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आखिर कैसे एक ट्वीट पर अलर्ट हो जाता है विदेश मंत्रालय!

आखिर कैसे एक ट्वीट पर अलर्ट हो जाता है विदेश मंत्रालय!

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (फाइल फोटो)

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (फाइल फोटो)

पहले आइरन कर्टेन के पीछे विदेश मंत्रालय के बाबू यूं काम करते थे जैसे आम आदमी से कोई सरोकार ही ना हो.

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विदेश मंत्रालय एक ऐसा मंत्रालय है जिसके बारे में आम आदमी तो क्या रायसिना हिल पर बैठे दूसरे मंत्रालयों के बड़े बाबुओं का पहुंचना भी एक असंभव सा काम लगता था. पहले आइरन कर्टेन के पीछे विदेश मंत्रालय के बाबू यूं काम करते थे जैसे आम आदमी से कोई सरोकार ही ना हो.

बंद गले का सूट, कांटे छुरी से खाना और यहां तक की अंग्रेजी में बात करना, कुछ ऐसा ही छन के बाहर आता था. दूतावास तो ऐसे काम करते थे जैसे वो देश के लोगों के लिए नहीं बल्कि अपने लिए काम कर रहे हों. लेकिन तीन सालों में ऐसा क्या हुआ कि लोहे की दीवार भी गिर गई तो दूतावास भी अब देश से दूर रह रहे भारतीयों की मदद के लिए किसी भी हद तक आगे आने लगा है.

मोदी सरकार के शपथ लेने के बाद स्थितियां बदली. सुषमा स्वराज पर विदेश मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया. यूपीए के दौर के एस एम कृष्णा का कामकाज सबको याद था. लिहाजा सुषमा ने कायाकल्प में देरी नहीं लगायी. सरकार बनते ही दुनिया भर के दूतावासों में लगे राजदूतों को दिल्ली एक बैठक के लिए तलब किया.

दिल्ली में हुई इस बैठक में सुषमा स्वराज ने सबको आईना दिखाया. सूत्र बताते हैं कि जब घंटे भर के भाषण के बाद सुषमा स्वराज हॉल से बाहर निकलीं तो वहां सन्नाटा पसरा था. सभी दूतावासों के अधिकारी अपनी-अपनी जगहों पर कई मिनटों तक सन्नाटे में बैठे रहे मानों आने वाले दिनों के लिए मंथन कर रहे हों.

विदेश मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि खुद पीएम मोदी ने दुनिया भर से आए भारतीय दूतावासों के अधिकारियों के साथ बैठक में अपना इरादा साफ कर दिया था. सूत्रों के मुताबिक राजदूतों और शीर्ष अधिकारियों के साथ एक बैठक को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मैंने विदेश मंत्रालयों के अधिकारियों से बहुत कुछ सीखा. मैंने आपसे सीखा कि सलीके से कैसे बात करते हैं, कैसे खड़े होते हैं, कैसे खाना खाते हैं. लेकिन मैंने भी आपको एक बात तो सिखा ही दी. पीएम मोदी ने कहा कि मैंने आपको हिंदी बोलना तो सीखा ही दिया. पूरे हॉल में हंसी की लहर दौड़ गयी.

लेकिन संदेश चला गया था. विदेश मंत्रालय को समझ में आ गया था कि अब आइरन कर्टेन से बाहर निकलना ही पड़ेगा और दुनिया भर में भारत के नागरिकों को मजबूत भी करना पड़ेगा ताकि हम एक ताकत के रूप में उभरें, हुआ भी ऐसा ही. कभी मिडिल ईस्ट में फंसा भारतीय बेबस होता था लेकिन अब एक ट्वीट दिल्ली पहुंचा और बचाव का काम चालू हो जाता है.

दुनिया भर में फंसे भारतीयों के लिए सुषमा स्वराज ने ट्विटर पर एक ऐसी हेल्पलाइन खोल दी है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल साबित होगी. दुनिया के किसी भी कोने में फंसे हो, पासपोर्ट खो गया हो, नाइंसाफी हुई हो. एक आम भारतीय नागरिक के लिए रास्ता खुल गया है. अब आपको सेकेंड क्लास सिटिजन बन कर विदेशों में नहीं रहना है, ये सरकार ने साफ कर दिया. अगर आपके साथ दुनिया के किसी भी कोने में गलत हो रहा हो तो सरकार आपकी मदद के लिए आगे आएगी. भारतीय दूतावास अब मदद के लिए खुद ही आगे आने लगा है.

आलम ये है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उनकी टीम खुद 24 घंटे ट्विटर मॉनिटर करती है. किस दूतावास को किस वक्त विदेश मंत्री या फिर उनके कार्यालय से फोन जाएगा इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है लेकिन ये साफ है भई कि अब दूतावास भी 24 घंटे सतर्क रहता है. जाहिर है एक मिसाल तो कायम हुई है जिसको आगे लेकर जाना किसी भी सरकार के लिए आसान साबित नहीं होने वाला.

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Tags: Ministry of External Affairs, Sushma swaraj

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