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Tamil Nadu Elections 2021: तमिल सियासत में बेहद शक्तिशाली रहीं शशिकला ने कैसे हासिल किया ये मुकाम

शशिकला और तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत जयललिता (फाइल फोटो)

शशिकला और तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत जयललिता (फाइल फोटो)

Story of Sasikala: दिवंगत सीएम एमजी रामाचंद्र के 1982 में जयललिता को AIADMK में शामिल करने के साथ ही शशिकला गाथा शुरू होती है. 1983 में उन्हें प्रोपेगैंडा सेक्रेटरी बनाया गया. जयललिता कुड्डलोर में भाषण दे रहीं थीं, इस दौरान दोनों के बीच रिश्तों की शुरुआत हुई.

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(आर रंगाराजन)
चेन्नई. विवेकानंदन कृष्णादेवी शशिकला (Vivekanandan Krishnaveni Sasikala) का जन्म मन्नारगुड़ी (Mannargudi) में साल 1957 में हुआ था. शशिकला के माता-पिता विवेकानंदम और कृष्णादेवी किसान थे. उनके चार भाई थे- सुंदरवदनम, जयरामन, डॉक्टर विनोदागन और दीवाहरन और एक बहन वनीतामणि थी. वे अमीर नहीं थे, लेकिन वर्चस्व वाले कल्लार समुदाय से आते थे. शशिकला और उनके पति नटराजन ने शांत शुरुआत की, लेकिन बाद में तमिलनाडु (Tamil Nadu) की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता (J. Jayalalithaa) से नजदीकियों के चलते मन्नारगुड़ी माफिया की ओर बढ़े. ऐसा कहा जाता है कि शशिकला ने तमिलनाडु को अपनी जागीर बना लिया था.

दिवंगत सीएम एमजी रामाचंद्र के 1982 में जयललिता को AIADMK में शामिल करने के साथ ही शशिकला गाथा शुरू होती है. 1983 में उन्हें प्रोपेगैंडा सेक्रेटरी बनाया गया. जयललिता कुड्डलोर में भाषण दे रहीं थीं, इस दौरान दोनों के बीच रिश्तों की शुरुआत हुई. नटराजन राज्य सरकार में जनसंपर्क अधिकारी थे, जो कुड्डलोर में पदस्थ थे. उन्होंने अपनी पत्नी को आईएएस अधिकारी वीएस चंद्रलेखा के जरिए जयललिता से मिलाया. इसके कुछ समय बाद ही शशिकला जया के करीबियों में शुमार हो गईं.

दोनों महिलाओं के बीच रिश्तों की शुरुआत ऐसे हुई कि वीडियो पार्लर की कंपनी चलाने वाली शशिकला, शादी-ब्याह, राजनीतिक समेत जयललिता के कार्यकर्मों की वीडियोग्राफी की व्यवस्था करने लगीं. इस दौरान एमजीआर को यह एहसास हो रहा था कि जयललिता, शशिकला का भरोसा करती हैं. उन्होंने शशिकला से जया और घर का ख्याल रखने के लिए कहा. तब से ही शशि पोस गार्डन निवास का हिस्सा बन गईं.
ऐसे प्रशासन को काबू में किया


1987 में एमजीआर के निधन के बाद शशिकला (नटराजन) की सलाह से जयललिता ने 1989 के विधानसभा चुनाव में सीएम पद के लिए दावा पेश किया. जब शशि का घर में वर्चस्प पूरी तरह जम गया, तब जया ने मतभेदों के चलते 1990 में नटराजन को घर छोड़कर जाने के लिए कहा. शशि ने जया के साथ रहना जारी रखा और यह भरोसा दिलती रहीं कि वे नटराजन से दूर हैं. जया इस बात को नहीं जानती थीं कि शशिकला की सलाहों के पीछे नटराजन का दिमाग है. 30 साल बाद भी जया को यह भरोसा था कि दोनों एक-दूसरे से दूर हैं.

हालांकि, वे नटराजन ही थे, जिन्होंने मुलायम सिंह, लालू प्रसाद यादव, एलके आडवाणी, कांशी राम, मायावती और दूसरे नेताओं के बीच संबंध स्थापित किए. कहा जाता है कि नटराजन ने कांशी राम के आशीर्वाद से उत्तर प्रदेश में एक कॉलेज खोला था. शशि और नटराजन ने जया की पार्टी के लिए उम्मीदवारों की सूची तैयार की, पूरी AIADMK को नियंत्रित किया और जब 1991 में जया सीएम बनीं, तो पूरे प्रशासन पर उनकी मजबूत पकड़ हो गई थी.

जैसे-जैसे शशिकला और जयललिता के बीच दोस्ती पनप रही थी. वैसे-वैसे कल्लार समुदाय भी मजबूत होता जा रहा था. सरकार में समुदाय का मजबूत पकड़ हो गई थी. जयललिता ने समुदाय के एक साथ आने से इसके वोट बैंक का फायदा उठाने की मांग की. कुछ सालों में इस परिवार ने पूरे तमिलनाडु में अपने पंख फैला दिए थे और उपाध्यक्ष की तरह सरकार पर पकड़ बना ली थी.

