OPINION: मोदी 2.0 के कैसे रहे पहले 100 दिन, ये रहीं बड़ी उपलब्धियां, ये काम बाकी...

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Updated: September 6, 2019, 7:03 PM IST
OPINION: मोदी 2.0 के कैसे रहे पहले 100 दिन, ये रहीं बड़ी उपलब्धियां, ये काम बाकी...
6 सितंबर 2019 को मोदी सरकार ने 100 दिन पूरे कर लिए.

नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार ने अपने पहले 100 दिन पूरे कर लिए. ऐसे में ये सवाल तो बनता है कि सरकार के पहले 100 दिन (Modi's 100 Days) कैसे रहे? सरकार के इस दूसरे टर्म में अब तक कौन से बड़े फैसले रहे.

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  • Last Updated: September 6, 2019, 7:03 PM IST
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(कल्‍याणी शंकर)
6 सितंबर 2019 को नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार ने अपने 100 दिन पूरे कर लिए. ऐसे में ये सवाल तो बनता है कि सरकार के 100 दिन (Modi's 100 Days) कैसे रहे? सरकार के इस दूसरे टर्म में अब तक कौन से बड़े फैसले रहे और कहां पर चूक हुई. इन 100 दिनों में सरकार ने कई बड़े फैसले लिए तो कई जगह सरकार से भूल भी हुई.

2019 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha elections 2019) में शानदार जीत के बाद मोदी (Narendra Modi) ज्‍यादा ताकतवर होकर उभरे हैं. इस जीत ने उन्‍हें कई क्षेत्रों में बड़े और बोल्‍ड फैसले लेने का साहस दिया है. सरकार ने सुधार की प्रक्रिया को अपने बजट में आगे बढ़ाया है. साथ ही पीएम मोदी (PM Modi) ने अपने स्‍वतंत्रता दिवस वाले भाषण में इस बात का इशारा भी किया है. उनकी टीम 2019 के चुनाव से पहले अपनी जीत को लेकर इतनी आश्‍वस्‍त थी कि उन्‍होंने अपने दूसरे कार्यकाल के काम की दिशा में आगे बढ़ना शुरू कर दिया था.

पार्टी के स्‍तर पर बात करें तो मोदी बीजेपी (BJP) के कोर एजेंडे में शामिल वादों को पूरा करते हुए दिख रहे हैं. बात चाहे फिर ट्रिपल तलाक की ही क्‍यों न हो. उन्‍होंने इस बारे में कानून बनाकर इस ओर इशारा किया है कि अब आप एक अलग कानून की आड़ में छिप नहीं सकते. वह खुद कहते हैं, 'जब हमने सती प्रथा, कन्‍या भ्रूण हत्‍या, बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ कानून बनाए हैं, तो तीन तलाक पर कानून क्‍यों नहीं होना चाहिए.'

अनुच्‍छेद 370 में बदलाव के साथ जम्‍मू-कश्‍मीर के स्‍टेटस में परिवर्तन के अलावा आर्टिकल 35ए को खत्‍म करने की बात हो, यहां पर भी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है. ये कदम सरकार बिल्‍कुल सरप्राइज एलीमेंट की तरह लेकर आई. इसके लिए गृहमंत्री अमित शाह ने पूरी तैयारी की जो कि उनके पक्ष में गया.


ये कहना गलत नहीं होगा कि मोदी ने एक ऐसे जटिल मुद्दे को सुलझाया है, जो उनसे पूर्व आई 60 सालों में सरकारों के लिए हमेशा ही पेचीदा रहा. और वह उसे सुलझाने में असफल रहीं. हालांकि सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कश्‍मीर में हालात पूरी तरह सामान्‍य करने की है. अभी राज्‍य के तीन बड़े नेता और पूर्व मुख्‍यमंत्री हाउस अरेस्‍ट हैं. उनकी रिहाई के बाद देखना होगा कि वह और घाटी के हालात किस दिशा में जाते हैं.

