Delhi Monsoon: वाटर लॉगिंग से दिल्ली को डूबने से बचाने के लिए इस बार कितनी तैयार हैं सरकारी एजेंसियां, जानिए क्या है रणनीति?

राजधानी में मानसून के दौरान वाटर लॉगिंग की समस्या से एक बार फिर जूझना पड़ सकता है. (File Photo)

Delhi Monsoon: नॉर्थ दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत कुल 192 नाले आते हैं. वहीं, साउथ दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत 272 और ईस्ट दिल्ली नगर निगम के अधीन 219 नाले आते हैं. तीनों नगर निगम के अंतर्गत कुल 683 बड़े नाले आते हैं जो कि 4 फुट गहरे हैं. बाकी सभी 4 फुट से बड़े नाले दिल्ली सरकार के अधीनस्थ आने वाली एजेंसियों के होते हैं.

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    नई दिल्ली. दिल्ली में जून माह के अंत तक मानसून (Monsoon) के आने की प्रबल संभावना जताई जा रही है. लेकिन दिल्ली सरकार (Delhi Government) और सिविक एजेंसियों (Civic Agencies) ने अपने अधीनस्थ नालों की सफाई का काम अभी तक पूरा नहीं किया है जिसकी वजह से राजधानी में मानसून के दौरान वाटर लॉगिंग की समस्या से एक बार फिर जूझना पड़ सकता है. अगले दो-तीन दिनों में प्री-मानसून बारिश आने की संभावना भी जताई जा रही है.

    बताते चलें कि दिल्ली में नाले 5 एजेंसियों के अंतर्गत आते हैं. इनमें से 4 एजेंसियां दिल्ली सरकार के अधीनस्थ आती हैं जिनमें लोक निर्माण विभाग (PWD), डीएसआईडीसी (DSIDC), सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग और दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board) प्रमुख रूप से शामिल हैं. इन एजेंसियों के अंतर्गत दिल्ली के वह सभी बड़े नाले आते हैं जो कि 4 फुट से ज्यादा गहरे नाले होते हैं.
    वहीं 4 फुट से कम गहरे और सभी छोटे नाले दिल्ली की तीनों नगर निगमों (Corporations) के अंतर्गत आते हैं. इन सभी नालों की सफाई करने की जिम्मेदारी तीनों नगर निगमों की होती है.

    तीनों निगमों के अंतर्गत आते हैं 683 बड़े नाले 
    नॉर्थ दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत कुल 192 नाले आते हैं. वहीं, साउथ दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत 272 और ईस्ट दिल्ली नगर निगम के अधीन 219 नाले आते हैं. तीनों नगर निगम के अंतर्गत कुल 683 बड़े नाले आते हैं जो कि 4 फुट गहरे हैं. बाकी सभी 4 फुट से बड़े नाले दिल्ली सरकार के अधीनस्थ आने वाली एजेंसियों के होते हैं.

    यह भी पढ़ें: वॉटर‌ लॉगिंग से निपटने को MCD ने तैयार किया Action Plan, 20 जून से पहले पूरे होंगे ये सभी काम

    पीडब्ल्यूडी के 165 नालों में से सिर्फ 60% डिसिल्टिंग का काम हुआ 
    जानकारी के मुताबिक दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी ‌‌(PWD) विभाग के अंतर्गत 165 नालों में 60% डिसिल्टिंग का काम ही किया गया है. वहीं, अगर पीडब्ल्यूडी तेजी के साथ अपने इन नालों की सफाई का काम जल्द से जल्द पूरा नहीं करती है तो आने वाले समय में बारिश के दौरान दिल्लीवालों को वाटर लॉगिंग की बड़ी समस्या से जूझना पड़ सकता है. इसके पीछे एक बड़ी वजह यह है कि 4 फीट से ज्यादा गहरे नाले दिल्ली की बड़ी सड़कों के साथ दोनों तरफ स्थित होते हैं. नालों की सफाई नहीं होने की वजह से बारिश का पानी सड़कों पर भरना लाजमी होगा.

    अभी सिर्फ इस तरह से हुआ है नालों की सफाई का काम
    इसके अलावा बात करें दिल्ली की तीनों निगम नगर निगम के अंतर्गत आने वाले नालों की डीसिल्टिंग की तो 12 जून तक पूर्वी दिल्ली नगर निगम (East MCD) ने अपने अधीनस्थ 149 नालों में सिर्फ 64.4 फीसदी डिसिल्टिंग का काम ही पूरा किया है. वहीं, नॉर्थ दिल्ली नगर निगम (North MCD) ने 192 नालों में 83 फीसदी डिसिल्टिंग का काम किया है. साउथ दिल्ली नगर निगम (South MCD) के 272 नालों में सिर्फ 60 से 65 फीसदी ही गाद निकालने का काम पूरा किया गया है.

