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अक्टूबर में क्यों हो रही है इतनी बारिश? वैज्ञानिकों ने बताई यह वजह

अक्टूबर में क्यों हो रही है इतनी बारिश? वैज्ञानिकों ने बताई यह वजह

 (Photo by Dibyangshu SARKAR / AFP)

(Photo by Dibyangshu SARKAR / AFP)

देश के कई हिस्सों में फिलहाल बहुत बारिश हो रही है. ऐसा नहीं है कि यह महीना मानसून का है, लेकिन फिर भी इतनी बारिश के क्या संकेत हैं और क्लाइमेट चेंज का इसमें कितना हाथ है. हम जानेंगे इस रिपोर्ट में

    नई दिल्ली. आधा अक्टूबर गुजर चुका है, लेकिन बारिश ने अभी भी जाने का मन नहीं बनाया है. देश के कई राज्य जैसे दिल्ली, केरल, मध्यप्रदेश और उत्तराखंड अब तक तर हो रहे हैं. इन राज्यों में पिछले कुछ दिनों में बहुत ज्यादा बारिश हुई, जिसका नतीजा ये निकला कि कुछ जगहों पर जान और माल का नुकसान भी हुआ. दिल्ली में बीते 24 घंटों में जो बारिश हुई वो राज्य ने कई दशकों से नहीं देखी थी. वैज्ञानिक इसके पीछे कई वजहों को जोड़ कर देख रहे हैं- मानसून में देर और कम दबाव का क्षेत्र बनने की वजह से कई जगहों पर अत्यधिक बारिश देखने को मिल रही है.

    वैसे अक्टूबर में बारिश होना कोई हैरानी की बात नहीं है. अक्टूबर मानसून के जाने का महीना होता है, इस दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून लौटता है और वो उत्तर-पूर्व मानसून को रास्ता देता है, जो आमतौर पर दक्षिण प्रायद्वीपीय, मुख्यतौर पर भारत के पूर्वी हिस्से पर असर डालता है.

    पश्चिम विक्षोभ, जो भारत के दूरस्थ उत्तरी हिस्से के स्थानीय मौसम में उल्लेखनीय असर डालना शुरू करता है. जिसकी वजह से आमतौर पर बारिश या बर्फबारी होती है. लद्दाख, कश्मीर की ऊंचाई वाले स्थानों और उत्तराखंड में इसी वजह से इस मौसम की पहली बर्फबारी देखने को मिली. पिछले हफ्ते दो कम दबाव के क्षेत्र एक साथ सक्रिय हुए , जिसमें से एक अरब सागर और दूसरा बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के ऊपर था. इन दोनों के एक साथ मिलने से केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में मौसम की बेरुखी देखने को मिली.

    मानसून के लौटने में देर
    दक्षिण-पश्चिमी मानसून जिसकी अवधि चार महीने होती है, आमतौर पर अक्टूबर की शुरुआत में लौट जाता है. और इसके लौटने के दौरान स्थानीय स्तर पर गरज चमक के साथ बारिश, भारी बारिश होती है. इस साल मानसून के लौटने की शुरुआत ही 6 अक्टूबर से हुई जबकि सामान्य तौर पर ये 17 सितंबर से शुरू हो जाता है. अब तक मानसून पश्चिम, उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के क्षेत्रों से पूरी तरह लौट चुका है.

    लेकिन ये दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में अभी भी सक्रिय है इस वजह से केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में पिछले 10 दिनों से भारी बारिश देखने को मिल रही है. सोमवार तक मानसून मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, बंगाल के कुछ हिस्से, ओडिशा और पूरे दक्षिण प्रायद्वीप से नहीं लौटा था.
    इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के मुताबिक अक्टूबर मध्य तक मानसूनी हवाओं की दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर हो जाती है. इस साल उत्तर-पूर्वी मानसून के शुरुआत के हालात 25 अक्टूबर तक विकसित होने की उम्मीद है.

