OPINION: रघुवंश प्रसाद ने मनरेगा के विस्तार का श्रेय राहुल गांधी को लेने दिया था

पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने कुछ दिन पहले की आरजेडी से इस्तीफा दिया था.

Raghuvansh Prasad Singh: रघुवंश यूपीए सरकार में साल 2004 से 2009 तक केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रहे थे. इस दौरान उन्होंने नरेगा ( NREGA) को मनरेगा (MGNREGA) में परिवर्तित करने के लिए पार्टी के साथ धरातल पर काम किया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated :
  • Share this:
    (गार्गी परसाई)

    पूर्व केंद्रीय मंत्री और दिग्गज समाजवादी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad Singh) का हाल ही में निधन हुआ है. उनके निधन से बिहार में राजनीति गरमा गई है. रघुवंश प्रसाद एक कुशल राजनेता होने से पहले एक नेक दिल इंसान भी थे. एक व्यक्ति और एक राजनीतिज्ञ के रूप में वह बहुत ही विनम्र स्वभाव के थे.

    बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद (Lalu Prasad) की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janta Dal) के मुखर राजनेता रघुवंश प्रसाद एक सामाजवादी नेता भी थे. उनकी ग्रामीण भारत और कृषि संबंधित समस्याओं पर अच्छी पकड़ थी. यही कारण था कि उन्हें केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA-1) सरकार में ग्रामीण मंत्रालय की कमान सौंपी गई थी. उस वक्त उन्होंने यूपीए की पहली पारी में साल 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (नरेगा) पर काम किया. इस एक्ट के तहत गांव के गरीबों को आजीविका प्रदान की गई थी.

    ये भी पढ़ें- प्रशांत भूषण ने SC में भरी जुर्माने की राशि, दायर करेंगे पुनर्विचार याचिका

    रघुवंश ने ही यूपीए और योजना आयोग के सामने रखा था प्रस्ताव
    वह सोनिया गांधी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य बने. बता दें कि रघुवंश प्रसाद बिहार की वैशाली सीट से लगातार पांच बार जीतकर लोकसभा पहुंचे थे. वह साल 1996-97 और 2009 तक वैशाली सीट से सांसद रहे. रघुवंश प्रसाद को साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में हार का मुंह देखना पड़ा. रघुवंश को वैशाली सीट से लोकजन शक्ति पार्टी के उम्मीदवार रामा सिंह ने आम चुनाव (2014) में हराया था. साल 2008 में रघुवंश ने प्रसाद ने यूपीए और योजना आयोग के समक्ष मनरेगा (MGNREG) को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रख उन्हें इसके लिए राजी भी किया था. इसमें उन्होंने देश के 625 जिलों में से 320 जिलों को फंड देने के लिए चुना था. उस दौरान उन्होंने कहा था ' हम इस प्रस्ताव को कैबिनेट में पेश करने जा रहे हैं और आने वाले संसद सत्र में इसकी घोषणा करेंगे.'

    हालांकि, कार्यक्रम के स्वामित्व को लेकर गठबंधन के सहयोगियों के बीच सुगबुगाहट हुई थी. ऐसे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस संदर्भ में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक याचिका भेजी थी. राहुल गांधी ने याचिका में कार्यक्रम को देश के सभी जिलों में सुचारू रूप से लागू करने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इसका विस्तार करने का अनुरोध किया. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी. ऐसे में इस प्रस्ताव को पास कराने का सारा श्रेय राहुल गांधी को चला गया. जबकि रघुवंश प्रसाद की निगरानी में इस प्रस्ताव पर ग्रामीण मंत्रालय ने दिन रात मेहनत की थी.

