गांव में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सरकार ने कसी कमर, घर-घर हो रही है टेस्टिंग

उत्तर प्रदेश में पहले से ही गांवों में बड़े पैमाने पर कोरोना टेस्ट का अभियान चलाया जा रहा है

उत्तर प्रदेश में पहले से ही गांवों में बड़े पैमाने पर कोरोना टेस्ट का अभियान चलाया जा रहा है

Coronavirus 2nd Wave In Villages: सरकार ने कहा है कि घर पर रह रहे मरीज को किट उपलब्ध कराई जाए जिसमें पैरासिटामोल 500 मिलीग्राम, आइवरमैक्टिन, खांसी की सिरप, मल्टीविटामिन जैसी आवश्यक दवाओं के साथ ही एक विस्तृत पैम्फ्लेट हो.

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नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण (Coronavirus 2nd Wave) के मामले अब शहरों में धीरे-धीरे घटने लगे हैं. लेकिन गांव के हालात तेज़ी से बिगड़ रहे हैं. लिहाजा सरकार ने ग्रामीण इलाकों में महामारी को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं. अब डोर टू डोर कोरोना के टेस्ट किए जा रहे हैं. साथ ही वैक्सीनेशन सेंटर की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है. इसके अलावा ऑक्सीजन बेड की संख्या भी बढ़ाई जा रही है. इस बीच राज्य सरकार ने अस्थायी तौर पर मेडिकल स्टाफ और नर्सों की बहाली भी शुरू कर दी है. कहा जा रहा है कि अब ग्रामीण इलाकों में वायरस के संक्रमण को रोकना केंद्र सरकार की प्राथमिकता बन गई है.

ग्रामीण इलाकों में कोविड-19 के मामले बढ़ने पर केंद्र ने रविवार को नए दिशा निर्देश जारी किये हैं. सरकार ने शहरी क्षेत्रों से सटे इलाकों और ग्रामीण इलाकों में जहां घर पर आइसोलेशन संभव नहीं है वहां दूसरी बीमारियों से ग्रसित बिना लक्षण वाले या हल्के लक्षण वाले मरीजों के लिए कम से 30 बिस्तर वाले कोविड देखभाल केंद्र बनाने की सलाह दी है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि उप केंद्रों या स्वास्थ्य केंद्रों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों समेत सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में रैपिड एंटीजन जांच (आरएटी) किट्स उपलब्ध होनी चाहिए. इस बीच उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान की सरकार ने पहले से ही इस दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं.

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मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने कोरोना के संक्रमण को खत्म करने के खिलाफ पहले ही अभियान शुरू कर दिया है. इस अभियान का मकसद है गांव में कोरोना के संक्रमण को कम करना. राज्य सरकार गांवों में स्क्रीनिंग, लोगों की जांच और दवा वितरण के लिए घर-घर टीम भेज रही है. एमपी ने 50,846 गांवों के लिए क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप का गठन किया है, जिसमें 5.34 लाख से अधिक सदस्य शामिल हैं. ये लोग घर-घर जाकर ग्रामीणों को कोरोना के बारे में बताते हैं.

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राजस्थान



कांग्रेस शासित राजस्थान में, राज्य सरकार ने गांवों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में मदद के लिए 25,000 से अधिक नर्सों और 1000 चिकित्सा अधिकारियों को अस्थायी रूप से नियुक्त करने का फैसला किया है. प्रत्येक सीएचसी में कम से कम 10 आईसीयू और उच्च प्रवाह ऑक्सीजन बेड के इंतज़ाम किए जाएंगे. सभी जिलाधिकारियों ने पुलिस अधिकारियों के साथ गांवों में डोर-टू-डोर सर्वेक्षण की निगरानी करने और गांवों में लॉकडाउ की शर्तों का पालन सुनिश्चित करने के लिए टीमों का नेतृत्व करना शुरू कर दिया है. पंचायतों को उन ग्रामीणों की आवाजाही को प्रतिबंधित करने के लिए कहा जा रहा है जो कोविड पॉजिटिव हैं.


उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में पहले से ही गांवों में बड़े पैमाने पर कोरोना टेस्ट का अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान में 72,000 निगरानी दल शामिल हैं, इसके अलावा इसमें चार लाख स्वास्थ्य कार्यकर्ता और निगरानी समिति के सदस्य शामिल हैं, जो लगभग 97,000 गांवों में घर-घर जा रहे हैं ताकि लक्षणों वाले व्यक्तियों की जांच की जा सके और उन्हें चिकित्सा किट और दवाएं दी जा सकें. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस सप्ताह विभिन्न जिलों के गांवों का दौरा कर रहे हैं, ताकि राज्य के ग्रामीण हिस्सों में कोविड से कैसे लड़ा जा रहा है, इसका प्रत्यक्ष अनुभव किया जा सके

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