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ममता बनर्जी की उड़ी नींद, बंगाल में इस तरह औवेसी बिगाड़ सकते हैं TMC का खेल

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Updated: November 27, 2019, 10:36 AM IST
ममता बनर्जी की उड़ी नींद, बंगाल में इस तरह औवेसी बिगाड़ सकते हैं TMC का खेल
पिछले हफ्ते ममता बनर्जी ने AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधा था 

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में मुस्लिमों का वोट शेयर 31 फीसदी है. अल्पसंख्यकों के भारी समर्थन की वजह से ही ममता ने 2011 में 34 साल से चले आ रहे लेफ्ट के राज को खत्म किया था.

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  • Last Updated: November 27, 2019, 10:36 AM IST
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(सुजीत नाथ)

कोलकाता. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) अब पश्चिम बंगाल में अपनी पैठ जमाने में लगे हैं. अगले महीने यानी दिसंबर में वह कोलकाता के प्रतिष्ठित ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक बड़ी रैली की योजना बना रहे हैं. इसे लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) खासी चिंतित बताई जा रही हैं. रैली को लेकर परेशान होना लाजमी भी है. दरअसल बंगाल में मुस्लिमों का वोट शेयर 31 फीसदी है. अल्पसंख्यकों के भारी समर्थन की वजह से ही ममता ने 2011 में 34 साल से चले आ रहे लेफ्ट के राज को खत्म किया था.

रैली की तैयारी
बंगाल में AIMIM के प्रवक्ता असीम वकार ने कहा, 'हमलोग इस साल जल्दी ही कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक रैली करने वाले हैं. असदुद्दीन ओवैसी यहां भाषण देकर बंगाल में AIMIM के अधिकारिक लॉन्च का ऐलान करेंगे. फिलहाल हमने रैली को लेकर तारीख का ऐलान नहीं किया है क्योंकि ओवैसी इन दिनों झारखंड में रैली कर रहे हैं.'

AIMIM की तैयारी
वकार पिछले करीब तीन साल से AIMIM के लिए बंगाल में काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा, 'बंगाल में मैं अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए 24 फरवरी 2017 से काम कर रहा हूं. कई बार हमने ज़करिया स्ट्रीट में छोटी बैठकें की हैं, जिसका हमें अच्छा रिस्पॉन्स मिला है. इसके बाद से हमने बंगाल में 25 से ज्यादा मीटिंग की है. आखिरी मीटिंग 24 सितंबर को हुई थी.'

2021 चुनाव पर नज़रवकार के मुताबिक, उनकी असली लड़ाई बीजेपी से है न कि टीएमसी से. उन्होंने कहा, 'ये ममता दीदी पर है कि वो हमें अपना दुश्मन समझती हैं या दोस्त. हमलोग हर हाल में 2021 में चुनाव लड़ने जा रहे हैं. अगर वो हमें अपना दोस्त मानती है तो हम साथ मिलकर लड़ेंगे और अगर दुश्मन तो फिर हम उनके खिलाफ लड़ेंगे.'

हर ज़िले पर नज़र
वकार ने दावा किया है कि 23 में से 15 जिलों में उनके कम से कम 5 कार्यकर्ता हैं. पार्टी को उम्मीद है कि अगले चुनाव से पहले लगभग हर ज़िले में उनके कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे. कहा जा रहा है कि सीमावर्ती जिले जैसे कि मुर्शिदाबाद, मालदा, नॉर्थ और साउथ दिनाजपुर और हावड़ा में पार्टी मजबूती से आगे बढ़ रही है.

ममता की उड़ी नींद
साल 2016 के चुनाव में सत्ताधारी टीएमसी को करीब 90 मुस्लिम बहुल सीटों पर बढ़त हासिल थी. जबकि बीजेपी को सिर्फ एक सीट पर बढ़त मिली थी. लेफ्ट और कांग्रेस गठबंधन ने 39 सीटों पर बढ़त मिली थी. AIMIM के मैदान में आने से मुस्लिम वोटों का बटवांरा हो सकता है. लिहाजा बीजेपी के लिए ये फायदेमंद साबित होगा. राजनीतिक पंडितों के मुताबिक AIMIM के आने से ममता का राजनीतिक गणित बिगड़ सकता है.

जब ममता ने साधा ओवैसी पर निशाना
पिछले हफ्ते ममता ने टीएमसी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में 'अल्पसंख्यक कट्टरता' (Minority Extremism) का जिक्र किया और लोगों को इससे सावधान रहने का निर्देश दिया था. उन्होंने ओवैसी का नाम लिए बिना कहा था कि हैदराबाद की एक राजनीतिक पार्टी बीजेपी से पैसा लेकर अल्पसंख्यकों में कट्टरता फैलाती है. उन्होंने ये बातें कूचबिहार में कही. ये वो इलाका है जहां 80 फीसदी वोटर हिंदू और राडबोंशी वोटर्स हैं.

AIMIM से BJP नहीं TMC को खतरा!
राजनीति एक्सपर्ट मोहित रॉय ने कहा, 'यहां बीजेपी के नेताओं को कोई परेशानी नहीं होगी, उन्हें अपना एजेंडा पता है. लेकिन ममता बनर्जी के लिए यहां मुश्किलें बढ़ जाएंगी. लिहाजा ममता अब अपना हिंदू वोट शेयर बढ़ाने के लिए बेताब है'.

क्या है वोट शेयर का गणित?
इस साल लोकसभा के चुनाव में TMC को 12 सीट हारने के बाद भी 43 फीसदी वोट मिले थे. साल 2014 के मुकाबले ये वोट शेयर 5 फीसदी ज्यादा थे. ये आंकड़े मुस्लिम वोट के चलते ही बढ़े थे. साल 2016 के विधानसभा चुनाव में BJP का वोट शेयर 12 फीसदी था. जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में ये बढ़कर 39 फीसदी पर पहुंच गया. हिंदू वोटरों की संख्या बढ़ने के चलते बीजेपी के वोट शेयर में 27 फीसदी का इज़ाफा हुआ. ऐसे में अब ये देखना दिलचस्प होगा ओवैसी के आने से ममता के वोट शेयर में कितना फर्क पड़ता है.

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First published: November 27, 2019, 9:47 AM IST
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