    ये भी पढ़ें- Delhi: एक दिन के विशेष सत्र से पहले डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को आया बुखार

    मनरेगा को बदलने के लिए धरातल पर किया काम
    जब रघुवंश प्रसाद से इस पर सवाल किया गया तो उनके जवाब में बिल्कुल निराशा दिखाई नहीं दी. उन्होंने कहा था 'ठीक है, उन्हें लगा कि उन्हें इसकी घोषणा करनी चाहिए तो उन्होंने कर दी.' बता दें कि रघुवंश से यह सवाल बिना किसी रिकॉर्डिंग के पूछा गया था बावजूद इसके उन्होंने अपनी शालीनता का परिचय देते हुए कांग्रेस के खिलाफ एक भी शब्द नहीं कहा था. गौरतलब है कि रघुवंश यूपीए सरकार में साल 2004 से 2009 तक केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रहे थे. इस दौरान उन्होंने नरेगा ( NREGA) को मनरेगा (MGNREGA) में परिवर्तित करने के लिए पार्टी के साथ धरातल पर काम किया था. राजनैतिक मामलों में सटीक राय रखने वाले रघुवंश प्रसाद ने हमेशा से मीडिया को बारीकी से सुनने के बाद ही अपना पक्ष पेश किया.

    माना जा रहा है कि रामा प्रसाद के राष्ट्रीय जनता दल में आने के प्रयास के बाद से ही रघुवंश प्रसाद ने पार्टी से हाल ही में इस्तीफा दिया था. दिल्ली में इलाज के दौरान ही उन्होंने इस्तीफ़ा दिया. अटकलें लगाई जा रही थी कि वह जेडीयू में जाने का मन बना रहे थे. वहीं, लालू के बेटे तेजप्रताप ने बयान दिया था कि एक लोटा पानी चले जाने से समुद्र में कोई फर्क नहीं पड़ता. हालांकि बाद में लालू ने बेटे के इस बयान पर उन्हें कड़ी फटकार लगाई थी. वहीं, निधन से पहले रघुवंश ने अस्पताल से एक भावुक पत्र सार्वजनिक किया था. इस पत्र में उन्होंने अपने इस्तीफे की घोषणा की थी. रघुवंश ने पत्र में यह भी लिखा था 'मैं पिछले 32 साल से पार्टी के साथ खड़ा रहा अब और नहीं.'

    ये भी पढ़ें- केंद्र ने SC में कहा- रेलवे लाइन के किनारे से नहीं हटाएंगे 48 हजार झुग्गियां

    राबड़ी देवी को सूबे की कमान दिए जाने से पहुंची थी ठेस
    पत्र सार्वजनिक करने होने के तीन दिन बाद रघुवंश प्रसाद ने 74 साल की उम्र में आखिरी सांस ली. शरीर में कोरोना के हल्के लक्षण पाए जाने के चलते वह दिल्ली के एम्स (AIIMS) में भर्ती हुए थे. कई लोगों का मानना है कि उन्होंने पार्टी के प्रति देर से एक्शन लिया. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के साल 1997 में चारा घोटाला के आरोप में जेल के दौरान राबड़ी देवी को सूबे की कमान सौंपने पर रघुवंश प्रसाद को बहुत ठेस पहुंची थी. गौरतलब है कि पार्टी में लालू प्रसाद की वंशवाद की नीति ने रघुवंश प्रसाद को कभी आगे नहीं बढ़ने दिया. जबकि लालू के जेल में सजा काटने के दौरान रघुवंश को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया. उस वक्त पार्टी ने लालू के बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को अग्रणी बनाकर उनका राजनैतिक कद छोटा किया था.

    गणित में पीएचडी कर चुके रघुवंश प्रसाद मीडियाकर्मियों से भरे हॉल में किसी भी पेपर पर बिना पढ़े हस्ताक्षर नहीं करते थे. विनम्रता के धनी रघुवंश प्रसाद ने कृषि भवन में मीडियाकर्मियों का हमेशा से मुस्कुराकर अभिवादन किया. राजनीतिक बारीकियों में उनकी समझ बहुत अच्छी थी. वह एक मिलनसार और साफ-सुथरी छवि वाले राजनेता थे.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.