सभी मुलाकातें और समझौतों पर शसि की मुहर लगती थी. पार्टी और सरकार के कई बड़े फैसले उन्हीं से होकर गुजरते थे. परिवार ने निजी सचिवों, पुलिस अधिकारियों के नेटवर्क से IAS और IPS को नियंत्रित कर लिया था. हर मंत्री पर एक निजी सचिव नजर रखता था और शशिकला को गतिविधियों की पूरी जानकारी देता था. उनकी मर्जी के बगैर कुछ भी नहीं हो सकता था. अगर मंत्री कोई सवाल उठाता, तो उसे 24 घंटों के भीतर कैबिनेट से हटा दिया जाता. यह सभी को बताने के लिए काफी था कि शशि के फैसले पर कोई सवाल नहीं उठाएगा और कोई कोई जया से नहीं मिल सकता.

राज्य पंजीयन विभाग में आने वाले सभी जमीन से जुड़े समझौतों पर शशि की नजर होती थी. अगर शशिकला के परिवार को प्रॉपर्टी में दिलचस्पी होती थी, तो खरीदने वालों को पीछे हटने के लिए कह दिया जाता था. इसके बाद मालिक को कम कीमत देकर प्रॉपर्टी हासिल कर ली जाती थी. अगर उद्योगपतियों को फैक्ट्री लगानी है, तो उन्हें डील पूरी करने के लिए बड़ी कीमत देनी होती थी. अगर कोई IAS अधिकारी इस पर कोई सवाल उठाता था, तो उसे दूसरे अधिकारी से बदल दिया जाता था.

यहां से तल्ख हुए रिश्ते
1991-96 के बीच पहले कार्यकाल में जयललिता पर शमशान शेड घोटाले, मुफ्त साड़ी धोती घोटाले कई आरोप लगे. जया और शशि के परिवार ने कोडइकनाल और उपनगरीय चेन्नई में बड़े स्तर पर प्रॉपर्टी अपने पाले में कर  रखी थी. इनमें कुछ कंपनियां भी शामिल थीं. इनमें से कई कंपनियों में जया और शशि बतौर डायरेक्टर थीं. देश और विदेश में पैसा निवेष किया गया. इनमें वे संपत्तियां भी शामिल हैं, जो जया के बैंक खाते से संपत्तियां खरीदी गईं. ये अघोषित संपत्ति मामले में सामने आईं थीं. (TANSI जमीन मामले के अलावा, जिसकी वजह से उन्हें कार्यालय छोड़ना पड़ा था. अघोषित संपत्ति वाला मामला अहम साबित हुआ. क्योंकि कई सालों बाद बेंगलुरू ट्रायल कोर्ट में जयललिता और शशि को दोषी पाया गया था. )

इसी बीच जया ने शशि के भतीजे वीएन सुधाकरण को बेटे के तौर पर गोद लिया. उसकी शादी 1995 में शिवाजी गणेशन की पोती से हुई. साधारण शादी पर हुए बेहिसाब खर्च को लेकर विवाद का नया दौर शुरू हो गया था. जया, शशिकला और उनके परिवार के सदस्य बड़ी मात्रा में सोने के जेवरों से लदे नजर आए, जिसकी वजह से ये आम जनता से दूर हो गए थे. बाद में AIADMK चुनाव हारी और जया ने 1996 में सत्ता गंवा दी. चुनावों के बाद पार्टी के कुछ वरिष्ठ साथियों की सलाह पर जया ने शशि को घर से निकलने के लिए कहा था. साथ ही पार्टी के लोगों को शशि से दूर रहने के लिए कहा.

सुधाकरण ने 1996 में जया और शशि के स्थान पर जेजे टीवी की शुरुआत की थी और इसे कुछ सालों तक चलाया. साथ ही एक छोटे दल 'चिन्ना एमजीआर नरपानी मनरम' का गठन किया. हालांकि, जेजे टीवी की लॉन्चिंग के दौरान हवाला को लेकर केंद्र की एजेंसियों ने उसपर आरोप लगाए. FERA और हवाला लेनदेन को लेकर शशि के भतीजे टीटीवी दीनाकरण पर भी आरोप लगाए गए.

जब जया 2001 में दोबारा सत्ता में आईं, तो पुलिस ने सुधाकरण के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी. जिसके बाद उसे ड्रग्स रखने के आरोप में जेल हो गई. शिवाजी गणेशन ने बेटी को लेकर जया से सुधाकरण को छोड़ने की मांग की, लेकिन जया ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया. गणेशन दुखी होकर ही दुनिया से चले गए. थोड़े समय के अलगाव के बाद जया ने शशि से दोबारा घर लौटने के लिए कहा और दोनों मिलकर 1996 से लेकर 2011 तक AIADMK पर राज किया.

(आर रंगाराजन वरिष्ठ पत्रकार और इतिहासकार हैं. ये उनके निजी विचार हैं)
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