जानिए कैसे पीएम मोदी ने सीमा विवाद में चीन को हर फ्रंट पर किया चित्त...

जानिए कैसे पीएम मोदी ने सीमा विवाद में चीन को हर फ्रंट पर किया चित्त...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लद्दाख दौरे ने सेनाओं का मनोबल ऊंचा किया.

India-China Standoff: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का एक-एक कदम चीन को परेशानी में डालता रहा. चीन को लग रहा था कि पिछली सरकार की तरह भारत का रवैया नरम रहेगा और 20 जवानों की शहादत पर केवल जुबानी जंग होगी. लेकिन हुआ उसका एकदम उल्टा.

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(अनूप गुप्ता, शैलेंद्र वांगू)

सीमा विवाद (Border Dispute) में चीन ने कदम पीछे नहीं किए हैं बल्कि भारत ने चीन को पीछे धकेलने में कामयाबी पाई है. गलवान घाटी (Galwan Valley) में चीन को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा है. भारत की जबरदस्त कूटनीतिक, राजनीतिक जीत हुई है. भारत की ये सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों का नतीजा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक-एक कदम चीन को परेशानी में डालता रहा. चीन को लग रहा था कि पिछली सरकार की तरह भारत का रवैया नरम रहेगा और 20 जवानों की शहादत पर केवल जुबानी जंग होगी. लेकिन हुआ उसका एकदम उल्टा. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कठोर नेतृत्व ने साबित कर दिया कि चीन ने न्यू इंडिया से दुश्मनी मोल ली है, जो शांति से रहना तो जानता है, लेकिन दुश्मनी में भी दो-दो हाथ करने से बाज नहीं आता.



राष्ट्र की एकता और मजबूत नेतृत्व से कुछ भी संभव है
नरेंद्र मोदी ने ऐसा जाल बनाया कि ड्रैगन में उसमें फसता चला गया. चीन को समझ आ गया कि अगर कदम पीछे नहीं किए तो अंजाम और बुरा होगा. 15-16 जून को गलवान घाटी की घटना और 20 जवानों की शहादत से पूरा देश हिला हुआ था, पीएम की स्पष्ट नीति थी, कि दुश्मन से आंख से आंख मिलाकर एक-एक इंच जमीन का बदला लेना है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्णयक सैन्य, आर्थिक और रणनीतिक कदम उठाकर चीन को पीछे होने पर मजबूर कर दिया. पीएम के कुशल नेतृत्व में कूटनीतिक, रणनीतिक, आर्थिक, सामरिक नीति के सहारे चीन को घेरने की रणनीति बनाई गई.

कूटनीतिक दवाब
विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तक पूरी मशीनरी अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार थी. कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए दुनिया के बड़े-बड़े देशों से बात की गई, और भारत ने बड़े देशों को इस मसले पर अपने साथ ला दिया.

भारत के दृष्टिकोण को व्यक्त करने के लिए भारतीय दूतावासों और प्रवासी भारतीयों के नेटवर्क को सक्रिय किया गया. उसके बाद रिक स्कॉट, मार्को रुबियो, टॉम कॉटन, एलियट एंगेल, अमी बेरा जैसे कई अमेरिकी सीनेटरों ने भी चीन की हरकतों के खिलाफ बात की. अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, इजराइल, इंग्लैंड जैसे देशों ने खुलकर भारत का समर्थन किया, और चीन को चेताने में कोई कसर नही छोड़ी गई. भारत ने चीन को इशारों-इशारों में बता दिया कि आज का भारत सशक्त और पावरफुल भारत है, जिसे दुनिया का समर्थन है.

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सामरिक
भारत-चीन LAC और गलवान घाटी में जब तनाव का माहौल था, दोनो देशों के सेनाएं आमने-सामने थी, तब पीएम मोदी की लेह यात्रा ताबूत में अंतिम कील साबित हुई. इसने दुनिया को दिखाया कि भारत अपने रणनीतिक हितों के लिए किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटने वाला. उनके भाषण ने सुरक्षा बलों के मनोबल को बढ़ाया, जो किसी भी विस्तारवादी आंखों को एक गंभीर झटका देने के लिए तैयार हैं. डोकलाम हो या फिर वन बेल्ट, वन रोड पहल पीएम ने चीन को करारा जवाब दिया है.

आर्थिक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान से चीन की आर्थिक योग्यता को जबरदस्त झटका लगा है. आर्थिक तौर पर चीन को लगता था कि उसके सामने दूसरे देशों को झुकना ही पड़ेगा. लेकिन भारत ने दिखा दिया कि चीन की काबिलियत भारत की योग्यता के सामने कुछ भी नहीं है.

पीएम के आत्मनिर्भर भारत के आह्वान ने राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोया. भारत के पास न केवल आत्मनिर्भर होने और वैश्विक मांगों को पूरा करने की ताकत है, बल्कि कौशल भी है. पीएम मोदी के इस कदम से चीन गंभीर आर्थिक दबाव में आ गया. एक के बाद एक चीनी कंपनियों को भारत मे मिल रही चुनौती ने उनको झकझोर के रख दिया. चीनी कंपनियां अपने ही देश की सरकार के खिलाफ खड़ी होते दिखाई देने लगीं. भारत सरकार के कई मंत्रालयों का चीनी कंपनियों को अपने काम से दूर करना आग में घी का काम करने लगा.

तकनीक
59 एप्स पर प्रतिबंध लगाने से चीन मुख्य रूप से प्रभावित हुआ है. इन एप्स और चीनी कंपनियों का अनुमानित नुकसान 50 बिलियन अमरीकी डॉलर के आसपास है. यह संख्या अब और ऊपर की ओर जाएगी. चीनी टेक कंपनियों को अब भारत में पाई भर भी हिस्सा नहीं मिलेगा. हुआवेई को लेकर भारत समेत विश्व मे जिस तरह का माहौल बनने लगा है, वो चीन को अंदर से हिला देने वाला है.
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