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शशिकला के फैसले का तमिलनाडु की राजनीति में कितना असर पड़ेगा?

शशिकला ने 3 मार्च को राजनीति से दूर रहने की घोषणा कर सबको चौंका दिया. (फाइल फोटो)

शशिकला ने 3 मार्च को राजनीति से दूर रहने की घोषणा कर सबको चौंका दिया. (फाइल फोटो)

Tamil Nadu Elections: शशिकला ने 3 मार्च को राजनीति से दूर रहने की घोषणा कर सबको चौंका दिया. अपनी घोषणा के साथ ही उन्होंने AIADMK नेताओं को साथ रहकर DMK से मुकाबला करने की नसीहत दी.

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चेन्नई. शशिकला (Sasikala) ने 3 मार्च को औपचारिक रूप से राजनीति से दूर रहने का ऐलान कर दिया है. शशिकला को तमिलनाडु में चिनम्मा ( मौसी) के नाम से जाना जाता है. इनको यह नाम तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय जयललिता (J Jaylalitha) की दोस्ती के कारण मिला. वहां की जनता जयललिता को अम्मा और शशिकला को चिनम्मा कहकर बुलाती है. इसमें कोई दो राय नहीं कि तमिलनाडु में शशिकला को जो भी सम्मान अथवा पहचान मिली उसका श्रेय सिर्फ और सिर्फ जयललिता को ही जाता है.

हालांकि एक दौर ऐसा भी आया कि जयललिता ने अपनी खास सहेली शशिकला को अपने से दूर रहने के लिए कह दिया. दोनों के बीच सन 2011 में काफी दूरी आ गयी थी. दोनों के रिश्ते इस कदर बिगड़ चुके थे कि जयललिता ने भारी मन से शशिकला और उनके पति एम. नटराजन को 19 दिसंबर 2011 को AIADMK से बाहर कर दिया था. इतना ही नहीं जयललिता ने उस दिन 13 लोगों को पार्टी का बाहर का रास्ता दिखाया था. उनमें अधिकांश लोग शशिकला के बेहद करीबी थे.

हालांकि जयललिता के रुतबे के आगे किसी की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह सार्वजनिक तौर पर उन्हें कुछ कह सकें. जैसा कि कहा जाता है कि वक्त के साथ बिगडे़ रिश्ते भी सुधर जाते हैं, ऐसा ही इन दोनों के साथ भी हुआ. शशिकला ने कुछ ही महीनों में जयललिता से अपने संबंध सुधारने में सफलता हासिल की थी. शशिकला के लिखित माफीनामे के बाद उन्हें 31 मार्च 2012 को पार्टी में वापस ले लिया गया.



तमिलनाडु की राजनीति में रुचि रखने वाले कहते हैं कि जयललिता और शशिकला की पहली मुलाकात उस समय के एक जिला कलेक्टर ने करवायी थी. उस कलेक्टर को जयललिता के पसंदीदा लोगों में गिना जाता था. वहीं उस कलेक्टर से शशिकला के पति नटराजन की मित्रता थी. उस मुलाकात के बाद दोनों किसी न किसी कारण से मिलते रहे और समय के साथ-साथ उनकी दोस्ती भी प्रगाढ़ होती गयी.
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दोनों सुख-दुख के साथी रहे. यही कारण रहा कि जयललिता की मौत से शशिकला को काफी सदमा लगा था. उस समय देश भर के लोग यही मान कर चल रहे थे कि शशिकला को जयललिता का स्थान और सम्मान मिल जाएगा, लेकिन कुछ अनिवार्य कारणों के कारण दोनों ही नहीं मिल सके. उल्टे भ्रष्टाचार के एक मामले में उन्हें जेल जाना पड़ा. शशिकला के जेल से बाहर आते ही लोगों को लगने लगा था कि वह तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभाएंगी. कुछ राजनीतिक दल भी यही मानकर चल रहे थे कि वह आगामी विधानसभा चुनावों में महती भूमिका निभाएंगी.

शशिकला ने 3 मार्च को राजनीति से दूर रहने की घोषणा कर सबको चौंका दिया. अपनी घोषणा के साथ ही उन्होंने AIADMK नेताओं को साथ रहकर DMK से मुकाबला करने की नसीहत दी. वहीं दूसरी ओर उनके इस फैसले को लेकर राजनीति में रुचि रखने वालों के बीच चर्चा शुरू हो गयी है. तमिलनाडु की राजनीति पर नजर रखने वाले राजनीतिक विशलेषकों की मानें तो शशिकला के इस फैसले का वर्तमान राजनीति में कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला है. वहीं विश्लेषक यह भी मानकर चल रहे हैं कि आगामी चुनावों में DMK की जीत होगी. यह तो चुनाव परिणाम ही बतायेंगे कि तमिलनाडु की जनता ने किस पार्टी का साथ दिया.
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