संसदीय कार्य के मामले में मोदी सरकार ने बड़ा रिकॉर्ड बनाया. 17वीं संसद का पहला सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक रहा. इस सत्र में कुल 30 बिल पास किए गए. ये सबसे ज्‍यादा बिल पास करने वाला सत्र बना. इतना ही नहीं मोदी कई बिल पर विपक्ष को बांटने में कामयाब रहे. चाहे वह ट्रिपल तलाक का मामला हो या अनुच्‍छेद 370 को हटाने वाला बिल हो. राज्‍यसभा में सरकार के पास नंबर नहीं हैं, लेकिन विपक्ष को बांटकर सरकार ने अपना काम कर लिया.
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विदेश नीति के मामले में भी मोदी आगे रहे. जब मोदी पहली बार पीएम बने थे, तब सार्क देशों के नेता उनके शपथ ग्रहण समारोह में आए थे. दूसरे कार्यकाल का जब शपथ ग्रहण हुआ तो बिम्‍सटेक (BIMSTEC) (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) के नेताओं ने शिरकत की.

पिछले 100 दिन के कार्यकाल में पीएम मोदी जी20 समिट के अलावा फ्रांस में जी7 में भी शिरकत कर चुके हैं. इस दौरान उन्‍होंने कहीं न कहीं दुनिया में भारत का कद बढ़ाया ही है. इसी समिट के दौरान उन्‍होंने अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप से द्विपक्षीय वार्ता भी की. इसी दौरान उन्‍होंने कश्‍मीर मुद्दे पर ट्रंप और रूस के राष्‍ट्रपति पुतिन का समर्थन हासिल किया.

उधर इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्‍टिस में कुलभूषण जाधव के मुद्दे पर भारत को बड़ी कामयाबी मिली. कोर्ट ने पाकिस्‍तान से कहा कि वह भारत को जाधव से मिलने की इजाजत दे.

सरकार ने घोषणा की है कि वह 100 लाख करोड़ रुपए सड़कों, रेल, पोर्ट, एयरपोर्ट और दूसरे आधारभूत प्रोजेक्‍ट पर के ऊपर निवेश करेगा. इसके अलावा साल में 6 हजार रुपए सभी किसानों को देने की घोषणा की.

अर्थव्‍यवस्‍था के क्षेत्र में सरकार को बड़ा धक्‍का लगा है. कई इंडिकेटर्स हैं जो बता रहे हैं कि देश की अर्थव्‍यवस्‍था की हालत सही नहीं है. ऑटो सेल्‍स की गति नीचे की ओर गई है. पेट्रोलियम पदार्थों की खपत, रेल भाड़ा, हवाई यात्रा, निवेश आदि सभी जगह से जो इशारे मिल रहे हैं, उससे मंदी की ओर इशारा मिल रहा है. इसी बीच वित्‍तमंत्री निर्मला सीतारमन ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मर्जर का कदम उठाया है.

सरकार को एनआरसी के मुद्दे पर भी झटका लगा है. 1985 में राजीव गांधी और असम स्‍टूडेंट यूनियन के बीच हुए अकॉर्ड के मुताबिक एनआरसी सरकार के लिए गले की हड्डी बन चुका है. इसमें करीब 19 लाख लोगों को नागरिकता से बाहर कर दिया गया है. हालांकि कहा जा रहा है कि बड़ी संख्‍या में असम मूल के लोग ही बाहर रह गए हैं. खुद असम बीजेपी के अनुसार इसमें कई ऐसे लोगों को जगह मिल गई, जो इसकी पात्रता नहीं रखते हैं. एनआरसी से जुड़े कुछ ऐसे मुद्दों ने बीजेपी को ही शर्मिंदा किया है.

अमेरिका के साथ व्‍यापार का मुद्दा भी सरकार के लिए बड़ा सिरदर्द बना हुआ है. इस मुद्दे पर मोदी और ट्रंप की बातचीत हुई है. अमेरिका और ईरान के बीच टकराव भी इसमें बड़ा मुद्दा है.

हालांकि मोदी सरकार के आकलन के लिए 100 दिन पर्याप्‍त नहीं होंगे. लेकिन फिर भी यहां पर ये कहना जरूरी है कि पहले कार्यकाल के मुकाबले दूसरे कार्यकाल के 100 दिन में सरकार ने ज्‍यादा काम किया है.

लेखिका राजनैतिक विश्‍लेषक हैं. ये उनके निजी विचार हैं.

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First published: September 6, 2019, 2:39 PM IST
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