पढ़िए प्रिंस हैरी और मेगन की शाही शादी कैसे भारत में बदल रही है लोगों की जिन्दगी

सुहानी जलोटा
सुहानी जलोटा

मेगन मर्केल और प्रिंस हैरी ने फैसला किया है कि शादी में आने वाले मेहमान उन्हें तोहफे देने के बजाय उनके चुने सात परमार्थ संगठनों में से किसी एक को पैसे देदें. जिसके लिए मुंबई के ‘मायना महिला फाउंडेशन’ का चुनाव किया गया है.

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ब्रिटेन के प्रिंस हैरी और हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री मेगन मर्केल शनिवार यानी 19 मई को शादी के बंधन में बंध जाएंगे. इस शाही शादी को लेकर सभी उत्साहित है. विंडसर महल में होने वाली इस शादी की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है.

जहां कुछ लोग इस शादी को टीवी और अपने मोबाइल स्क्रीन पर देखेंगे वहीं भारत के एक परमार्थ संगठन की चार महिलाएं भारतीय साड़ी में इस शाही शादी में शामिल होंगी. यह महिलाएं मुंबई के ‘मायना महिला फाउंडेशन’ की हैं.

मेगन मर्केल और प्रिंस हैरी ने फैसला किया है कि शादी में आने वाले मेहमान उन्हें तोहफे देने के बजाय उनके चुने सात परमार्थ संगठनों में से किसी एक को पैसे देदें. जिसके लिए मुंबई के ‘मायना महिला फाउंडेशन’ का चुनाव किया गया है.



‘मायना महिला फाउंडेशन की स्थापना 23 वर्षीय सुहानी जलोटा ने 2015 में की थी. यह संस्था मुंबई की झुग्गी बस्तियों की महिलाओं को मासिक धर्म में स्वच्छता उत्पादों एवं रोजगार के अवसर आदि मुहैया कराता है.
मायना फाउंडेशन के इस शाही शादी में शामिल होने से पहले इसकी संस्थापक सुहानी जलोटा ने न्यूज 18 से बात करते हुए कहा, ''हमें इसके पब्लिक अनाउंसमेंट के एक महीना पहले ही इस बारे में पता चल गया था. हम इसको लेकर बहुत उत्साहित हैं लेकिन जब हमें पहली बार इसके बारे में पता चला तो हम शॉक हो गए. हम सब इसका हिस्सा बनकर अपने आपको बहुत खुशनसीब मान रहे हैं.''

इन सात संगठनों में चुने गए इस संस्थान को ऐसे दान से क्या मिलेगा और क्या यह अपना लक्ष्य पाने में सफल होगा? इस बारे में बात करते हुए सुहानी ने कहा, "हमारे पास आज भारत में 20 लाख गैर सरकारी संगठन हैं. उनमें से अधिकतर की पहुंच आम लोगों तक नहीं है या जमीनी स्तर पर काम नहीं कर रहे हैं जैसा की उन्हें करना चाहिए. इसलिए, इस तरह के माहौल के कारण एनजीओ सेक्टर की विश्वसनीयता खो गई है. इस तरह का कदम हमें अपने आपको स्थापित करने में सहायता करता है और हमारे संगठन की विश्वसनीयता बढ़ाता है."

इस शाही शादी में सुहानी कच्चे आम के रंग की साड़ी पहन कर शामिल होंगी. इसके बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि वे कुछ ऐसा पहनना चाहती थीं जो पारम्परिक हो और भारत का प्रतिनिधित्व करता हो इसीलिए उनकी टीम ने साड़ी पहनने का फैसला लिया.

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