डोसा- इडली को दुनिया तक पहुंचाने वाले राजगोपाल कहानी, जिसने दो दशक तक कानून को दिया चकमा

यह एक ऐसी विरासत है जिसे सबसे ज्यादा बेईमानी और हत्या के रूप में देखा जाएगा जो दो दशकों तक भारतीय कानूनी प्रणाली को चकमा देने में कामयाब रही.

News18Hindi
Updated: July 19, 2019, 12:37 AM IST
डोसा- इडली को दुनिया तक पहुंचाने वाले राजगोपाल कहानी, जिसने दो दशक तक कानून को दिया चकमा
यह एक ऐसी विरासत है जिसे सबसे ज्यादा बेईमानी और हत्या के रूप में देखा जाएगा जो दो दशकों तक भारतीय कानूनी प्रणाली को चकमा देने में कामयाब रही.
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Updated: July 19, 2019, 12:37 AM IST
जुडे सन्निथ

सरवण भवन के मालिक पी. राजगोपाल की गुरुवार को मौत हो गई. वह हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे थे. उनकी मौत के बाद चार दशकों तक चली एक विवादास्पद और अभी तक पेचीदा विरासत पर पर्दा गिर गया. 72 वर्षीय विश्व प्रसिद्ध सवरण भवन चेन के संस्थापक राजगोपाल को निस्संदेह मैकडॉनल्ड्स के लिए सरवण भवन को भारत का जवाब बनाने के लिए याद किया जाएगा.

हालांकि यह बात भी दीगर है कि इस विरासत को उस वक्त धक्का लगा जब राजगोपाल को हाई प्रोफाइल मर्डर मामले में दोषी पाया गया.

साल 2001में हत्या के आरोपी बने राजगोपाल साल 2004 में दोषी पाए गए. हालांकि साल 2009 में इसे हटा दिया गया. करीब 17 साल तक राजगोपाल के हाथ खून से सने रहे. साल 2001 में राजगोपाल ने तीसरी शादी का फैसला किया. सिर्फ एक समस्या थी कि वह जिस महिला से शादी करना चाहते थे वह शादीशुदा थी. जीवजोथी नाम की महिला राजगोपाल के ही एक कर्मचारी प्रिंस सनथकुमार की पत्नी थी.

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ऐसे बनाया निशाना...

इसके बाद राजगोपाल ने अपने ही एक अन्य कर्मचारी के हाथों प्रिंस को निशाना बनाया और उसकी हत्या करा दी. प्रिंस के शरीर के अवशेष कोडईकनाल की एक छोटी पहाड़ी पर पाए गए. साल 2001 के अंत में दायर की गई पुलिस चार्जशीट और उसके बाद हुए मुकदमे में, अपराध के विवरण में राजगोपाल द्वारा पीड़िता को आपराधिक धमकी, पूछताछ में दंपति का अपहरण, शांताकुमार को मौत के घाट
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उतारने के लिए एक कर्मचारी का साथ देने का खुलासा हुआ क्योंकि राजगोपाल को एक ज्योतिषी ने तीसरी बार शादी करने की सलाह दी थी.



साल 2014 में न्यूयॉर्क टाइम्स पत्रिका के एक लेख के अनुसार राजगोपाल ने पत्रिका के लेखक रोलो रोमिग से मजाक में कहा कि 'लड़कियों के आसपास रहने से एक आदमी हमेशा के लिए युवा रहता है.' अपने अपराध के बाद, राजगोपाल ने स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का हवाला देते हुए जेल से बाहर अधिक समय बिताया. यहां तक कि जब राजगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आत्मसमर्पण किया तो उन्हें अपना बाकी जीवन जेल में बिताना था लेकिन राजगोपाल को सरकार द्वारा संचालित स्टेनली मेडिकल कॉलेज से चेन्नई के विजया अस्पताल में ट्रांसफर कर दिया गया. यहां तक कि उनके अंतिम आत्मसमर्पण के बाद भी उन्होंने एक दिन जेल में नहीं नहीं बिताया.

राजगोपाल की हत्या की सजा ने सरवण भवन की कहानी को धूमिल कर दिया. यह पुन्नैदी (अब, पुन्नई नगर) में पैदा हुए एक लड़के की कहानी थी, जो तमिलनाडु के गाँव का था, जो बाद में चेन्नई चला गया. साल 1968 में एक किराने की दुकान शुरू की. बाद में रेस्तरां व्यवसाय में पांव जमाने का फैसला किया और आगे बढ़े कर ब्रांड सरवण भवन का बनाया. आज सरवण भवन की 25 देशों में मौजूदगी है. अकेले भारत में 8,700 रेस्तरां कर्मचारी कार्यरत हैं.

80 के दशक में की शुरुआत

राजगोपाल ने 80 के दशक की शुरुआत में चेन्नई (तब, मद्रास) में पहला सरवण भवन खोला, जब वह एक किराने की दुकान चला रहे थे. उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उन्हें लगा कि चेन्नई के केके नगर में उनके स्टोर के पास कोई अच्छा रेस्तरां नहीं था.

सरवण भवन ने मैकडॉनल्ड्स की तुलना में इडली, डोसा और वडा का प्रॉडक्शन शुरू कर दिया. हालांकि, मैकडॉनल्ड्स के विपरीत, रेस्तरां का कोई भी उत्पाद पहले से नहीं बनाए जाते थे. यहां तक ​कि डोसा बटर भी रेस्तरां में पकाया और परोसा जाता था. एक दशक बाद चेन्नई के हर इलाके में एक सवरण भवन था.

पहली बार यूएई में एक रेस्तरां खोलते हुए राजगोपाल, सरवण भवन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले गए. इसी दौरान पेरिस, फ्रैंकफर्ट, लंदन, डलास और न्यूयॉर्क शहर में भी सरवण भवन खुला. मैनहट्टन में भी इसकी दो ब्रांचेज हैं.

दो बेटों ने संभाला बिजनेस

राजगोपाल के छोटे बेटे आ. सरावनन को सरवण भवन के भारत के कारोबार की बागडोर मिली है तो उनके बड़े बेटे, पी आर शिवा कुमार अंतरराष्ट्रीयकारोबार संभालते हैं. दोनों पिछले कुछ दशकों से अधिक से अधिक व्यापार का प्रबंधन कर रहे हैं. राजगोपाल के निधन के बाद भी यह जारी रहने की संभावना है.

जब राजगोपाल ने आखिरी बार आत्मसमर्पण किया, तब तक एक हफ्ते पहले ही उनकी विरासत लिखी जा चुकी थी. यह वह शख्स था जिसने दक्षिण भारतीय व्यंजनों को दुनिया के सामने पेश किया - डोसा को
मुख्यधारा में लाया, और इडली की स्थिरता को फिर से परिभाषित किया. लेकिन यह एक ऐसी विरासत है जिसे सबसे ज्यादा बेईमानी और हत्या के रूप में देखा जाएगा जो दो दशकों तक भारतीय कानूनी प्रणाली को चकमा देने में कामयाब रही.

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First published: July 19, 2019, 12:33 AM IST
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