कांग्रेस के 'बड़बोले नेताओं' को कैसे काबू में रख पाएंगी सोनिया गांधी?

News18India
Updated: September 5, 2019, 6:33 PM IST
कांग्रेस के 'बड़बोले नेताओं' को कैसे काबू में रख पाएंगी सोनिया गांधी?
मुश्किल वक्त में कांग्रेस का कमान संभालने वाली सोनिया गांधी के लिए पार्टी की अंदरूनी राजनीति है सबसे बड़ी चुनौती.

मुश्किल वक्त में कांग्रेस का कमान संभालने वाली सोनिया गांधी के लिए पार्टी की अंदरूनी राजनीति है सबसे बड़ी चुनौती.

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  • Last Updated: September 5, 2019, 6:33 PM IST
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पल्लवी घोष

नई दिल्ली. राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने कांग्रेस पार्टी (Congress) को फिर से पटरी पर लाने की महत्वपूर्ण  ज़िम्मेदारी अपने हाथों में ली है. इसके लिए शुरुआती कवायद भी उन्होंने शुरू भी कर दी है, लेकिन पार्टी को जमीन पर फिर से एक बार खड़ा करने में उनकी राह में कई रोड़े हैं. इन रुकावटों में खुद कांग्रेस पार्टी के नेता ही शामिल हैं.

पार्टी के अधिकतर सीनियर लीडर्स बड़बोले हैं और इनकी अपनी-अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं. वे जब-तब अपने बगावती रुख और बयानों से पार्टी और आलाकमान के लिए मुसीबतें खड़ी करते रहते हैं. इसको देखते हुए सोनिया गांधी पार्टी को पटरी पर कैसे लाएंगी, यह कहना बहुत मुश्किल है. राहुल गांधी की कार्यशैली से इतर सोनिया ने पार्टी को मजबूती देने के लिए पहले भी कड़े कदम उठाए थे. उनके फैसलों से कांग्रेस पार्टी दोबारा केंद्र की सत्ता में लौटकर आई थी. लेकिन अभी जबकि कांग्रेस अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है, सोनिया गांधी के लिए अपने क्षत्रपों और उनकी निजी महत्वाकांक्षाओं से निपटना आसान नहीं है.

हरियाणा में अहम फेरबदल

हालिया उदाहरण हरियाणा (Haryana Congress) का है, जहां इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं, सोनिया गांधी ने पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण फेरबदल किया है. उन्होंने एक बार फिर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा पर विश्वास जताया है. हाल के दिनों में अपने बयानों से पार्टी के लिए मुसीबत खड़ी करने वाले हुड्डा को कांग्रेस विधायक दल का नेता और चुनाव प्रबंधन समिति का मुखिया बनाया गया है. हरियाणा में इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है. सोनिया गांधी ने हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वर्तमान अध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok Tanwar) को उनके पद से हटाकर कुमारी शैलजा (Kumari Shelja) को यह जिम्मेदारी सौंपी है. शैलजा, हरियाणा में पार्टी का दलित चेहरा हैं, जिन्होंने भूपिंदर सिंह हुड्डा से इतर अपना वजूद बनाया है. सियासी जानकारों के मुताबिक शैलजा को इस पद पर लाने के पीछे, हुड्डा पर नियंत्रण रखना भी है.

सोनिया गांधी फिलहाल कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष हैं.


दरअसल, भूपिंदर सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) लंबे समय से अशोक तंवर को हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद से हटाने की मांग कर रहे थे. सोनिया गांधी ने उन्हें हटाकर एक तरफ जहां हुड्डा को साधने का प्रयास किया है, वहीं सियासी समीकरण बनाए रखने के लिए शैलजा को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी है. शैलजा के रहते हुए हुड्डा के लिए अपने स्तर से सभी निर्णय करना आसान नहीं होगा. हालांकि, कुछ विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि अशोक तंवर, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की पसंद थे. उन्हें हटाकर सोनिया ने अपने बेटे के फैसलों को बदलने का संदेश भी दे दिया है.
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मध्यप्रदेश पर पड़ेगा असर
हरियाणा को लेकर सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के ताजा फैसले का असर, पार्टी की अन्य प्रदेश इकाइयों पर भी पड़ेगा. खासकर उन राज्यों में जहां कुछ नेता विद्रोही तेवर दिखा रहे हैं. मध्यप्रदेश में, जहां पार्टी 15 साल के बाद सत्ता में लौटी है, सीएम कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के बीच सत्ता की रस्साकशी चल रही है. सोनिया गांधी से जुड़े सूत्रों ने नेटवर्क 18 को बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने करीबी सलाहकारों को यह संदेश दे दिया है कि वह सिंधिया-समर्थकों के दबावों के आगे झुकने वाली नहीं हैं. इस बीच सोनिया गांधी ने दिग्विजय सिंह के बारे में चल रही उन खबरों पर भी संज्ञान लिया है, जिनमें कहा जा रहा है कि वह प्रदेश में सीएम के समानांतर (De-facto CM) सरकार चला रहे हैं. आने वाले दिनों में सोनिया जल्द ही इन दोनों वरिष्ठ नेताओं के बीच संतुलन बनाने के लिए कोई कदम उठा सकती है.

सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) अपने पहले कार्यकाल में भी पार्टी के हित में कड़े कदम उठाने से नहीं हिचकी थीं. पार्टी में संतुलन बनाने के लिए उनसे जो बन पड़ा था, उन्होंने किया. अध्यक्ष पद पर दूसरी बार आने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि सोनिया गांधी कांग्रेस (Congress) के इन क्षत्रपों से निपटने के लिए आने वाले दिनों में कौन सी रणनीति अख्तियार करती हैं. उदाहरण के लिए हरियाणा, जहां पार्टी संगठन में व्यापक फेरबदल को लेकर अशोक तंवर और कांग्रेस विधायक दल की निवर्तमान नेता किरण चौधरी के आगामी कदमों का इंतजार किया जा रहा है. वहीं शैलजा और हुड्डा ने पारस्परिक सहयोग के साथ आगे बढ़ने जैसे बयान दिए हैं, लोग उस पर भी गौर कर रहे हैं.

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First published: September 5, 2019, 6:16 PM IST
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