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OPINION: थप्पड़ खाकर भी जो विचलित न हो वह शरद पवार हैं

Piyush Babele | News18Hindi
Updated: November 26, 2019, 1:41 PM IST
OPINION: थप्पड़ खाकर भी जो विचलित न हो वह शरद पवार हैं
एनसीपी प्रमुख शरद पवार

महाराष्ट्र (Maharashtra) में बड़े उलटफेर के बाद भी शरद पवार (Sharad Pawar) अपने काम में लगे रहे. उन्होंने न सिर्फ शिवसेना और कांग्रेस का भरोसा जिंदा किया, बल्कि अजित पवार के साथ गए अपने विधायकों को एक एक कर वापस ले आए.

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  • Last Updated: November 26, 2019, 1:41 PM IST
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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मुखिया शरद पवार (Sharad Pawar) भारतीय राजनीति के ऐसे बूढ़े बरगद हैं, जिन्हें छोटी मोटी आंधियां तो क्या बड़े बड़े झंझावत भी हिला नहीं पाते. इस नवंबर में चल रहे ताजा घटनाक्रम से हटकर अगर 2011 के 24 नवंबर पर जाएं, तो एक दिलचस्प घटना याद आएगी. यह वह समय था जब शरद पवार तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कैबिनेट में कृषि मंत्री थे. इसके साथ ही वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष भी थे. ये वही समय था जब कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे का आंदोलन जोरों पर था. युवा राजनीति के भ्रष्टाचार से कुछ ज्यादा ही नाराज थे. ऐसे मौके पर एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शरद पवार भी गए थे.

कार्यक्रम खत्म होने के बाद जब शरद पवार वहां से जाने लगे, तो अचानक भीड़ में से एक युवक निकला और उसने शरद पवार के गाल पर चांटा मार दिया. थप्पड़ के प्रहार से पवार एक बारगी हिल तो गए, लेकिन उनके चेहरे पर गुस्से के कोई भाव नहीं आए. यही नहीं, वह तुरंत संभल कर अपने रास्ते आगे बढ़ गए. जब यह घटना सुर्खियों में आई और किसी पत्रकार ने अन्ना हजारे से उनकी प्रतिक्रिया मांगी तो अन्ना ने कहा, 'बस एक ही थप्पड़ मारा.'

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एक ही घटना पर महाराष्ट्र के दो लोगों की यह प्रतिक्रिया थी. एक तरफ शरद पवार थे, जो थप्पड़ खाकर भी निर्विकार बने रहे. दूसरी तरफ अन्ना हजारे थे, जो घटना की निंदा करने के बजाय तंज कसने लगे. आज आठ साल बाद पवार राजनीति में उसी हैसियत में हैं जो आठ साल पहले थे, लेकिन अन्ना हजारे की सार्वजनिक जीवन में वैसी हैसियत नहीं बची है, जैसी भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन के दौरान हुआ करती थी.

supriya sule
बेटी सुप्रिया सुले के साथ शरद पवार


हर हाल में खुद को संभाले रहना शरद पवार के व्यक्तित्व और राजनीति की खासियत है. सबने देखा कि पिछले शनिवार को जब शरद पवार सो रहे थे, तो उनके भतीजे अजित पवार ने बीजेपी के साथ मिलकर मुख्यमंत्री की शपथ ले ली. पवार जैसे मंझे हुए राजनेता के लिए यह सियासी थप्पड़ की ही तरह था, लेकिन उन्होंने इस पर भी वैसी ही प्रतिक्रिया दी; जैसी आठ साल पहले पड़े थप्पड़ पर दी थी.

शरद पवार ने अजित पवार के बारे में अब तक कोई तल्ख बयान नहीं दिया था. घटना के तुरंत बाद भी यही कहा कि राजनीति और परिवार अलग-अलग चीजें हैं. उन्होंने अभिषेक मनु सिंघवी सहित कई कांग्रेसी नेताओं के तंज का भी बुरा नहीं माना. सिंघवी ने कहा था: पवार तू सी ग्रेट हो.

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महाराष्ट्र में बड़े उलटफेर के बाद भी शरद पवार अपने काम में लगे रहे. पहले उन्होंने शिवसेना और कांग्रेस का भरोसा जिंदा किया. उसके बाद अजित पवार के साथ गए अपने विधायकों को एक एक कर वापस ले आए. फिर सभी विधायकों की परेड कराई. यही नहीं, जो सिंघवी उन पर कमेंट कर रहे थे, वही अब विपक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में शरद पवार के गठबंधन के लिए पैरवी करते दिखे. अब ताजा घटनाक्रम यह है कि अजित पवार ने एनसीपी के नेताओं से मुलाकात कर ली है. वे क्या फैसला लेते हैं यह अलग बात है, लेकिन शरद पवार ने हर स्तर पर संवाद और मेल मिलाप तो कायम कर ही लिया.

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ajit power with pawar
भतीजे अजित पवार के साथ शरद पवार


सब को साथ लेने का यही हुनर है जो शरद पवार को सबसे अलग बनाता है. वे कांग्रेस में कितनी बार आए और कितनी बार गए, इसकी गिनती करना कठिन है. जब कुर्सी सामने दिखी, तो उन्होंने अपने फैसले बदलने में देर नहीं लगाई. जिन सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर उन्होंने कांग्रेस छोड़ी, उन्हीं की छत्रछाया में बनी सरकार में वे मंत्री बन गए.

महाराष्ट्र में कांग्रेस की कम सीटें आने के बावजूद उन्होंने कांग्रेस का मुख्यमंत्री स्वीकार कर लिया. और अब जब राजनीति यहां तक पहुंची तो धुर विरोधी शिवसेना की सरकार बना रहे हैं. यह सब करने के बीच वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी 40 मिनट के लिए आराम से मिल लेते हैं.


शरद पवार के लिए सबके द्वार खुले हैं और पवार के दर पर भी सबका स्वागत है, लेकिन इस मेल मिलाप में वे अपना गोल नहीं भूलते. वे भारतीय राजनीति का एक ऐसा किरदार हैं, जिससे उसके विरोधी भी सीखना चाहेंगे.

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First published: November 26, 2019, 1:25 PM IST
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