कृषि बिल को लेकर सहयोगियों ने बढ़ाई BJP की मुश्किलें, जानें 8 बड़े अपडेट्स

इन बिल (विधेयकों) पर किसानों की सबसे बड़ी चिंता न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) को लेकर है.

New Agriculture Bills: आइए जानते हैं कि आखिर वो कौन से पहलू हैं जिन्हें लेकर किसानों और व्यापारियों दोनों की चिंता बढ़ गई है. इन कानूनों को लेकर किस बात का डर है, जिसे सरकार अर्थव्यवस्था नायकों के दिमाग से निकाल नहीं पा रही है. या फिर किसानों-व्यापारियों का अपने भविष्य को लेकर आकलन ठीक है?

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    नई दिल्ली. किसानों से जुड़े तीन विधायकों (New Agriculture Bills) के लोकसभा में पारित होने के बाद संसद से लेकर सड़क तक हंगामा मचा है. सरकार फिलहाल इस मामले में झुकने को तैयार नहीं है. इन विधेयकों को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में भी फूट पड़ती हुई दिख रही है. एनडीए की पुरानी सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (SAD) की नेता और केंद्रीय मंत्री रहीं हरसिमरत कौर बादल ने गुरुवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. अकाली दल ने अभी तक एनडीए छोड़ने का कोई फैसला नहीं लिया है. लेकिन, हरसिमरत कौर के इस्तीफे के बाद बीजेपी की सहयोगी जननायक जनता पार्टी (JJP) पर भी साथ छोड़ने का दबाव बढ़ रहा है. क्योंकि हरियाणा में बीजेपी और जेजेपी की गठबंधन की सरकार है.



    आइए जानते हैं कि आखिर वो कौन से पहलू हैं जिन्हें लेकर किसानों और व्यापारियों दोनों की चिंता बढ़ गई है. इन कानूनों को लेकर किस बात का डर है, जिसे सरकार अर्थव्यवस्था नायकों के दिमाग से निकाल नहीं पा रही है. या फिर किसानों-व्यापारियों का अपने भविष्य को लेकर आकलन ठीक है?
    राज्य सरकारों को मंडियों के बाहर की गई कृषि उपज की बिक्री और खरीद पर कोई कर लगाने से रोक लगाता है और किसानों को इस बात की आजादी देता है कि वो अपनी उपज लाभकारी मूल्य पर बेचे. सरकार का तर्क है कि इस बिल से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.
    आवश्यक वस्तु (संशोधन) बिल -2020 करीब 65 साल पुराने वस्तु अधिनियम कानून में संशोधन के लिए लाया गया है. इस बिल में अनाज, दलहन, आलू, प्याज समेत कुछ खाद्य वस्तुओं (तेल) आदि कोआवश्यक वस्तु की लिस्ट से बाहर करने का प्रावधान है.
    मूल्य आश्वासन तथा कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता बिल -2020 में प्रावधान किया गया है कि किसान पहले से तय मूल्य पर कृषि उपज की सप्लाय के लिए लिखित समझौता कर सकते हैं.
    इन बिल (विधेयकों) पर किसानों की सबसे बड़ी चिंता न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) को लेकर है. किसानों को डर सता रहा है कि सरकार बिल की आड़ में उनका न्यूनतम समर्थन मूल्य वापस लेना चाहती है.
    बिल के विरोध में किसान मज़दूर यूनियन सड़क पर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहा है. हरियाणा में 20 सितंबर को सड़क रोको आंदोलन होगा. 24 सितंबर से 26 सितंबर के बीच पंजाब में रेल रोको आंदोलन चलाएंगे. 25 सितंबर को पंजाब बंद की अपील भी की गई है.
    किसान बिल को लेकर हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से शुक्रवार सुबह मुलाकात की. विधेयक को लेकर जेजेपी को अपने कोर वोटबैंक से दबाव का सामना करना पड़ रहा है. जननायक जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व दुष्यंत चौटाला के घर पर मौजूद है.
    नवजोत सिंह सिद्धू ने ट्वीट कर किसानों के साथ होने की बात कही है. विधेयक के खिलाफ उन्होंने सिलसिलेवार दो ट्वीट किए. पहले ट्वीट में उन्होंने हिंदी में शेर लिखते हुए मोदी सरकार पर तंज कसा. वहीं दूसरे ट्वीट में पंजाबी में केंद्र सरकार को चेतावनी दी और कहा कि हमारे अस्तित्व पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
    पंजाब में किसान ही अकाली दल के वोट बैंक हैं. कई मौकों पर बादल परिवार कह चुका है कि अकाली मतलब किसान, किसान मतलब अकाली. चूंकि राज्य में डेढ़ साल बाद विधान सभा चुनाव होने हैं और ऐसे में अकाली दल को वोट बैंक खिसकने का डर सताने लगा, तब हरसिमरत कौर ने इस्तीफा देने का फैसला किया.

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