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महाराष्ट्र में आखिर कैसे बना BJP सरकार का रोडमैप, जानें Inside Story

Anil Rai | News18Hindi
Updated: November 23, 2019, 11:03 AM IST
महाराष्ट्र में आखिर कैसे बना BJP सरकार का रोडमैप, जानें Inside Story
शनिवार सुबह करीब 8 बजे जब लोगों ने देवेंद्र फडणवीस को शपथ लेते देखा तो हर कोई हैरान रह गया.

महाराष्ट्र (Maharashtra) में देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के शपथ ग्रहण के साथ ही तस्वीर साफ हो गई थी कि आखिर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) ने अपना दिल्ली (Delhi) दौरा क्यों रद्द किया था.

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  • Last Updated: November 23, 2019, 11:03 AM IST
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नई दिल्ली. महाराष्ट्र (Maharashtra) में एक बार फिर बीजेपी (BJP) की सरकार बन गई है, लेकिन ये सरकार कैसे बनी इस पर अभी तक सस्पेंस बना हुआ है. बीजेपी कुछ बड़ा करने जा रही है, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगना शुरू हो गया था जब अचानक राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) ने अपना दिल्ली (Delhi) दौरा रद्द कर दिया था. राजनीति के जानकार इस बात को ठीक से समझ रहे थे कि आखिर शिवसेना (Shiv Sena) को सरकार बनाने के लिए 3 दिन का समय न बढ़ाने वाले राज्यपाल ने उद्धव ठाकरे के इंतजार में अपना दिल्ली दौरा कैसे रद्द कर दिया. हालांकि आज सुबह देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के शपथ लेने के साथ ही तस्वीर साफ हो गई कि आखिर राज्यपाल ने अपना दिल्ली दौरा क्यों रद्द किया था.

बड़े नेताओं ने बैकडोर से खेला खेल
इस सरकार के गठन की सबसे खास बात ये रही कि जो चेहरे देश में सरकार बनाने के लिए जाने जाते हैं वो सब सरकार गठन की प्रक्रिया से दूर रहे. बीजेपी की ओर से जहां पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने एनसीपी नेताओं से किसी तरह की बैठक से अपने आपको दूर रखा, वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी बैठकों से दूर रहे. यही नहीं एनसीपी नेता अजित पवार भी बीजेपी के साथ सरकार गठन की बैठकों से दूर रहे. इन सभी नेताओं के रुख को देखने से साफ हो जाता है कि सरकार गठन की प्रक्रिय पूरी होने से पहले दोनों दलों ने मीडिया और कांग्रेस-शिवसेना का ध्यान दूसरी तरफ रखा, जिससे जब तक सरकार बनाने का रोडमैप पूरी तरह फाइनल न हो जाए इसकी भनक किसी को न लगे. दोनों दलों को पता था कि अगर दोनों दलों के बीच बात नहीं बनती तो आगे इसका नुकसान भी हो सकता था.

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अजित ने पहले शरद पवार को मनाने की कोशिश की
सूत्रों की मानें तो एक ओर जहां एनसीपी शिवसेना के साथ लगतार सरकार बनाने की कोशिश कर रही थी, वहीं अजित पवार लगातार शरद पवार पर बीजेपी को समर्थन देने का दबाव बनाए हुए थे. ऐसे में 22 नवंबर की रात अजित पवार को लगने लगा कि शरद पवार बीजेपी के साथ जाने को तैयार नहीं हैं और शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस की सरकार बनेगी. इसके बाद आनन-फानन में अजित पवार ने पार्टी तोड़ने का फैसला कर लिया.

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लोकसभा चुनाव में भी अजित और शरद के बीच मतभेद की खबरें सामने आईं थीं
एनसीपी में शरद पवार की विरासत को लेकर पहले भी सुप्रिया सुले और अजित पवार में खींचतान चल रही थी और इसकी भनक लोकसभा चुनाव के दौरान भी सामने आई थी. उस वक्त अजित पवार के बेटे पार्थ को टिकट देने के मामले पर भी शरद पवार और अजित पवार के बीच मतभेद की खबरें सामने आईं थीं. उस वक्त पार्थ के चुनाव लड़ने पर शरद पवार ने कड़ा ऐतराज जताते हुए उनका टिकट काट दिया था.

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First published: November 23, 2019, 10:29 AM IST
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