राजनाथ सिंह: संसद में आधुनिक अजातशत्रु की छवि वाले नेता, विपक्षी भी हैं जिनके कदरदान

विपक्षी नेताओं के बीच राजनाथ सिंह की छवि काफी अच्‍छी है.
विपक्षी नेताओं के बीच राजनाथ सिंह की छवि काफी अच्‍छी है.

न्‍यूज18 से बातचीत में विपक्षी नेताओं ने माना है कि राजनाथ सिंह (Rajnath singh) से चर्चा करना आसान है. वे राजनाथ सिंह के आचरण की प्रशंसा में कहते हैं कि वह किसी से ओछी बात नहीं कहते.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 21, 2020, 1:43 PM IST
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पल्‍लवी घोष
नई दिल्‍ली. प्रशंसकों के बीच में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath singh) को अजातशत्रु (Ajatashatru) कहा जाता है. दूसरे शब्दों में कहें तो वह शत्रु जिसके कोई दुश्मन नहीं हैं. राजनीति की प्रकृति को देखते हुए इसे पूरी तरह सच नहीं माना जा सकता, लेकिन राजनाथ सिंह ने संसद के चल रहे मानसून सत्र में निश्चित रूप से सराहना अर्जित की है और उनमें से कई लोग विपक्षी खेमे से हैं.

न्‍यूज18 से बातचीत में विपक्षी नेताओं ने माना है कि राजनाथ सिंह से चर्चा करना आसान है. वे राजनाथ सिंह के आचरण की प्रशंसा में कहते हैं कि वह किसी से ओछी बात नहीं कहते. एक सीनियर विपक्षी नेता ने कहा, 'हमने सभी दलों की व्यावसायिक सलाहकार समिति की बैठक में सभी पक्षों को देखा. हमें क्या करना चाहिए यह बताने की बजाय उन्होंने हमसे पूछा कि क्या कर सकते हैं.' कई विपक्षी नेता या वार्ताकार बुरे बर्ताव के कारण चले जाते हैं. कांग्रेस के एक दिग्गज के अनुसार, 'वह (राजनाथ सिंह) राजनीतिक भाषा और पार्टियों की मजबूरी समझते हैं.' कोरोना के बाद अमित शाह पोस्ट कोविड केयर में हैं. इसलिए संसद में फ्लोर सामंजस्य का टास्क नरेंद्र मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों में से एक राजनाथ सिंह को दिया गया.

राजनाथ सिंह इस बात को समझते हैं कि विपक्ष शिकायत करने में आगे है कि उन्हें बोलने का मौका नहीं मिलता. उन्होंने विपक्ष को मौका मिलने का श्रेष्ठ तरीका सुनिश्चित किया. भारत-चीन सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर शानदार चर्चा के लिए राजनाथ सिंह को क्रेडिट मिलना चाहिए. हालांकि कांग्रेस इस इस स्थिति में वॉक आउट कर गई थी. राज्यसभा में सभी नेताओं को बोलने का मौका दिया गया और राजनाथ सिंह नोट्स बनाते हुए दिखाई दिए थे. इसके बाद उन्होंने खड़े होकर शांति से सभी सवालों के जवाब दिए. उनका भाषण दृढ़ राजनेता की तरह था. राज्यसभा में चर्चा समाप्त होने के बाद उन्होंने सभी वरिष्ठ नेताओं को बुलाया और धन्यवाद दिया.
लोकसभा में शुक्रवार को वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर और कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के बीच झगड़ा देखने को मिला. एक इकोनोमिक बिल पर अनुराग ठाकुर ने जवाहर लाल नेहरु और सोनिया गांधी पर आरोप जड़े. चौधरी ने ठाकुर को गधा और हिमाचल का छोकरा कहते हुए संबोधित किया. लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद राजनाथ सिंह अधीर रंजन चौधरी के पास गए और उन्हें शांत करने की कोशिश की. चौधरी ने राजनाथ से अनुराग ठाकुर की शिकायत की. इस बारे में अधीर रंजन ने कहा कि जैसे कई नेता पास नहीं आते वैसे राजनाथ को भी आने की जरूरत नहीं थी लेकिन वह सभ्य हैं और यह अच्छी बात थी कि वह आए.



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जब चीन मामले पर संवेदनशील और राष्ट्रीय सुरक्षा की बात कहते हुए चर्चा नहीं कराने की बात कही गई तो विपक्ष ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने खुद नेशनल सुरक्षा पर चर्चा के लिए कहा था. वह राजनाथ सिंह ही थे जिन्होंने अपने दल के लोगों को नियंत्रित चर्चा के लिए मनाया और विपक्ष के लोगों को भी शामिल किया. कई लोग राजनाथ सिंह में अटल बिहारी वाजपेयी देखते हैं. दूसरों के लिए वह प्रणब मुखर्जी की तरह काम करते हैं जो दोनों पक्षों को एक साथ लाते हैं.

विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, ममता बनर्जी और मुलायम सिंह के साथ राजनाथ सिंह के अच्छे रिश्ते हैं. विपक्ष के लिए राजनाथ सिंह से बात करना आसान होने का कारण उनके पेश आने का तरीका है. अपमानजनक शब्द इस्तेमाल नहीं करते, कोई आपसी दुश्मनी नहीं निकालना और क्रोधित भी नहीं होना आदि उनकी खासियत है. 2019 में जब वह लखनऊ से लोकसभा चुनाव लड़े, तो शब्दों की लड़ाई में शामिल नहीं रहे. उत्तर प्रदेश के भारी-भरकम नेता लेकिन केंद्रीय मंत्रिमंडल में सबसे शांत आदमी वह हैं जो किसी के लिए आक्रामक शब्दों का प्रयोग नहीं करते.

संसद में चीन की चर्चा से निपटने के बाद सिंह ने राजनीतिक मुकाम हासिल किया. जाहिर है, रक्षा मंत्री कोई शर्मीले और मौन रहने वाले सांसद नहीं हैं. मगध के योद्धा अजातशत्रु के आधुनिक दिनों के अवतार की तरह राजनाथ सिंह संसद में अपने पदचिह्नों का विस्तार करने में कामयाब रहे.
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