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जब रेलवे ने 'टॉयलेट' से ढूंढ निकाली डेढ़ लाख रु की गोल्ड चेन

जब रेलवे ने 'टॉयलेट' से ढूंढ निकाली डेढ़ लाख रु की गोल्ड चेन

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

    महाराष्ट्र के येवला रेल्वे स्टेशन पर पदस्थ स्टेशन मास्टर अनिल कुमार शुक्ला ने अपने बीस साल के पेशे में कई यात्रियों की मदद की है. उनकी इन्हीं उपलब्धियों में अब एक किस्सा और जुड़ गया है जब उन्होंने एक यात्री की सोने की चेन का पता लगाया. इस चेन की कीमत थी 1.5 लाख रुपये! इस 50 ग्राम की सोने की चेन गिर जाने के बाद इसके मालिक डॉ चव्हाण पाटिल के लिए चैन से सोना दूभर हो गया था.

    जाहिर सी बात है, इतनी मंहगी चेन का इस तरह चलती ट्रेन में शौचालय के रास्ते गिर जाना, किसी की भी नींद हराम करने के लिए काफी है. पाटिल का भी यही हाल था. पेशे से हड्डियों के सर्जन पाटिल 16 जुलाई को नोनंद से मनमाड़ जा रहे थे जब योला स्टेशन के करीब वह बाथरूम में अपनी शर्ट बदल रहे थे. उसी दौरान उनकी चैन रेलवे ट्रैक के हवाले हो गई.

    डॉक्टर ने अधिकारियों से मदद मांगी लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ. अब इतने बड़े रेलवे ट्रैक पर छोटी सी चैन को ढूंढ निकालना उतना आसान नहीं है, जितना कि यात्रियों की खाना, कबंल और व्हील चेयर जैसी सुविधाओं के न मिलने की शिकायत को दूर करना.

    पाटिल ने बताया ‘चेन गिरने के बाद मैंने तुरंत ट्रेन की चेन खींचकर गार्ड और स्टेशन मास्टर से मदद मांगी. उन्होंने कहा कि ज्यादा कुछ किया नहीं जा सकता क्योंकि टॉयलेट बायोटेक हैं और उसे सिर्फ कोल्हापुर के सफाई कर्मियों द्वारा ही खोला जा सकता है. उन्होंने मुझे कोल्हापुर जाने के लिए कह दिया.’

    निराश होकर पाटिल अपने घर फलटान लौट आए जहां उनकी बेटी ने बीड़ा उठाते हुए रेल मंत्री सुरेश प्रभु से ट्विटर पर मदद मांगी. प्रभु ने विभाग से जरूरी कार्यवाही करने के लिए कहा जिसके बाद पाटिल के पास पुणे रेलवे स्टेशन के प्रमुख का फोन आया और उन्होंने पाटिल से कोल्हापुर जाने के लिए कहा.

    पाटिल बताते हैं ‘वहां मुझे पता चला कि ट्रेन का टॉयलेट बायोटेक नहीं था, बल्कि सामान्य ही था.’ जानकारी मिली की क्योंकि ट्रेन में सामान्य टॉयेलट था इसलिए येवला स्टेशन के आसपास ही चेन गिरी है. तब स्टेशन मास्टर अनिल कुमार शुक्ला ने अपने स्टाफ के साथ मिलकर रेलवे ट्रैक के 2 किलोमीटर के हिस्से में चेन ढूंढने का बीड़ा उठाया. उस दिन तेज़ बारिश भी हो रही थी इसलिए काम थोड़ा और मुश्किल हो गया था.

    इसी खोजबीन में ट्रैक पर फैले कंकड़ों के बीच शुक्ला को कुछ दिखाई दिया. वायर की मदद से उसे निकाला गया जो कि मल से लिपटा हुआ था. पानी की मदद से मल हटाने पर सामने सोने की चेन निकली. इस तरह इच्छाशक्ति की बदौलत एक नामुमकिन सा काम भी शुक्ला और उनकी टीम ने कर दिखाया.

    Tags: Indian railway, Suresh prabhu

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