तरह से समझ लिया तो कांग्रेस पार्टी के लिए मज़बूत रही इस सीट पर वो महाजन को पटखनी दे सकती हैं.
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कांग्रेस प्रत्याशी प्रिया दत्त.


वोटों के बंटवारे पर नज़र डाली जाए तो एक विश्लेषक के अनुसार 'कांग्रेस विले पार्ले और बांद्रा पूर्व के इलाके में कमज़ोर है. 2014 के चुनाव में पूनम महाजन ने विले पार्ले इलाके से ही 70 हज़ार वोटों की लीड ले ली थी. वहीं, बांद्रा पूर्व में कांग्रेस के पास स्थानीय स्तर पर मज़बूत नेता नहीं है'.

इस बार के मुद्दे क्या हैं?
वहीं, इस संसदीय क्षेत्र में आने वाली 6 विधानसभा सीटों में से 5 पर भाजपा का कब्ज़ा है जबकि कांग्रेस के पास सिर्फ चांदीवली की सीट है. इस संसदीय क्षेत्र से 25 पार्षद भाजपा के हैं. दूसरी तरफ, इस बार चुनाव प्रचार के दौरान झुग्गीवासियों के पुनर्वास और पुरानी बर्बाद हो चुकी बिल्डिंगों के विकास के मुद्दे बड़े हैं.

अगर मुंबई के एक कांग्रेस नेता की बात पर यकीन किया जाए तो प्रिया दत्त चुनाव लड़ने के लिए इच्छुक नहीं थीं. इस बात के सबूत के तौर पर कहा जा रहा है कि दत्त ने अब तक संसदीय क्षेत्र में अपना चुनावी दफ्तर तक शुरू नहीं किया है जबकि 29 अप्रैल को यहां मतदान का दिन है.

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भाजपा प्रत्याशी पूनम महाजन.


इस कांग्रेस नेता ने बताया कि जनवरी में दत्त ने कहा था कि वो अपने घर की ज़िम्मेदारियां बढ़ने के कारण चुनाव नहीं लड़ना चाहतीं लेकिन फिर उन्होंने यू टर्न लिया और चुनावी मैदान में कूदने का फैसला किया. दूसरी तरफ, पूनम महाजन ने न्यूज़ एजेंसी को बताया कि संसदीय क्षेत्र के भीतर गहरी पैठ बना ली है और जिस अंदरूनी इलाके को कभी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, वहां अब भाजपा पनप चुकी है.

क्या कहती हैं दोनों खास प्रत्याशी?
महाजन ने अपनी उपलब्धियां बताते हुए कहा कि बांद्रा, कुर्ला और चांदीवली जैसे इलाकों में कुल 1428 टॉयलेट बनवाए गए हैं. वहीं उन्होंने दावा किया कि 20 हज़ार महाड़ा फ्लैट्स का पुनरुद्धार किया गया है. साथ ही, 'मुंबई एयरपोर्ट की ज़मीन से 80 हज़ार परिवारों को ठीक तरह से बसाया गया है'. महाजन ने कहा कि कुर्ला और कालीना की एयरपोर्ट ज़मीन पर रहने वाले झुग्गीवासियों को कहीं और बसाया जाएगा और वाकोला और विले पार्ले के इन लोगों को 65 एकड़ में बनी पु​नर्विकसित भूमि पर बसाया जाएगा'.

वहीं, 2005 के लोकसभा उपचुनाव में मुंबई नॉर्थ वेस्ट सीट से और फिर अपने पिता की मौत के बाद 2009 में मुंबई नॉर्थ सेंट्रल से जीतने वाली प्रिया दत्त का कहना है कि वो उनके लिए लड़ रही हैं, जो सेक्युलरिज़्म और लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं. 'उन सभी को चुनाव में भाग लेना चाहिए जो लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं. मैं अपने ही नहीं, हम सभी के बच्चों के भविष्य के लिए चुनाव में खड़ी हूं'.

कार्यकर्ताओं और वोटरों से कट जाने के सवाल पर दत्त ने कहा कि 'ये सच नहीं है. मैं अपने क्षेत्र के लोगों के लिए नरगिस दत्त फाउंडेशन के ज़रिये हमेशा काम करती रही हूं'. अपनी चुनावी रणनीति के बारे में उन्होंने कहा कि 'मैं जल्द ही लोगों के पास अपनी घोषणाएं लेकर पहुंचूंगी और लोगों के सामने अपना पक्ष रखने के बाद मैं चुनावी परिणाम उनकी बुद्धिमानी पर छोड़ती हूं'.

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First published: April 27, 2019, 6:07 PM IST
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