    निगमों ने नालों की डीसिल्टिंग का काम पूरा करने की 20 जून तय कर रखी है डेडलाइन
    यानी अभी तक ना तो दिल्ली सरकार ही अपने नालों की सफाई का काम पूरा कर पाई है और ना ही तीनों सिविक एजेंसियों में से किसी एक ने भी डिसिल्टिंग का काम अभी पूरा किया है हालांकि दिल्ली की तीनों नगर निगमों ने नालों की डीसिल्टिंग का काम पूरा करने की डेडलाइन 20 जून तय की हुई है.

    उत्तरी निगम के अंतर्गत 4 फीट गहरे 192 बड़े नाले आते हैं जिनकी लंबाई 112.25 किलोमीटर है. वहीं, 515 छोटे नाले भी आते हैं जिनकी लंबाई 492 किलोमीटर है.

    सभी विभागों को पत्र लिखकर अधीनस्थ नालों से गाद निकालने का अनुरोध
    निगम ने सभी विभागों को पत्र लिखकर अपने-अपने क्षेत्रों में आने वाले नालों से गाद निकालने का अनुरोध किया है ताकि मॉनसून के समय दिल्ली में जल भराव की स्थिति उत्पन्न न हो और पानी और मच्छर जनित बीमारियां पैदा न हो.

    लोक निर्माण विभाग के नालों की सफाई न होने से जलभराव का खतरा: रामवीर सिंह बिधूड़ी
    उधर, दिल्ली सरकार के विभाग द्वारा नालों की सफाई का काम अभी तक पूरा नहीं करने पर दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी में केजरीवाल सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किये हैं. बिधूड़ी ने उप-राज्यपाल अनिल बैजल से भी अनुरोध किया है कि दिल्ली में मानसून से पहले बड़े नालों की सफाई के काम का राजनिवास खुद निरीक्षण करे अन्यथा इस बार भी मानसून में दिल्ली डूब सकती है.

    बिधूड़ी ने कहा है कि दिल्ली में मानसून आने की घोषणा हो चुकी है. कहा जा रहा है कि इस बार मानसून अपने तय समय 29 जून से पहले ही दिल्ली पहुंच रहा है. इससे लोगों को गर्मी से तो राहत मिलेगी लेकिन लोगों की चिंता भी इस घोषणा के साथ बढ़ गई है. दिल्ली की 1400 किमी. बड़ी सड़कों के दोनों तरफ के नालों की सफाई भी लोक निर्माण विभाग ही करता है जबकि 400 किमी. छोटे नालों की सफाई का काम तीनों नगर निगमों के जिम्मे है. लोक निर्माण विभाग ने अपने नालों की सफाई का कोई काम इस साल नहीं कराया जिससे पूरी दिल्ली में जलभराव की समस्या खड़ी हो जाती है.

    MCDs व सरकार ने सिर्फ 20 फीसदी डीसिल्टिंग का काम किया है पूरा: चौधरी अनिल कुमार
    नालों की सफाई को लेकर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार ने केजरीवाल सरकार और भाजपा शासित तीनों नगर निगमों पर आरोप लगाते हुए कहा है कि अभी तक दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम ने केवल 20 फीसदी डीसिल्टिंग का ही काम किया है.

    दिल्लीवालों को मानसून की बारिश से होने वाले जल भराव के संकट से बचाने के लिए दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम दोनों को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जल्द से जल्द डीसिल्टिंग का काम पूरा करना चाहिए.

    उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी विभाग के 165 नालों में से सिर्फ 60 फीसदी का काम ही पूरा होने का दावा किया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि डीसिल्टिंग व गाद उठाने के काम में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की आशंका है क्योंकि डीसिल्टिंग के बाद गाद उठाने वाली एजेंसी ने गाद उठाने का काम नहीं किया है और बारिश के साथ फिर गाद नालों में बह जाएगी. हर वर्ष की भांति जलभराव की समस्या से पूरी दिल्ली प्रभावित होगी क्योंकि डिसिल्टिंग का जितना दावा किया जा रहा है, वह पूरी तरीके से खोखली बयानबाजी है.

    वॉटर लॉगिंग से निपटने के लिए छोटे पंपों की व्यवस्था भी की
    बारिश के दौरान वाटर लॉगिंग होने की स्थिति में पानी निकालने के लिए नॉर्थ दिल्ली नगर निगम (North MCD) में 127 छोटे पंपों की व्यवस्था भी की है जो कि जरूरत पड़ने पर उपयोग किए जा सकेंगे. इसी तरह से ईस्ट दिल्ली नगर निगम ने भी छोटे पंपों की व्यवस्था की है. वाटर लॉगिंग से निपटने के लिए 180 छोटे पंपों की व्यवस्था की ईडीएमसी (EDMC) की ओर से की गई है.

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