इस तरह सोनिया-प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कर्नाटक की जंग लड़ रही कांग्रेस

कांग्रेस सूत्रों ने न्यूज 18 को बताया कि पार्टी कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए पूरी कोशिश करेगी. इस बार गोवा, मेघालय और मणिपुर की तरह नहीं होगा.


Updated: May 18, 2018, 3:51 PM IST
इस तरह सोनिया-प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कर्नाटक की जंग लड़ रही कांग्रेस
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी (फाइल फोटो)

Updated: May 18, 2018, 3:51 PM IST
पल्लवी घोष

कर्नाटक में सरकार बनाने की खींचतान के बीच कांग्रेस, बीजेपी को मात देने का कोई मौका नहीं छोड़ रही. बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए कांग्रेस ने समय गंवाए बिना तुरंत जनता दल को समर्थन दे दिया. फिलहाल कांग्रेस के पास 78 सीटों के अलावा जेडी (एस) की 38 सीटों का समर्थन है.

जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस मामले को लेकर सोनिया गांधी से बात की थी. कर्नाटक में सरकार बनाने की रणनीति में सोनिया के अलावा प्रियंका गांधी और परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल थे.

बेंगलुरु में मौजूद कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी गुलाम नबी आज़ाद और अशोक गहलोत यह सुनिश्चित किए हुए हैं कि कोई भी विधायक दूसरी पार्टी में न जाए. ममता बनर्जी, मायावती और सीताराम येचुरी ने भी इस मामले में अपने इनपुट दे रहे हैं. टीडीपी और टीआरएस भी कांग्रेस के टॉप लीडर अहमद पटेल और गुलाम नबी आज़ाद के संपर्क में हैं.

कांग्रेस सूत्रों ने न्यूज 18 को बताया कि पार्टी कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए पूरी कोशिश करेगी. इस बार गोवा, मेघालय और मणिपुर की तरह नहीं होगा, जहां सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद वे सरकार नहीं बना पाए.

ये साफ है कि कर्नाटक में कम सीटें हासिल करने के बाद कांग्रेस प्लान B के साथ तैयार थी और इसीलिए पार्टी ने कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने की शर्त पर जेडी (एस) को समर्थन दे दिया.

चुनाव के बाद गठबंधन करते ही कांग्रेस ने तुरंत सभी विधायकों को इकट्ठा किया और बेंगलुरु भेज दिया, ताकि उन्हें तोड़ा न जा सके. यही नहीं सरकार बनाने के लिए कांग्रेस नेता तुरंत गवर्नर से मिले और उन्हें समर्थन पत्र सौंपा

वहीं जब गवर्नर ने कांग्रेस को दरकिनार करते हुए बीजेपी को सरकार बनाने का आमंत्रण दिया तो अभिषेक मनु सिंघवी ने कानूनी मोर्चा संभाला. सिंघवी ने येदियुरप्पा की शपथ के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. यही नहीं, मामले की सुनवाई के लिए आधी रात को सुप्रीम कोर्ट को खोला गया. इस कानूनी लड़ाई में कपिल सिब्बल और पी. चिदंबरम भी उनके साथ थे.

अगर कांग्रेस-जेडी (एस) फ्लोर टेस्ट पास कर लेती है तो यह कांग्रेस के लिए नैतिक और राजनीतिक जीत होगी.
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