लोकसभा चुनाव : सटीक रहा News18-IPSOS का एग्जिट पोल

बेहतरीन योजना, सटीक आंकड़े, उच्च गुणवत्ता का डाटा संग्रहण, परिष्कृत विश्लेषण तकनीक और गहन ज्ञान. लोकसभा चुनाव 2019 के आम चुनाव के नतीजों के आकलन में News18-IPSOS के सर्वे की सफलता के ये पांच प्रमुख कारण हैं.

News18Hindi
Updated: May 25, 2019, 8:09 PM IST
लोकसभा चुनाव : सटीक रहा News18-IPSOS का एग्जिट पोल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
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Updated: May 25, 2019, 8:09 PM IST
दुनिया की सबसे विश्वसनीय रिसर्च एजेंसी IPSOS के सहयोग से कराए गए न्यूज18 के एग्जिट पोल ने लोकसभा चुनाव के नतीजों का बिल्कुल सटीक आकलन किया. IPSOS को दुनियाभर के चुनावों में परिणामों का सटीक आकलन करने के लिए जाना जाता है. IPSOS India ने 2019 के लोकसभा चुनावों के हर पहलू का सटीक अनुमान लगाकर एक बार फिर अपनी विश्वसनीयता साबित की है.

आइए, देखते हैं कि तीन अहम बिंदुओं (एनडीए, यूपीए व अन्य की सीटें) पर विभिन्न एजेंसियों के अनुमान और वास्तविकता से कितना अधिक अंतर देखने को मिला.



 

इस आकलन का मुख्य आधार वास्तविक नतीजे और उसके बीच का अंतर है. जो न्यूज18-IPSOS के आकलन (सबसे आखिरी कॉलम) के सबसे करीब है. यह दिखाता है कि IPSOS दूसरे स्‍थान पर काबिज सर्वे से कहीं ज्यादा आगे है. जनमत सर्वे करने वाली कई एजेंसियों के आकलन का अंतर तो तीन अंकों तक पहुंच गया. अगर आप पार्टी विशेष और राज्यवार आकलन करें तो दूसरे स्‍थान पर रहने वाली एजेंसी से न्यूज18-IPSOS का अंतर और अधिक हो जाता है. सीटों के सटीक आकलन के अलावा वोट शेयर को लेकर भी IPSOS का आकलन वास्तविकता के बेहद करीब रहा. IPSOS ने अनुमान लगाया था कि इस लोकसभा चुनाव में एनडीए का वोट शेयर 48.5 प्रतिशत रहेगा. चुनाव आयोग ने भी इस बात की पुष्टि की है कि इस लोकसभा चुनाव में एनडीए का वोट शेयर 49 प्रतिशत रहा.

IPSOS ने तीन चरणों योजना बनाने, उसे लागू करने और उसका गहनता से विश्लेषण कर यह सटीक आकलन तैयार किया.

योजना
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यह काफी अहम चरण था. दुनियाभर में अलग-अलग पहलुओं से चुनाव आयोजन और नतीजों के आकलन के IPSOS के अनुभव ने यह सुनिश्चित किया कि भारत में लोकसभा चुनाव में किसी भी मोर्चे पर कहीं कोई आकलन अंदाजों पर आधारित न हो. बल्कि उसके पीछे हर तथ्य का बारीक अध्ययन हो. इस लिहाज से वैज्ञानिक रूप से सैंपल एकत्र करने की प्रक्रिया बेहद अहम थी.

पहले रैंडम तरीके से सैंपल एकत्र कर 199 लोकसभा क्षेत्रों को चुना गया. इसके बाद IPSOS ने इन लोकसभा सीटों के 796 विधानसभा क्षेत्रों की पहचान की. फिर इनमें 4,776 मतदान केंद्रों को चुना गया. इन केंद्रों पर टाइम लोकेशन क्लस्टर सैंपलिंग की गई. इस दौरान हर तीसरे या पांचवें वोटर से बात की गई ताकि समूह में वोट डालने आने वाले लोगों के चलते सर्वे प्रभावित न हो.

लागू करने की प्रक्रिया
यह प्रक्रिया पूरी तरह एग्जिट पोल के सिद्धांत पर आधारित थी. यह अन्य एजेंसियों की पद्धति से बिल्कुल अलग थी जो शॉर्टकट अपनाते हुए पोस्ट पोल, ऑनलाइन, टेलीफोनिक, मोबाइल एप के पोल को भी एग्जिट पोल का नाम देती हैं. यह सर्वे सभी चरणों के वोटिंग वाले दिन और पूर्व निर्धारित मतदान केंद्रों पर आयोजित कराया गया.

सभी इंटरव्यू टैबलेट के जरिये लिए गए. सभी इंटरव्यूअर को पावर बैंक मुहैया कराए गए, ताकि टाइम लोकेशन क्लस्टर सैंपलिंग से किसी तरह की छेड़छाड़ न हो. टैबलेट ईवीएम की तरह डिजाइन थे और लोगों ने बिना इंटरव्यूअर की जानकारी के बटन दबाए. इससे पक्षपात रहित सर्वे करना संभव हो सका.

IPSOS की इस प्रक्रिया में सबसे बड़ा चरण घरों से डाटा एकत्र करने का था. इस काम पर चार क्षेत्रीय और एक राष्ट्रीय कंट्रोल रूम से नजर रखी जा रही थी. करीब 35 एग्जीक्यूटिव्य की टीम ने गुणवत्ता की जांच करते हुए डाटा को खारिज करने या उनके चयन का काम किया. लाइव मॉनिटरिंग, रियल टाइम डाटा, और जीपीएस युक्त उपकरणों ने फील्डवर्क की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित की. इसके साथ ही हर चरण में सीखे गए सबक को अगले चरण में इस्तेमाल किया गया.

यूं किया विश्लेषण
टीम को जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों का अंदाजा था, इसलिए इससे निपटने के लिहाज से ही योजना बनाई गई थी. इसके बाद प्रत्येक संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के हिसाब से उम्र, लिंग, धर्म और जाति के आधार पर सर्वे तैयार किया गया. एग्जिट पोल के बाद वोटरों का मूड, ट्रेंड और तथ्य को ध्यान में रखकर वोट और सीटों का अनुमान लगाया गया. IPSOS की मुख्य रिसर्च टीम ने इस दौरान 5-6 हफ्तों में देशभर के अलग-अलग हिस्सों में लगातार भ्रमण किया. इससे उन्हें लोगों की नब्ज जानने का मौका मिला और साथ ही वे अलग-अलग हिस्सों में लोगों के मुद्दों से रूबरू हुए. इन यात्राओं के दौरान लोगों की ईमानदार सोच से मिले तथ्यों को भी एकत्र किया गया जो वे सामाजिक व राजनीतिक कारणों से व्यक्त करने से डरते थे. IPSOS ने नवंबर 2018 से लेकर मार्च 2019 तक ट्रस्ट सर्वे भी किया. इससे ट्रेंड को समझने और सही दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिली.
First published: May 25, 2019, 5:16 PM IST
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