    अत्यधिक वर्षा
    पिछले हफ्ते के ज्यादातर दिन, कम से कम दो कम दबाव के क्षेत्र सक्रिय रहे जिसकी वजह से पूर्वी और पश्चिमी तटों और मध्य भारत के बड़े हिस्से में बारिश देखने को मिली. दिल्ली में 24 घंटे के भीतर 87.9 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिससे 1901 के बाद यह चौथा सबसे ज्यादा बारिश वाला अक्टूबर बन गया. यही नहीं भारत भर में ये अब तक का चौथा सबसे बारिश वाला अक्टूबर साबित हुआ और इस बार अक्टूबर में 94.6 मिमी बारिश दर्ज की गई. इससे पहले अक्टूबर में, 1954 में 238.2, 1956 में 236.2 मिमी बारिश और 1910 में 186.9 मिमी बारिश दर्ज की गई थी.

    इसी तरह ओडिशा के बालासोर में एक दिन में 210 मिमी बारिश दर्ज की गई और इस महीने में ऐसा कई दशकों बाद हुआ है. वहीं तमिलनाडु में आमतौर पर अक्टूबर और दिसबंर के बीच में अच्छी बारिश देखने को मिलती है, लेकिन इस बार उत्तर-पूर्व मानसून की दस्तक से पहले ही अच्छी बारिश देखने को मिली है, मुख्यतौर पर कोयंबटूर (110) में अक्टूबर के महीने में एक दिन में इतनी बारिश दर्ज की गई जो कई दशकों का रिकॉर्ड है.

    पश्चिमी घाट, उत्तर-पूर्व और मध्य भारत ज्यादा बारिश वाले क्षेत्रों के रूप में जाने जाते हैं. हालांकि हालिया सालों में देखा गया है कि कम अवधि में अत्यधिक तेज बारिश की घटनाएं बढ़ी हैं. मौसम विज्ञानियों का मानना है कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसम की बेरुखी देखने को मिल रही है, लेकिन इस तरह से विशेष तौर पर जो अधिक से अत्यधिक बारिश देखने को मिल रही है, इसके पीछे कम दबाव का तंत्र बनना ही वजह है. जब कभी भी कब दबाव का क्षेत्र बनता है तो इसका नतीजा अधिक से अत्य़धिक बारिश होती है.

    केरल में अत्यधिक बारिश
    पूर्वी-मध्य अरब सागर में बना कम दबाव का क्षेत्र केरल में 15 से 17 अक्टूबर के बीच बारिश की वजह बना है. इसी दौरान एक और कम दबाव का तंत्र उत्तरी आंध्र प्रदेश के तट और दक्षिण ओडिशा में उत्पन्न हुए. इन दोनों के मिलने से दक्षिण-पश्चिमी हवाओं को मजबूती मिली जिससे मध्य और दक्षिण केरल में अत्यधिक बारिश देखने को मिली. इसी का नतीजा है कि इदुक्की, एर्नाकुलम, कोल्लम और कोट्टायम जिलों में 24 घंटों में 200 मिमी तक बारिश हुई. इनमें से ज्यादातर जिले पहाड़ी हैं और जंगलों से घिरे हुए हैं. बारिश के जमाव की वजह से भूस्खलन हुआ.

    बारिश का दौर अभी बाकी है
    कम दबाव का क्षेत्र जिसकी वजह से केरल में असर पड़ा है वो अब कमजोर हो गया है, लेकिन इसी तरह का एक तंत्र अभी भी मध्य भारत में सक्रिय है, इस वजह से उत्तर भारत में इस हफ्ते में अच्छी बारिश हो सकती है. इस वजह से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश का अनुमान जताया गया है. एक और कम दबाव का क्षेत्र उत्तरी ओडिशा और गंगातटीय पश्चिमी बंगाल के ऊपर स्थित है और इसका बंगाल की खाड़ी से आ रही आद्र पूर्वी हवाओं के साथ मिलने से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, सिक्किम और बिहार में भारी बारिश का अनुमान जताया गया है. इसी तरह से बंगाल की खाड़ी से उठने वाली दक्षिण-पूर्वी हवाओं की वजह से अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में भी भारी बारिश का अनुमान है.

    Tags: Climate Change, Climate change in india, Delhi Rainfall, Imd, Kerala Rainfall

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